अजाक्स संगठन बना अखाड़ा : मुकेश मौर्य vs IAS संतोष वर्मा आमने-सामने, नेमप्लेट उखाड़ने से FIR तक बवाल
मध्यप्रदेश के अजाक्स (AJAKS) संगठन में नेतृत्व को लेकर घमासान अब खुली जंग में बदल चुका है। एक तरफ खुद को वैधानिक अध्यक्ष बताने वाले मुकेश मौर्य हैं, तो दूसरी ओर IAS संतोष वर्मा अपने नेतृत्व का दावा कर रहे हैं।
विवाद इतना बढ़ गया कि दफ्तर में नेमप्लेट उखाड़ी गई, पुलिस पहुंची और मामला FIR तक जा पहुंचा। इसी बीच IAS संतोष वर्मा ने चेतावनी दी है कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति के कर्मचारियों का आक्रोश बढ़ रहा है, इसका खामियाजा सरकार को भुगतना पड़ेगा।”
क्या है पूरा मामला?
अजाक्स में लंबे समय से यह विवाद चल रहा है कि असली प्रदेश अध्यक्ष कौन है। 20 मार्च को यह विवाद चरम पर पहुंच गया, जब दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। दफ्तर में कब्जे और नेमप्लेट बदलने की घटना ने पूरे मामले को और भड़का दिया।
अबतक का घटनाक्रम
20 मार्च को मुकेश मौर्य अपने समर्थकों के साथ अजाक्स कार्यालय पहुंचे। कार्यालय में लगी जेएन कंसोटिया, संतोष वर्मा और एस एल सूर्यवंशी की नेमप्लेट हटाकर अपनी प्लेट लगा दी।
दूसरे पक्ष ने भी पलटवार करते हुए मौर्य की नेमप्लेट हटा दी। मौके पर पुलिस मौजूद रही, फिर भी विवाद नहीं थमा। मुकेश मौर्य की शिकायत पर एक महिला पर FIR दर्ज हुई। अन्य 8 लोगों को बाउंडओवर किया गया। वर्मा का आरोप है कि हमारे शिकायती आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। विवाद के बाद दोनों गुट अलग-अलग जगहों पर बैठकर खुद को अध्यक्ष बता रहे हैं।
मुकेश मौर्य के आरोप
मुकेश मौर्य का दावा है कि वे वैधानिक अध्यक्ष हैं और उनके पास रजिस्ट्रार की मान्यता प्राप्त सूची है। उनका कहना है
- “संतोष वर्मा के पास कोई लीगल दस्तावेज नहीं है”
- “हम वैधानिक प्रक्रिया से अध्यक्ष बने हैं, इसलिए कार्यालय पर हमारा अधिकार है”
- “हमें साजिशन थाने बुलाकर हमारी नेमप्लेट तोड़ी गई”
- “कार्यालय में असामाजिक तत्वों को बुलाया जा रहा है” मौर्य ने यह भी कहा कि वे अंबेडकर जयंती की तैयारी को लेकर बैठक कर रहे थे, उसी दौरान विवाद भड़काया गया।
IAS संतोष वर्मा के आरोप
IAS संतोष वर्मा ने मौर्य पर गंभीर आरोप लगाए हैं और उनकी वैधता पर सवाल खड़े किए हैं। उनके मुताबिक:
- “मुकेश मौर्य सदस्य बनने के योग्य ही नहीं हैं”
- “उन्होंने करीब “सदस्यता के नाम पर आर्थिक गड़बड़ी की”
- “इस मामले में कोर्ट में प्राइवेट परिवाद लंबित है”
- वर्मा का दावा है कि मौर्य को पहले ही संगठन से निष्कासित किया जा चुका है, इसके बावजूद वे खुद को अध्यक्ष बता रहे हैं।
संतोष वर्मा की सरकार को चेतावनी
विवाद के बीच संतोष वर्मा ने बड़ा राजनीतिक बयान देते हुए कहा: “अनुसूचित जाति-जनजाति कर्मचारियों में आक्रोश बढ़ रहा है। अगर यह नहीं रुका, तो इसका खामियाजा सरकार को भुगतना पड़ेगा।” इस बयान ने पूरे विवाद को सिर्फ संगठनात्मक नहीं, बल्कि राजनीतिक रंग भी दे दिया है।
पहले भी हो चुका है विवाद
- 2023 में सदस्यता और चुनाव को लेकर विवाद शुरू हुआ
- रजिस्ट्रार और फर्म-सोसाइटी में अलग-अलग दावे पेश किए गए
- जे एन कंसोटिया, संतोष वर्मा और सूर्यवंशी गुट बनाम मौर्य गुट आमने-सामने आ गए
- कई बार शिकायतें, आवेदन और प्रशासनिक हस्तक्षेप हुआ, लेकिन समाधान नहीं निकला
अभी क्या स्थिति है?
अभी हालात यह हैं कि:
- अजाक्स कार्यालय दो हिस्सों में बंटा नजर आ रहा है
- नीचे के हिस्से में मुकेश मौर्य बैठ रहे हैं। ऊपर के चैंबर में आईएएस संतोष वर्मा और उनके समर्थक
- दोनों गुट अपने-अपने स्तर पर बैठकें और गतिविधियां चला रहे हैं
- अजाक्स जैसे बड़े कर्मचारी संगठन में नेतृत्व की यह लड़ाई अब संगठन की साख पर सवाल खड़े कर रही है।
दो-दो अध्यक्ष, पुलिस कार्रवाई और आपसी आरोप के बीच असली मुद्दे पीछे छूटते नजर आ रहे हैं। अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो यह विवाद न सिर्फ संगठन बल्कि सरकार के लिए भी बड़ी परेशानी बन सकता है।
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