MP के अनघ चित्तौड़ा ने 10 मिनट 48 सेकंड में 50 कठिन मंत्र बोल ने रचा इतिहास

Manya Jain | Jul 31, 2026, 16:15 IST
anagh chittora indore world record
इंदौर के 7 वर्षीय अनघ चित्तौड़ा ने बनाया नया विश्व रिकॉर्ड! 10 मिनट 48 सेकंड में 50 वेद-मंत्रों का किया शुद्ध उच्चारण। वर्ल्ड वाइड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ अनघ का लगातार तीसरा रिकॉर्ड।

इंदौर के सात वर्षीय अनघ चित्तौड़ा ने नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने 10 मिनट 48 सेकंड में 50 वेद-मंत्रों और संस्कृत श्लोक का शुद्ध उच्चारण किया। यह उपलब्धि 'वर्ल्ड वाइड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' में दर्ज हुई है। यह अनघ का लगातार तीसरा विश्व रिकॉर्ड है। इससे पहले वह गणना और आयुर्वेदिक मसालों की पहचान में भी रिकॉर्ड बना चुके हैं।



इंदौर के सात वर्षीय बालक अनघ चित्तौड़ा ने एक बार फिर पूरे देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने महज 10 मिनट 48 सेकंड में 50 कठिन वेद-मंत्रों और संस्कृत श्लोकों का शुद्ध उच्चारण कर विश्व रिकॉर्ड बनाया है। इतनी छोटी उम्र में उनके आत्मविश्वास और स्पष्ट उच्चारण ने सबको चौंका दिया। इस उपलब्धि को वर्ल्ड वाइड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स (World Wide Book of Records) में दर्ज किया गया है। यह अनघ का लगातार तीसरा विश्व रिकॉर्ड है।



जन्मदिन पर मिली बड़ी सौगात

अनघ का यह रिकॉर्ड उनके सातवें जन्मदिन 29 जून को आधिकारिक रूप से स्वीकृत हुआ। इसके बाद 23 जुलाई को विश्व रिकॉर्ड का प्रमाण-पत्र उनके घर पहुंचा। प्रमाण-पत्र देखते ही पूरा परिवार खुशी से भावुक हो उठा। यह पल सिर्फ एक बच्चे की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे परिवार की मेहनत का नतीजा था।



हेमंत शर्मा, इंदौर। सनातन संस्कृति, वेदों की दिव्यता और भारतीय संस्कारों की महिमा को इंदौर के सात वर्षीय बालक अनघ चित्तौड़ा ने एक बार फिर पूरी दुनिया के सामने स्थापित कर दिया है। छोटी-सी उम्र में जिस आत्मविश्वास, स्पष्ट उच्चारण और अद्भुत स्मरण शक्ति के साथ अनघ ने वेद-मंत्रों का पाठ किया, उसने न केवल सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया, बल्कि ‘वर्ल्ड वाइड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में उनका नाम तीसरी बार दर्ज करा दिया।



महज 7 वर्ष की आयु में अनघ ने 10 मिनट 48 सेकंड में 50 कठिन वेद-मंत्रों और संस्कृत श्लोकों का लगातार और शुद्ध उच्चारण कर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है। उनके सातवें जन्मदिन 29 जून को यह उपलब्धि आधिकारिक रूप से स्वीकृत हुई और 23 जुलाई को जब विश्व रिकॉर्ड का प्रमाण-पत्र उनके घर पहुंचा तो पूरा परिवार खुशी और गर्व से भावुक हो उठा।



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संस्कारों की नींव पर खड़ा हुआ विश्व रिकॉर्ड

यह उपलब्धि केवल एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, वेद परंपरा और पारिवारिक संस्कारों की शक्ति का उदाहरण भी है। जिस उम्र में बच्चे खेल-कूद में व्यस्त रहते हैं, उस उम्र में अनघ ने देववाणी संस्कृत के कठिन मंत्रों को आत्मसात कर विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना ली।



तीन बार विश्व रिकॉर्ड बनाकर रचा इतिहास



यह अनघ चित्तौड़ा का पहला नहीं, बल्कि लगातार तीसरा विश्व रिकॉर्ड है।


पहला विश्व रिकॉर्ड: मात्र 3 वर्ष की आयु में 9 अंकों की 50 जोड़ियों की गणना 5 मिनट 20 सेकंड में कर विश्व रिकॉर्ड बनाया।


दूसरा विश्व रिकॉर्ड: 4 वर्ष की आयु में 3 मिनट 1 सेकंड में 50 आयुर्वेदिक मसालों की पहचान कर नया कीर्तिमान स्थापित किया।


तीसरा विश्व रिकॉर्ड: 7 वर्ष की आयु में 50 वेद-मंत्रों और संस्कृत श्लोकों का रिकॉर्ड समय में उच्चारण कर फिर इतिहास रच दिया।



मां बनी पहली गुरु, परिवार बना सबसे बड़ी ताकत



हर बड़ी सफलता के पीछे वर्षों की तपस्या छिपी होती है। अनघ की इस उपलब्धि के पीछे उनकी माता श्रद्धा चित्तौड़ा की अथक मेहनत, धैर्य और संस्कार हैं। उन्होंने अनघ को महज दो वर्ष की आयु से संस्कृत श्लोक, वेद-मंत्र और भारतीय संस्कृति की शिक्षा देना शुरू कर दिया था। पिता प्रणय चित्तौड़ा का निरंतर सहयोग, दादा-दादी अजय चित्तौड़ा एवं ममता चित्तौड़ा तथा नाना-नानी अशोक मेहता एवं उर्मिला मेहता के आशीर्वाद और प्रोत्साहन ने इस सफलता को नई ऊंचाई तक पहुंचाया।



इंदौर ही नहीं, पूरे देश के लिए गर्व का पल

अनघ चित्तौड़ा की यह उपलब्धि केवल एक परिवार की खुशी नहीं, बल्कि इंदौर, मध्यप्रदेश और पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। यह साबित करता है कि यदि बचपन से बच्चों को संस्कार, संस्कृति और सही मार्गदर्शन मिले तो वे कम उम्र में भी विश्व स्तर पर भारत का नाम रोशन कर सकते हैं।सनातन संस्कृति की यह गूंज अब विश्व रिकॉर्ड के पन्नों में दर्ज हो चुकी है, और अनघ चित्तौड़ा आज हजारों बच्चों के लिए प्रेरणा बनकर उभरे हैं। उनकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ने का संदेश भी देती है।



पहले भी बना चुके हैं दो रिकॉर्ड

अनघ चित्तौड़ा के लिए विश्व रिकॉर्ड बनाना कोई नई बात नहीं है। महज तीन साल की उम्र में उन्होंने 9 अंकों की 50 जोड़ियों की गणना सिर्फ 5 मिनट 20 सेकंड में कर दी थी। उस समय भी उनका नाम विश्व रिकॉर्ड में दर्ज हुआ था। इसके एक साल बाद, चार साल की उम्र में उन्होंने एक और कमाल किया। उन्होंने 50 आयुर्वेदिक मसालों को सिर्फ 3 मिनट 1 सेकंड में पहचान लिया था। अब सात साल की उम्र में वेद-मंत्रों के उच्चारण के साथ यह उनका तीसरा विश्व रिकॉर्ड है।



मां बनीं पहली गुरु

हर बड़ी उपलब्धि के पीछे सालों की मेहनत छिपी होती है। अनघ की मां श्रद्धा चित्तौड़ा ने ही उन्हें सबसे पहले सिखाना शुरू किया था। उन्होंने अनघ को महज दो साल की उम्र से संस्कृत श्लोक और वेद-मंत्र सिखाने शुरू कर दिए थे। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय संस्कृति की भी शिक्षा दी। पिता प्रणय चित्तौड़ा का साथ भी हर कदम पर उन्हें मिला। दादा-दादी अजय चित्तौड़ा और ममता चित्तौड़ा के साथ ही नाना-नानी अशोक मेहता और उर्मिला मेहता का आशीर्वाद भी उनके साथ रहा। पूरे परिवार के सहयोग ने ही इस सफलता को संभव बनाया।



संस्कारों से मिली यह सफलता

यह उपलब्धि सिर्फ एक रिकॉर्ड भर नहीं है। यह भारतीय संस्कृति, वेद परंपरा और पारिवारिक संस्कारों की ताकत भी दिखाती है। जिस उम्र में ज्यादातर बच्चे खेल-कूद में व्यस्त रहते हैं, उस उम्र में अनघ ने संस्कृत के कठिन मंत्र याद किए। छोटी उम्र में ही उन्होंने अनुशासन और लगन की मिसाल पेश की है।



कैसे तैयार हुआ यह रिकॉर्ड

50 वेद-मंत्रों और संस्कृत श्लोकों को याद रखना अपने आप में एक बड़ी चुनौती है। इन्हें शुद्ध उच्चारण के साथ लगातार बोलना और भी मुश्किल होता है। सात साल के बच्चे के लिए यह काम आसान नहीं था। इसके लिए रोज अभ्यास और धैर्य की जरूरत पड़ी। परिवार ने अनघ को हर दिन थोड़ा-थोड़ा अभ्यास कराया। धीरे-धीरे उनकी स्मरण शक्ति और उच्चारण दोनों मजबूत होते गए। यही मेहनत आखिरकार एक नए विश्व रिकॉर्ड में बदल गई।



इंदौर से पूरे देश तक गर्व का पल

अनघ चित्तौड़ा की यह उपलब्धि सिर्फ उनके परिवार के लिए नहीं, बल्कि पूरे इंदौर और मध्यप्रदेश के लिए भी गर्व की बात है। यह दिखाता है कि सही मार्गदर्शन और संस्कार मिलने पर बच्चे कम उम्र में भी बड़े कीर्तिमान बना सकते हैं। आज अनघ हजारों बच्चों के लिए एक प्रेरणा बनकर उभरे हैं। उनकी कहानी आने वाली पीढ़ियों को भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ने का संदेश भी देती है।



बच्चों और अभिभावकों के लिए सीख

अनघ की कहानी हर उस अभिभावक के लिए एक सीख है, जो अपने बच्चों में अच्छे संस्कार डालना चाहते हैं। यह बताती है कि छोटी उम्र से मिला सही मार्गदर्शन बड़ा बदलाव ला सकता है। इसके लिए महंगे संसाधनों की नहीं, बल्कि धैर्य और नियमित अभ्यास की जरूरत होती है। परिवार का साथ भी इसमें उतना ही अहम होता है। अनघ का यह सफर अभी शुरुआत है। आने वाले समय में उनसे और उपलब्धियों की उम्मीद की जा रही है।



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