बालाघाट पहुंचे अभिजीत दीपके, सवाल सुनकर भागे, क्यों हुई FIR की मांग, जानें मामला
ऐसे समझें पूरा मामला...
- बालाघाट में बच्चों की मौत के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है।
- अभिजीत दीपके ने खुद को CM बताकर इस्तीफा पोस्ट किया।
- फर्जी लेटरहेड के बाद दीपके पर FIR की मांग तेज हो गई है।
- बालाघाट गए दीपके को इंन्फ्लूएंसर्स के तीखे सवाल सुनने पड़े।
- अभिजीत को माफी मांगकर दूसरी कार से भागना पड़।
बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत का मामला नए सिरे से गरमा गया है। शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दीपके पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे थे। वहां लोगों और इन्फ्लुएंसर्स ने उनसे तीखे सवाल किए।
इसके बाद दीपके ने खुद को CM बताते हुए फर्जी लेटरहेड ( Fake letterhead ) पर इस्तीफा लिखा और पोस्ट कर दिया। अब सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ FIR और गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई है। दरअसल, प्रतीकात्मक लेटरहेड पर राष्ट्रीय चिन्ह का उपयोग किया गया है जो कि मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन है।
30 से ज्यादा बच्चों की हुई थी मौत
बता दें कि मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में बीते दिनों 30 से ज्यादा आदिवासी बच्चों की मौत हुई थी। यह मौतें संक्रामक बीमारियों से हुई मानी जा रही हैं। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार को नोटिस भी जारी किया है।
इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके शनिवार को बालाघाट के आदिवासी गांवों में पहुंचे। उन्होंने बच्चों को खोने वाले परिवारों से मुलाकात की और प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग की।
तीखे सवालों से घिरे दीपके
दीपके के दौरे के दौरान सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ने उनका विरोध किया। उनसे बच्चों की मौत पर राजनीति करने और इलाके में देर से पहुंचने को लेकर सवाल पूछे गए।
वायरल वीडियो में लोग दीपके से कह रहे थे, देख लो भाग गया, भाग गया। इस दौरान दीपके ने देर से आने के लिए माफी मांगी और दूसरी गाड़ी से वहां से निकल गए।
ग्रामीणों और बैगा परिवारों से बातचीत में दीपके ने आरोप लगाया कि गांवों में शुद्ध पेयजल, पोषण और समय पर इलाज की सुविधा नहीं मिल रही। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की और सरकार को बड़े आंदोलन की चेतावनी भी दी।
फर्जी लेटरहेड पर इस्तीफे का ड्रामा
बालाघाट में विरोध का सामना करने के बाद दीपके ने सोशल मीडिया पर एक व्यंग्यात्मक पोस्ट डाला। इसमें उन्होंने खुद को मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बताते हुए इस्तीफा देने की बात लिखी।
ह पोस्ट कथित तौर पर एक फर्जी लेटरहेड पर था जिस पर राष्ट्रीय चिन्ह का भी उपयोग किया गया है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर विवाद तेजी से फैल गया।
कोई नहीं कर सकता निजी उपयोग
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के अधिवक्ता मोहित वर्मा ने बताया कि इसके लिए द स्टेट इम्ब्लेम ऑफ इंडिया (प्रोहिबिशन ऑफ इम्प्रॉपर यूज) एक्ट, 2005 में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।
इसके रूल 10 के तहत इस चिन्ह का उपयोग कोई भी व्यक्ति नहीं कर सकता, यदि कोई निजी व्यक्ति इस चिन्ह का दुरुपयोग करता है तो इसके लिए सजा का भी प्रावधान है।
यदि किसी मंत्रालय के साथ कोई संस्था इवेंट कर रही हो तो परमिशन के साथ स्टेशनरी में चिन्ह का इस्तेमाल जरूर किया जा सकता है, लेकिन आम व्यक्ति तो छोड़िए पद से हटने के बाद पूर्व मंत्री जैसे व्यक्ति भी इस चिन्ह का इस्तेमाल नहीं कर सकते।
राज्य प्रतीक (अनुचित प्रयोग का निषेध) अधिनियम, 2005 के तहत इस नियम का उल्लंघन करने पर कारावास और जुर्माने दोनों का प्रावधान है।
अब FIR की मांग तेज
इस पोस्ट के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने दीपके के खिलाफ FIR दर्ज करने और गिरफ्तारी की मांग शुरू कर दी है। आरोप है कि उन्होंने फर्जी लेटरहेड का इस्तेमाल कर सरकारी पद का दुरुपयोग किया।
दीपके के खिलाफ FIR और गिरफ्तारी की मांग का यह मामला नया नहीं है। इससे पहले अगस्त में महाराष्ट्र के लातूर में एक स्कूल में बिना अनुमति प्रवेश करने और सरकारी कामकाज में बाधा डालने के आरोप में भी उनके खिलाफ FIR दर्ज होने की खबर आई थी।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर यह अभी स्पष्ट नहीं है कि बालाघाट के इस्तीफा पोस्ट को लेकर कोई औपचारिक FIR दर्ज हुई है या नहीं। मामले पर आगे की जानकारी सामने आना बाकी है।
FAQ
- अभिजीत दीपके कौन हैं?
अभिजीत दीपके कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक और संयोजक हैं। वे हाल में बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत के मामले में सक्रिय हुए। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की थी। - दीपके के खिलाफ FIR की मांग क्यों हो रही है?
दीपके ने खुद को CM बताकर फर्जी लेटरहेड पर इस्तीफा पोस्ट किया। इसे लेकर सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा हुआ। इसी वजह से अब उनके खिलाफ FIR और गिरफ्तारी की मांग तेज हुई है। - बालाघाट में बच्चों की मौत का मामला क्या है?
बालाघाट में 30 से ज्यादा आदिवासी बच्चों की मौत संक्रामक बीमारियों से हुई मानी जा रही है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने इस पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। यही मामला दीपके के दौरे की वजह बना।
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