अमित शाह थे तो भोपाल, लेकिन दिल लगा था दिल्ली में, आखिर क्यों कि दो बार पीएम मोदी से बात, प्रेस कॉन्फ्रेंस भी कैंसिल
अमित शाह ने इसके बाद गृह सचिव को बुलाया। पहले कहा गया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस वे खुद नहीं करेंगे। गृह सचिव को इसे संभालने के लिए कहा गया। बाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस ही रद्द कर दी गई। पुलिस अधिकारियों की बैठक और IISER के कार्यक्रम में भी मुख्यमंत्री मोहन यादव पहुंचे।
इस बदले हुए कार्यक्रम के बाद राजनीतिक हलकों में अटकलें शुरू हो गईं। कुछ चर्चाएं मध्य प्रदेश की राजनीति को लेकर भी चलीं। एक चर्चा यह भी रही कि कुछ राज्यसभा सीटों को लेकर अमित शाह की दिल्ली में पार्टी नेतृत्व से बातचीत चल रही थी। हालांकि इन अटकलों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।
दिलचस्प बात यह रही कि इतने बदलावों के बावजूद अमित शाह तय समय के आसपास ही भोपाल से दिल्ली रवाना हुए। ऐसे में सवाल बना रहा कि आखिर होटल में करीब छह घंटे तक किन मुद्दों पर बातचीत और काम चलता रहा।
गोपालक सम्मेलन के बाद बदला शेड्यूल
अमित शाह का भोपाल दौरा पहले से मिनट-टू-मिनट तय था। भेल दशहरा मैदान में नए आपराधिक कानूनों की प्रदर्शनी और राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन के बाद उन्हें दोपहर करीब 1:30 बजे होटल ताज पहुंचना था।
होटल में मध्य प्रदेश सरकार और केंद्रीय गृह मंत्रालय से जुड़े लंबित विषयों पर करीब दो घंटे की बैठक प्रस्तावित थी। इसके बाद नारकोटिक्स से जुड़े मुद्दों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस भी होनी थी। गोपालक सम्मेलन खत्म होने के बाद कार्यक्रम में बदलाव शुरू हो गया।
बैठक नहीं हुई, प्रेस कॉन्फ्रेंस भी रद्द
होटल ताज में प्रस्तावित बैठक नहीं हुई। इसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस भी रद्द कर दी गई। यहीं से सवाल उठने लगे कि पहले से तय कार्यक्रम अचानक क्यों बदले।
सूत्रों के मुताबिक अमित शाह ने होटल पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दो बार बातचीत की। इसके बाद उन्होंने कुछ जरूरी बातें नोट कीं। अपने पीए को उन्हें टाइप कराने के निर्देश भी दिए।
इसके बाद गृह सचिव को बुलाया गया। पहले कहा गया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस अमित शाह के बजाय गृह सचिव करें। कुछ समय बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस पूरी तरह रद्द कर दी गई। इन बदलावों की विस्तृत आधिकारिक वजह सामने नहीं आई।
पुलिस बैठक में पहुंचे सीएम मोहन यादव
भोपाल दौरे में अमित शाह की वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक भी प्रस्तावित थी। कार्यक्रम में बदलाव के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस बैठक में पहुंचे। अमित शाह बैठक में शामिल नहीं हुए। इसी तरह IISER भोपाल के कार्यक्रम में भी मुख्यमंत्री पहुंचे।
मूल कार्यक्रम के मुताबिक अमित शाह को शाम 5:15 बजे होटल ताज से IISER के विस्तारित परिसर के लिए रवाना होना था। वहां शिलान्यास और स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा के अनावरण से जुड़े कार्यक्रम प्रस्तावित थे।
करीब छह घंटे होटल में बंद रहे शाह
गोपालक सम्मेलन के बाद अमित शाह होटल ताज पहुंचे। इसके बाद वे करीब छह घंटे होटल में रहे। इसी दौरान उनके बाकी कार्यक्रमों में एक के बाद एक बदलाव सामने आए।
होटल के भीतर उनकी सभी गतिविधियों की आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई। इसलिए वहां हुई बैठकों या बातचीत को लेकर सामने आई हर चर्चा की स्वतंत्र पुष्टि नहीं है। इतना जरूर साफ रहा कि बाहर तय कई कार्यक्रमों में अमित शाह खुद शामिल नहीं हुए।
पीएम मोदी से बातचीत ने बढ़ाई चर्चा
सूत्रों के मुताबिक अमित शाह ने होटल में रहते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दो बार बातचीत की। इसके बाद उन्होंने जरूरी बिंदु नोट किए और अपने स्टाफ को निर्देश दिए।
यही घटनाक्रम राजनीतिक हलकों में चर्चा का कारण बना। सवाल उठने लगा कि क्या दिल्ली में कोई ऐसा राजनीतिक या प्रशासनिक विषय था, जिस पर तत्काल बातचीत जरूरी हो गई थी। इस सवाल का आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है।
मध्य प्रदेश की राजनीति पर भी चर्चा
अमित शाह के अचानक बदले कार्यक्रम के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति को लेकर भी अटकलें शुरू हुईं। कुछ राजनीतिक चर्चाओं में नेतृत्व परिवर्तन तक की बातें चल रही हैं। हालांकि ऐसी किसी चर्चा या फैसले की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।
राज्यसभा चुनाव को लेकर भी चर्चा
सूत्रों के स्तर पर एक और चर्चा राज्यसभा चुनाव को लेकर सामने आई। कहा गया कि कुछ राज्यसभा सीटों को लेकर अमित शाह की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी नेतृत्व से बातचीत हो सकती है। हालांकि इस दावे की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।
दिल्ली वापसी का समय भी चर्चा में रहा
अमित शाह का पहले से घोषित कार्यक्रम शाम 7:50 बजे स्टेट हैंगर से दिल्ली रवाना होने का था। दिनभर कार्यक्रम बदलते रहने के कारण उनकी वापसी के समय को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी रही। बाद में उनके दिल्ली रवाना होने की जानकारी सामने आई। कई कार्यक्रम रद्द होने के बावजूद उनकी दिल्ली वापसी निर्धारित समय के आसपास हुई।
कार्यक्रम क्यों बदले, जवाब अब भी नहीं
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल कार्यक्रमों के अचानक बदलने की वजह को लेकर है।
क्या दिल्ली से किसी जरूरी राजनीतिक मामले पर बातचीत चल रही थी? क्या किसी प्रशासनिक विषय पर तत्काल फैसला लेना था? या कार्यक्रम बदलने की कोई दूसरी वजह थी?
अभी तक इन सवालों का जवाब सामने नहीं आया है।