अमृत मिशन में बड़ा एक्शन, पांच ठेकेदार ब्लैकलिस्ट; संकेत भोंडवे ने साफ कहा- देरी अब नहीं चलेगी
समझें क्या है पूरा मामला
- अमृत मिशन में देरी पर 5 कंपनियों पर कार्रवाई हुई।
- भोपाल, देवास, सतना और पीथमपुर प्रभावित शहर हैं।
- संकेत भोंडवे ने लापरवाही को गंभीर माना।
- ब्लैकलिस्ट कंपनियां नई निविदाओं में भाग नहीं लेंगी।
- बचे काम समय पर पूरा करने के निर्देश दिए गए।
महीनों से चल रही सुस्ती पर ब्रेक
अमृत मिशन की सीवरेज परियोजनाओं में महीनों से चल रही सुस्ती पर अब सरकार ने ब्रेक लगा दिया है। मध्यप्रदेश के चार शहरों की पांच परियोजनाओं से जुड़ी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने का फैसला हुआ है। नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने साफ किया कि आम लोगों से जुड़ी परियोजनाओं में देरी और अनुबंध की शर्तों की अनदेखी को अब सामान्य नहीं माना जाएगा।
मामला सिर्फ देरी का नहीं, निगरानी का भी
अमृत मिशन के तहत सीवरेज जैसी परियोजनाएं सीधे शहरों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी हैं। सड़क खुदाई, पाइपलाइन, सीवरेज नेटवर्क और कनेक्शन जैसे कामों में देरी का सीधा असर लोगों पर पड़ता है।
इसी वजह से विभाग ने परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा के बाद ठेकेदार कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई का फैसला किया। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब सरकारी परियोजनाओं की समयसीमा और गुणवत्ता को लेकर निगरानी लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।
भोपाल की दो परियोजनाएं निशाने पर
भोपाल की अमृत 2.0 सीवरेज परियोजना के पैकेज-2 में मेसर्स जयवरूदी इंफ्राकॉन प्राइवेट लिमिटेड और पैकेज-3 में मेसर्स एलसी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ ब्लैकलिस्ट की कार्रवाई की गई है। यानी राजधानी की दो अलग-अलग परियोजनाओं में अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने पर दोनों कंपनियां कार्रवाई के दायरे में आई हैं।
देवास, सतना और पीथमपुर में भी कार्रवाई
देवास की सीवरेज परियोजना में मेसर्स दिनेशचंद्र आर. अग्रवाल इंफ्राकॉन प्राइवेट लिमिटेड पर कार्रवाई हुई है। सतना की अमृत 1.0 परियोजना में मेसर्स इनविराड प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और पीथमपुर की अमृत 2.0 परियोजना में मेसर्स आर. एंड बी. इंफ्रा प्रोजेक्ट लिमिटेड को भी ब्लैकलिस्ट किया गया है।
संकेत भोंडवे का संदेश
नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे की अध्यक्षता में हुई बैठक में संबंधित नगरीय निकायों और ठेकेदार कंपनियों का पक्ष सुना गया। इसके बाद परियोजनाओं की स्थिति की समीक्षा करते हुए कार्रवाई का निर्णय लिया गया।
भोंडवे ने स्पष्ट किया कि अमृत मिशन की परियोजनाएं सीधे जनता से जुड़ी हैं। इसलिए काम में देरी, अनुबंध की शर्तों का पालन नहीं करना और तय समय के मुताबिक प्रगति नहीं होना गंभीर लापरवाही है।
ब्लैकलिस्ट के बाद कंपनियों पर क्या असर?
ब्लैकलिस्ट की अवधि में संबंधित कंपनियां विभाग और उसके अधीन आने वाले नगरीय निकायों की नई निविदाओं और बोलियों में हिस्सा नहीं ले सकेंगी।
आगे भी होगी समीक्षा
IAS संकेत भोंडवे ने साफ किया है कि जनहित की परियोजनाओं में अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। आने वाले समय में परियोजनाओं की नियमित समीक्षा जारी रहेगी।
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