प्रदूषण से हर छह मिनट में हो रही एक मौत, मध्यप्रदेश के हाल भी बेहाल

Amresh Kushwaha | Jul 31, 2026, 14:31 IST
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वाहन प्रदूषण से हर 6 मिनट में 1 मौत
वाहन प्रदूषण से हर 6 मिनट में 1 मौत

ICCT रिपोर्ट का दावा है कि भारत में वाहन प्रदूषण से हर छह मिनट में एक मौत हो रही है। हर साल 15 हजार बच्चे अस्थमा के शिकार हो रहे हैं। मध्य प्रदेश के शहरों का हाल भी अलग-अलग है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • भारत में वायु प्रदूषण से हर 6 मिनट में 1 मौत हो रही है।
  • यह दावा इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन की रिपोर्ट में किया गया है।
  • हर साल 15 हजार से ज्यादा बच्चे अस्थमा के शिकार हो रहे हैं।
  • एनसीआर में सिर्फ 5% आबादी होने पर भी 23% मामले दर्ज हैं।
  • मध्य प्रदेश में भी प्रदूषण के आंकड़े शहर-दर-शहर अलग-अलग हैं।
वाहनों से निकलने वाला जहरीला धुआं अब बड़ा खतरा बन गया है। यह सिर्फ सड़क का मसला नहीं रहा है। यह अब सेहत से जुड़ा गंभीर संकट बन चुका है। ताजा रिपोर्ट ने इसके डरावने आंकड़े सामने रखे हैं।

हर 6 मिनट में 1 मौत

इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें भारत को लेकर बड़ा दावा किया गया है। रिपोर्ट कहती है कि वाहन प्रदूषण जानलेवा साबित हो रहा है। इससे हर 6 मिनट में एक समयपूर्व मौत हो रही है।

यानी एक दिन में सैकड़ों लोगों की जान जा रही है। यह आंकड़ा सिर्फ बीमारी से नहीं, प्रदूषण से जुड़ी मौतों का है। रिपोर्ट के मुताबिक हालात हर साल गंभीर होते जा रहे हैं।

बच्चों पर सबसे ज्यादा असर

इस प्रदूषण का सबसे बुरा असर बच्चों पर पड़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक हर साल 15 हजार बच्चे अस्थमा के शिकार होते हैं। यानी छोटी उम्र में ही उनके फेफड़े कमजोर पड़ रहे हैं।

बच्चों का शरीर अभी विकसित हो रहा होता है। ऐसे में जहरीली हवा उनके लिए ज्यादा खतरनाक साबित होती है। डॉक्टर लंबे समय से इस चिंता को उठाते रहे हैं।

दिल्ली-एनसीआर में हालात खराब

रिपोर्ट में दिल्ली एनसीआर की स्थिति को खासतौर पर उजागर किया गया है। देश की सिर्फ 5% आबादी ही एनसीआर में रहती है। वहीं, वाहन प्रदूषण के 23% मामले यहीं दर्ज हुए हैं।

दिल्ली में परिवहन से पैदा होने वाले पीएम 2.5 का स्तर भी बहुत ज्यादा है। यह डब्ल्यूएचओ (World Health Organization) की गाइडलाइंस से 2.5 गुना अधिक है। यानी दिल्ली की हवा तय मानकों से कहीं ज्यादा जहरीली हो चुकी है।

ई-वाहन बनेंगे समाधान

रिपोर्ट में सिर्फ समस्या ही नहीं, समाधान की भी बात की गई है। इसके मुताबिक ई-वाहनों की तरफ बदलाव सबसे बड़ा हल हो सकता है। अगर 2045 तक सभी वाहन शून्य-उत्सर्जन वाले हो जाएं, तो बड़ा फर्क पड़ेगा।

इससे 2050 तक करीब 17 लाख समयपूर्व मौतें टाली जा सकती हैं। साथ ही बच्चों में अस्थमा के 97 हजार 200 नए मामले भी रोके जा सकते हैं। यानी ई-वाहन अपनाना सिर्फ पर्यावरण के लिए जरूरी नहीं है। यह सीधे जिंदगी बचाने से भी जुड़ा है।

भारत की वैश्विक स्थिति

वाहन प्रदूषण से जुड़ी मौतों में भारत की तस्वीर भी चिंताजनक है। दुनिया में ऐसी मौतों में भारत की हिस्सेदारी करीब 13% है। हर साल भारत में करीब 90 हजार मौतें सड़क प्रदूषण से होती हैं।

इस मामले में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर है। यह आंकड़ा बताता है कि समस्या सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर की है। इसलिए इस पर तेजी से काम करने की जरूरत है।

मध्य प्रदेश का हाल

राष्ट्रीय आंकड़ों के बीच मध्य प्रदेश की तस्वीर भी अहम है। यहां के शहरों की हवा में पिछले तीन साल में बड़ा उलटफेर देखा गया। कुछ शहरों की हवा साफ हुई, तो कुछ में हालात और बिगड़े हैं।

यह आंकड़े हाल ही में लोकसभा में सामने आए। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने यह जानकारी सदन को दी। ये आंकड़े साल 2023 से 2025 के बीच के हैं।

सतना में बड़ा सुधार

मध्य प्रदेश में सबसे बड़ी राहत सतना से मिली है। साल 2023 में यहां 30 दिन हवा गंभीर श्रेणी में रही थी। इसके बाद 2024 और 2025 में यह आंकड़ा शून्य पर आ गया।

यानी लगातार दो साल सतना में गंभीर प्रदूषण वाला दिन नहीं आया। इसे प्रदेश का सबसे बड़ा सुधार माना जा रहा है। इससे साफ है कि शहर के प्रयासों का असर दिख रहा है।

राजधानी भोपाल में भी हालात कुछ हद तक सुधरे हैं। यहां 2023 में 36 और 2024 में 40 दिन गंभीर प्रदूषण दर्ज हुआ। 2025 में यह घटकर सिर्फ 8 दिन रह गया।

पीथमपुर सबसे प्रदूषित

हर शहर की कहानी अच्छी नहीं रही है। औद्योगिक शहर पीथमपुर में हालात लगातार बिगड़ते गए हैं। यहां 2023 में 19 दिन हवा गंभीर श्रेणी में रही थी।

साल 2024 में यह संख्या 31 दिन हो गई। फिर 2025 में यह आंकड़ा 33 दिन तक पहुंच गया। यानी साल में हर 11वें दिन हवा बेहद खतरनाक रही। सागर में भी हालात बिगड़े और गंभीर दिन आठ से बढ़कर 16 हो गए।

सरकार का एनसीएपी प्लान

सरकार का कहना है कि एक खास योजना असर दिखा रही है। इसका नाम है राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम यानी एनसीएपी। एनसीएपी का पूरा नाम National Clean Air Programme है। इस योजना के तहत देशभर के 130 शहरों को मदद दी गई है। इन शहरों को 16 हजार 423 करोड़ रुपए से ज्यादा जारी हुए हैं।

इसका नतीजा है कि 108 शहरों में पीएम-10 की मात्रा घटी है। पीएम-10 यानी Particulate Matter 10 हवा में मौजूद बारीक कण होते हैं। इनमें से 72 शहरों में यह कमी 20 प्रतिशत से ज्यादा रही। साल 2025-26 में 14 शहर तय वायु गुणवत्ता मानक तक पहुंच गए हैं। साल 2017-18 में ऐसे सिर्फ छह शहर थे।

इन आंकड़ों से साफ है कि कोशिशें हो रही हैं। लेकिन खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। वाहन प्रदूषण से मौतें रोकने के लिए ई-वाहनों की तरफ तेज बदलाव जरूरी है। साथ ही शहरों को अपने स्तर पर भी ठोस कदम उठाने होंगे।

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