उपभोक्ताओं पर दोहरी मार: मध्यप्रदेश में बिजली हुई महंगी, 8 घंटे होगी कटौती
Amresh Kushwaha | Jul 29, 2026, 08:45 IST
मध्यप्रदेश में बिजली महंगी
मध्य प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं पर दोहरी मार पड़ी है। एफसीपीपीए सरचार्ज बढ़ने से बिल महंगा हुआ है। साथ ही, पनबिजली उत्पादन 74% घटने से गांवों में 8 घंटे कटौती शुरू हो गई है। कम बारिश से बांधों में पानी घटा, जिससे संकट गहराया है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश में बिजली अचानक महंगी हो गई है।
- गांवों में अब रोजाना 8 घंटे बिजली कटौती हो रही है।
- पनबिजली उत्पादन में 74 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है।
- बिजली कंपनियों ने एफसीपीपीए सरचार्ज बढ़ाकर बिल महंगा कर दिया है।
- कम बारिश से बांधों में पानी घटा, जिससे संकट बढ़ा है।
बिजली हुई महंगी, गांवों में बत्ती गुल
गांवों में 8 घंटे कटौती
बिल में कितनी बढ़ोतरी
इसका असर प्रदेश के करीब दो करोड़ उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। भोपाल में करीब 1.25 लाख घरेलू उपभोक्ता भी प्रभावित होंगे। जिन घरों में 200 से 300 यूनिट बिजली खर्च होती है, उनका बिल बढ़ेगा। बिल में 35 से 87 रुपए तक अतिरिक्त राशि जुड़ सकती है। यानी 200 से 500 यूनिट खर्च करने वाले परिवारों का बिल सीधे बढ़ जाएगा।
aefd2119-81a
पनबिजली उत्पादन में गिरावट
बरगी, बाणसागर, इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर जैसे प्रोजेक्ट में भी उत्पादन घटा है। बाणसागर में पिछले साल 67.1 यूनिट बिजली बनी थी। इस साल यह घटकर 34.7 यूनिट रह गई। बरगी में यह 90.4 से घटकर 17.7 यूनिट रह गया। इंदिरा सागर में उत्पादन 257 यूनिट से घटकर 33.7 यूनिट रह गया। ओंकारेश्वर में भी 125 यूनिट से घटकर 20.3 यूनिट रह गया। अन्य छोटी परियोजनाओं में उत्पादन 25.5 से घटकर 20.9 यूनिट रह गया।
5d155343-4d6
बढ़ती मांग, घटता उत्पादन
बिजली की सप्लाई भी बढ़ी है। यह 21.45 करोड़ यूनिट से बढ़कर 28.72 करोड़ यूनिट हो गई है। लेकिन उत्पादन उस रफ्तार से नहीं बढ़ पाया। इसी वजह से बिजली कंपनियों पर दबाव बढ़ गया है। कंपनियों को बाहर से महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है।
d2b5411a-6a2
कम बारिश का असर
ba4409a3-e58
एक्सपर्ट का क्या कहना है
उन्होंने बताया कि इसका असर पावर जनरेशन पर पड़ना स्वाभाविक है। इसलिए लोड मैनेजमेंट करना पड़ रहा है। आने वाले रबी सीजन को देखते हुए मशीनों का मेंटेनेंस भी जरूरी है। इसलिए बिजली उत्पादन और आपूर्ति व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
पिछले साल से इस बार पानी की कमी ज्यादा गंभीर है। बांधों में पानी कम होने से उत्पादन पर लगातार दबाव बना हुआ है। इस वजह से कंपनियों को दूसरे स्रोतों से बिजली जुटानी पड़ रही है। इससे कंपनियों की लागत भी बढ़ रही है। अंततः यह लागत उपभोक्ताओं के बिल में जुड़ जाती है। ग्रामीण इलाकों में किसान सबसे ज्यादा परेशान हैं। सिंचाई का समय निकल जाने से फसल पर भी असर पड़ सकता है। शहरी उपभोक्ताओं को भी बढ़े हुए बिल का सामना करना पड़ेगा। आने वाले महीनों में मानसून की स्थिति ही तय करेगी कि हालात कब सुधरेंगे।
मध्य प्रदेश में बिजली संकट की वजह कम बारिश और बढ़ती मांग है। सरचार्ज बढ़ने से आम लोगों की जेब पर सीधा बोझ पड़ा है। आने वाले दिनों में स्थिति सुधरने की उम्मीद अच्छी बारिश पर टिकी है। तब तक उपभोक्ताओं को महंगी बिजली और कटौती दोनों झेलनी पड़ सकती हैं। सरकार और बिजली कंपनियों को जल्द समाधान निकालने की जरूरत है।
यह खबर क्यों जरूरी है
ये खबरें भी पढ़िए...
एमपी की बिजली कंपनियों के 6500 संविदा कर्मी होंगे नियमित, परीक्षा से खुलेगा रास्ता
भोपाल के बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत: अब नहीं आएंगे मनमाने और भारी-भरकम बिल
MP News: प्रमोशन पर नया घमासान! बिजली कंपनियों में क्यों अटकी इंजीनियरों की तरक्की?
बिजली कंपनी का दोहरा रवैया, सरकार पर 2123 करोड़ के बिल बकाया, आम आदमी की कट रही लाइट
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
By Neel Tiwari
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava