एआईजी राजेश मिश्रा पर रेप का आरोप, शिकायत के चार दिन बाद भी FIR नहीं
समझें क्या है पूरा मामला
- भोपाल के पीटीआरआई में तैनात एआईजी राजेश मिश्रा पर युवती से रेप का आरोप है।
- पीड़िता ने डीजीपी, मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री को शिकायत भेजी थी।
- विभागीय जांच में आरोप सही पाए गए, फिर भी एफआईआर नहीं हुई।
- आरोप है कि श्यामला हिल्स थाने में पीड़िता को घंटों इंतजार कराया गया।
- युवती के वकील ने कहा है कि जरूरत पड़ी तो कोर्ट का रास्ता अपनाएंगे।
भोपाल में तैनात एआईजी राजेश मिश्रा पर एक गंभीर आरोप लगा है। एक युवती ने उन पर रेप का आरोप लगाया है। इसकी शिकायत युवती ने शहर के श्यामला हिल्स थाने में की है।
शिकायत किए चार दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की है। पीड़िता का कहना है कि उसे इंसाफ के लिए भटकना पड़ रहा है। इससे पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
नियम क्या कहते हैं...
नियम के मुताबिक गंभीर अपराध की शिकायत पर तुरंत एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। ऐसे मामलों में देरी को गंभीर लापरवाही माना जाता है। पीड़िता का आरोप है कि उसके साथ ठीक यही हो रहा है। एक बड़े पुलिस अधिकारी का नाम जुड़े होने से मामला और संवेदनशील बन गया है।
थाने में क्या हुआ
शुक्रवार को पीड़िता श्यामला हिल्स थाने पहुंची थी। बताया गया कि वहां उसे कई घंटे इंतजार करना पड़ा। श्यामला हिल्स पुलिस पहले आवेदन लेने को तैयार नहीं थी। करीब तीन घंटे बाद थाना प्रभारी यानी टीआई (थाना प्रभारी इंचार्ज) ने आवेदन लिया। बाद में उसकी रसीद एक अधीनस्थ कर्मचारी से कराई गई। पीड़िता को यह व्यवहार अपमानजनक लगा।
इस दौरान थाने में वरिष्ठ अधिकारियों के फोन भी आते रहे। इससे साफ लगा कि मामला ऊपर तक पहुंच चुका है। पीड़िता को इसके बाद एडिशनल डीसीपी दफ्तर भेजा गया। वहां भी उसे सिर्फ आश्वासन मिला। कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। थक हारकर अगले दिन सुबह वह वापस राजस्थान लौट गई। पूरे दिन के इंतजार के बाद भी उसे राहत नहीं मिली।
शादी का झांसा
पीड़िता के मुताबिक फरवरी 2025 में एक शादी समारोह में राजेश मिश्रा से मुलाकात हुई थी। दोनों के बीच जान-पहचान बढ़ी थी। आरोप है कि मिश्रा ने शादी का वादा करके भरोसा जीता। इसके बाद भोपाल, इंदौर, मुंबई और दिल्ली में शोषण किया गया।
पीड़िता का कहना है कि यह सिलसिला महीनों चला। पीड़िता का यह भी दावा है कि जयपुर में उससे 32 लाख रुपए खर्च कराए गए। पैसे लेने के बाद आरोपी ने अचानक संपर्क तोड़ दिया। इससे पीड़िता को बड़ा आर्थिक झटका लगा। शोषण की जगहों को लेकर बयान में मामूली फर्क दिख रहा है, हालांकि आर्थिक नुकसान की रकम साफ तौर पर बताई गई है। यह ब्योरा शिकायत में भी दर्ज है।
जांच में क्या मिला
पीड़िता ने 31 अक्टूबर 2025 को डीजीपी, मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री को ई-मेल भेजा था। इसमें उसने अपनी पूरी आपबीती लिखी थी। ई-मेल में आर्थिक और शारीरिक शोषण की शिकायत की गई थी।
11 नवंबर को उसने पुलिस मुख्यालय भोपाल यानी पीएचक्यू (पुलिस हेडक्वार्टर) में लिखित शिकायत भी दी। इसके बाद विभागीय जांच शुरू हुई। पीड़िता का दावा है कि जांच में उसके आरोप सही साबित हुए। जांच रिपोर्ट में उसके पक्ष की पुष्टि होने की बात कही गई है। इसके बावजूद पिछले आठ महीने से एफआईआर दर्ज (rajesh mishra mp) नहीं की गई है। पीड़िता का कहना है कि यह देरी जानबूझकर की जा रही है। यह पूरा मामला अब सवालों के घेरे में है।
पीड़िता ने कहा कि उसने हर जरूरी दस्तावेज पहले ही जमा कर दिए थे। इसके बाद भी उसे इंसाफ (mp women safety) के लिए भटकना पड़ रहा है। उसका कहना है कि यह देरी उसका हौसला तोड़ने की कोशिश जैसी लगती है।
पुलिस और वकील का पक्ष
पीड़िता के वकील वैभव ने कहा कि पुलिस पर लगातार दबाव डाला जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि नियम के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए। अगर एफआईआर नहीं हुई तो पहले एसीपी (असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस) से शिकायत करेंगे।
इसके बाद जरूरत पड़ने पर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा। वकील ने भरोसा जताया कि पीड़िता को इंसाफ जरूर मिलेगा। श्यामला हिल्स थाना प्रभारी घूमेंद्र सिंह ने कहा कि आवेदन वरिष्ठ अधिकारियों को भेज दिया गया है। उनके निर्देश के बाद ही आगे कार्रवाई होगी।
एसीपी संतोष पटेल ने भी कहा कि मामला वरिष्ठ स्तर का है। उनका कहना है कि निर्देश के मुताबिक ही जांच आगे बढ़ेगी। दोनों अधिकारियों ने सीधे तौर पर कुछ भी कहने से परहेज किया।
पीड़िता का कहना है कि इतने सबूत देने के बाद भी उसे बार-बार दफ्तरों के चक्कर काटने पड़े। उसका सवाल है कि आम आदमी की शिकायत पर इतनी देरी क्यों होती है। उसने कहा कि सिर्फ आरोपी बड़ा अधिकारी होने से कार्रवाई नहीं रुकनी चाहिए।
चलिए पूरी कहानी को विस्तार से समझते हैं…
2025 में राजस्थान की एक फैशन डिजाइनर ने मप्र के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एडिशनल इंस्पेक्टर जनरल (AIG) राजेश मिश्रा पर गंभीर आरोप लगाए थे। इनमें धोखाधड़ी और शारीरिक- मानसिक उत्पीड़न के आरोप शामिल थे।
इसके बाद मध्य प्रदेश के डीजीपी कैलाश मकवाना ने मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए थे। साथ ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तरुण नायक को इसकी जांच की जिम्मेदारी सौंप दी थी। जनवरी 2026 में एआईजी मिश्रा (aig rajesh mishra) को सीआईडी से हटाकर पीटीआरआई भेज दिया था।
ये हैं मुख्य आरोप...
- महिला का दावा है कि फरवरी 2025 में एक शादी के दौरान एआईजी राजेश मिश्रा से मुलाकात हुई थी।
- इसके बाद मिश्रा ने बुटीक बिजनेस में साझेदारी का लालच देकर महिला से पैसे ऐंठ लिए।
- राजेश मिश्रा और महिला होटल हॉलीडे में ठहरे, जिसका एक लाख रुपए किराया महिला ने दिया।
- जयपुर में ही महिला के पैसों से राजेश मिश्रा ने अपने परिवार के सदस्यों के लिए तीन लाख के कपड़े खरीदे।
- इसके अलावा करीब 27 लाख की ज्वेलरी भी महिला के पैसों से ही खरीदी गई।
- नलखेड़ा के बगलामुखी मंदिर में पति-पत्नी बनकर हवन और होटलों में शारीरिक शोषण के आरोप भी लगे हैं।
- यात्राओं के दौरान महंगे होटलों, शॉपिंग और गिफ्ट्स पर लाखों खर्च कराए गए, जिन्हें लौटाने का वादा राजेश मिश्रा ने किया था, लेकिन बाद में नंबर ही ब्लॉक कर दिया।
अब खबर विस्तार से…
कोर्ट के माध्यम से पुलिस तक आई शिकायत में जयपुर की इस फैशन डिजाइनर ने दावा किया था कि राजेश मिश्रा और उनकी पत्नी ने विश्वास जीतने के लिए उन्हें अपने फैशन बुटीक और बिजनेस में साझेदारी का वादा किया। इसके बाद धीरे-धीरे उन पर शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न का दबाव बनाया गया।
महिला ने यह भी आरोप लगाया कि मिश्रा ने उनका फायदा उठाकर महंगे होटल और रेस्टोरेंट्स में लाखों रुपए खर्च करवाए। साथ ही उनके नाम पर महंगी ज्वेलरी भी खरीदी, जिसका भुगतान बाद में नहीं किया गया। इतना ही नहीं, जयपुर में 27 लाख रुपए के डायमंड ज्वेलरी की खरीद भी की गई, लेकिन यह रकम वापस करने का वादा पूरा नहीं हुआ।
साथ में ठहरे थे कई होटलों में
पिछले साल फरवरी में दोनों की पहली मुलाकात के बाद से ही दोनों लगातार संपर्क में रहे। इसके बाद राजेश मिश्रा (MP Police) ने फैशन डिजाइनर के साथ कई यात्राएं कीं। आरोप है कि इन यात्राओं में लाखों रुपए खर्च किए गए और उनसे शारीरिक संबंध बनाने के लिए भी दबाव डाला गया। पीड़िता के पास इन घटनाओं के सबूत के रूप में होटल और ट्रांजेक्शन बिल, ज्वेलरी खरीद की रसीदें, क्रेडिट कार्ड के विवरण और तस्वीरें मौजूद हैं।
पति- पत्नी बनकर किया था हवन
इतना ही नहीं, एक और चौंकाने वाला आरोप सामने आया, जिसमें फैशन डिजाइनर ने बताया कि राजेश मिश्रा और उन्होंने नलखेड़ा के बगलामुखी मंदिर में एक साथ हवन किया था। वहां ये दोनों पति-पत्नी के रूप में मौजूद थे। पीड़िता का कहना है कि 6 अक्टूबर के बाद से मिश्रा ने उसका फोन उठाना बंद कर दिया, और उनके बीच संपर्क भी टूट गया।
FAQ
- सवाल: एआईजी राजेश मिश्रा पर क्या आरोप है?
जवाब: एआईजी राजेश मिश्रा पर एक युवती का आरोप है कि शादी का झांसा देकर उसका आर्थिक और शारीरिक शोषण किया गया। भोपाल, इंदौर, मुंबई, दिल्ली और जयपुर में यह शोषण हुआ बताया जा रहा है।
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