बिजली कंपनी का दोहरा रवैया, सरकार पर 2123 करोड़ के बिल बकाया, आम आदमी की कट रही लाइट
Ramanand Tiwari | Jul 23, 2026, 21:24 IST
Photograph: (the sootr)
बिजली बिल भरने में देरी हो तो आम उपभोक्ता का कनेक्शन कट जाता है। लेकिन मध्यप्रदेश में सरकारी विभाग खुद सबसे बड़े बकायादार बन गए हैं। यहां सरकारी दफ्तरों पर बिजली कंपनियों का ₹2,123.9 करोड़ बकाया है।
अगर आम उपभोक्ता एक-दो महीने बिजली बिल जमा नहीं करे तो उसका कनेक्शन काट दिया जाता है। लेकिन मध्यप्रदेश में तस्वीर इससे बिल्कुल अलग है। यहां सरकारी विभागों पर ही बिजली कंपनियों का ₹2,123.9 करोड़ बकाया है और इसकी वसूली वर्षों से अटकी हुई है।
बिजली वितरण कंपनियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती आम उपभोक्ता नहीं, बल्कि सरकारी विभाग बन गए हैं। यही वजह है कि वित्तीय दबाव लगातार बढ़ रहा है और कंपनियों को अतिरिक्त संसाधनों का इंतजाम करना पड़ रहा है।
करीब 2.98 लाख सरकारी बिजली कनेक्शनों पर बकाया राशि दर्ज है। यदि यह रकम समय पर वसूल हो जाए तो बिजली वितरण कंपनियों की आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार हो सकता है। दूसरी ओर, आम उपभोक्ताओं का कहना है कि उनके छोटे बकाये पर तत्काल कार्रवाई होती है, जबकि सरकारी विभागों के बड़े बकाये वर्षों तक बने रहते हैं।
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अजय सिंह कुशवाह, अधिवक्ता (ग्वालियर)-अजय सिंह कुशवाहा का कहना है कि उनके एक परिचित के मकान पर कथित रूप से फर्जी बिजली कनेक्शन चल रहा है। शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। उनका सवाल है कि यदि बाद में बिल विवाद खड़ा होता है तो जिम्मेदारी किसकी होगी? उनके मुताबिक, ऐसी कार्यप्रणाली से उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ती है और विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठते हैं।
नितिन शर्मा, इंजीनियर (इंदौर)-नितिन शर्मा का कहना है कि सामान्य उपभोक्ता का छोटा-सा बिजली बिल बकाया होने पर विभाग तत्काल कार्रवाई करता है, लेकिन सरकारी विभागों के बड़े बकाये पर उसी तरह की सख्ती दिखाई नहीं देती। उनका सवाल है कि वसूली की प्रक्रिया में यह अंतर क्यों है?
अनिंदो मुखर्जी, निवासी (जबलपुर)-अनिंदो मुखर्जी का कहना है कि प्रदेश में बिजली व्यवस्था पहले से बेहतर हुई है, लेकिन बकाया वसूली को लेकर दोहरे मापदंड दिखाई देते हैं। उनके अनुसार, निजी उपभोक्ताओं पर सख्ती होती है, जबकि सरकारी विभागों के मामलों में अपेक्षित गति नहीं दिखती। उनका मानना है कि जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
अनूप शर्मा, निवासी भोपाल-भोपाल निवासी अनूप शर्मा का कहना है कि बिजली वितरण कंपनी को सभी उपभोक्ताओं के साथ समान व्यवहार करना चाहिए। उनके अनुसार, यदि नियम आम लोगों पर सख्ती से लागू होते हैं तो प्रभावशाली और सरकारी संस्थानों के मामलों में भी वही पारदर्शिता और निष्पक्षता दिखनी चाहिए। इससे विभाग की विश्वसनीयता और जनता का भरोसा मजबूत होगा।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यदि सरकारी विभाग समय पर बिजली बिल जमा करें तो वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी। इससे उत्पादन कंपनियों और अन्य एजेंसियों को समय पर भुगतान करना भी आसान हो जाएगा।
ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई के मुताबिक, सभी संबंधित विभागों को लंबित बिजली बिल जल्द चुकाने के निर्देश दिए गए हैं। उनका कहना है कि सबसे अधिक बकाया पेयजल आपूर्ति से जुड़े कनेक्शनों का है और इसकी वसूली व भुगतान की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रही है।
यह मामला सिर्फ ₹2,123 करोड़ की वसूली का नहीं है। असली सवाल यह है कि जब आम उपभोक्ता पर नियम तत्काल लागू होते हैं, तो सरकारी विभागों के बकाये की वसूली के लिए वही सख्ती कब दिखाई जाएगी? यही सवाल बिजली कंपनियों की आर्थिक सेहत और व्यवस्था की पारदर्शिता, दोनों पर खड़ा होता है।
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बिजली वितरण कंपनियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती आम उपभोक्ता नहीं, बल्कि सरकारी विभाग बन गए हैं। यही वजह है कि वित्तीय दबाव लगातार बढ़ रहा है और कंपनियों को अतिरिक्त संसाधनों का इंतजाम करना पड़ रहा है।
कहानी सिर्फ बकाया की नहीं, सिस्टम के दोहरे रवैये की भी
सबसे ज्यादा बकाया किन विभागों पर?-
| विभाग | कनेक्शन | बकाया |
|---|---|---|
| पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग | 86,593 | ₹1,230.7 करोड़ |
| नगरीय विकास एवं आवास विभाग | 41,424 | ₹265.1 करोड़ |
| नर्मदा घाटी विकास विभाग | 664 | ₹178.5 करोड़ |
| महिला एवं बाल विकास विभाग | 42,887 | ₹88.8 करोड़ |
| स्कूल शिक्षा विभाग | 57,652 | ₹84.8 करोड़ |
| लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग | 8,026 | ₹43.3 करोड़ |
इन विभागों पर भी बकाया दर्ज है:
- जनजातीय कार्य विभाग
- जल संसाधन विभाग
- लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग
किस बिजली कंपनी पर कितना वसूली का दबाव?-
- पूर्व क्षेत्र – करीब ₹687.1 करोड़
- पश्चिम क्षेत्र – करीब ₹616.4 करोड़
- मध्य क्षेत्र – करीब ₹820.4 करोड़
आम उपभोक्ता क्या कह रहे हैं?-
नितिन शर्मा, इंजीनियर (इंदौर)-नितिन शर्मा का कहना है कि सामान्य उपभोक्ता का छोटा-सा बिजली बिल बकाया होने पर विभाग तत्काल कार्रवाई करता है, लेकिन सरकारी विभागों के बड़े बकाये पर उसी तरह की सख्ती दिखाई नहीं देती। उनका सवाल है कि वसूली की प्रक्रिया में यह अंतर क्यों है?
अनिंदो मुखर्जी, निवासी (जबलपुर)-अनिंदो मुखर्जी का कहना है कि प्रदेश में बिजली व्यवस्था पहले से बेहतर हुई है, लेकिन बकाया वसूली को लेकर दोहरे मापदंड दिखाई देते हैं। उनके अनुसार, निजी उपभोक्ताओं पर सख्ती होती है, जबकि सरकारी विभागों के मामलों में अपेक्षित गति नहीं दिखती। उनका मानना है कि जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
अनूप शर्मा, निवासी भोपाल-भोपाल निवासी अनूप शर्मा का कहना है कि बिजली वितरण कंपनी को सभी उपभोक्ताओं के साथ समान व्यवहार करना चाहिए। उनके अनुसार, यदि नियम आम लोगों पर सख्ती से लागू होते हैं तो प्रभावशाली और सरकारी संस्थानों के मामलों में भी वही पारदर्शिता और निष्पक्षता दिखनी चाहिए। इससे विभाग की विश्वसनीयता और जनता का भरोसा मजबूत होगा।
ऊर्जा विशेषज्ञ क्या मानते हैं?
ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई के मुताबिक, सभी संबंधित विभागों को लंबित बिजली बिल जल्द चुकाने के निर्देश दिए गए हैं। उनका कहना है कि सबसे अधिक बकाया पेयजल आपूर्ति से जुड़े कनेक्शनों का है और इसकी वसूली व भुगतान की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रही है।
क्या है बड़ा सवाल?
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