यौन उत्पीड़न के आरोपों से​ घिरे आनंदपुर ट्रस्ट पर अब 30 से अधिक गांवों की जमीन कब्जाने के आरोप

Aman Vaishnav | Jan 23, 2026, 09:00 IST
anandpur trust alleged land encroachment farmers allegations
अशोकनगर जिले के आनंदपुर ट्रस्ट पर किसानों और ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। ट्रस्ट पर 30 से ज्यादा गांवों की जमीन पर कब्जा करने का आरोप है। इसमें आदिवासी और अनुसूचित जाति के किसानों की पैतृक भूमि भी शामिल है।

News In Short

  • आनंदपुर ट्रस्ट पर 30 से अधिक गांवों की जमीन कब्जाने का आरोप है।
  • किसानों का दावा है कि श्मशान और चरनोई भूमि भी ट्रस्ट के कब्जे में है।
  • राजस्व विभाग के मुताबिक, ट्रस्ट के पास 9 हजार बीघा से ज्यादा जमीन है।
  • श्मशान की जमीन को राजस्व विभाग ने कुछ महीने पहले मुक्त कराया था।
  • प्रशासनिक अफसर भी ट्रस्ट के कब्जे में आई अपनी जमीन को लेकर परेशान हैं।

News In Detail

यौन उत्पीड़न के बाद ट्रस्ट पर जमीन कब्जाने का आरोप

अशोकनगर के आनंदपुर ट्रस्ट पर यौन उत्पीड़न और देह व्यापार के आरोपों के बाद अब जमीन कब्जाने का भी आरोप लग रहा है। एक प्रतिष्ठित अखबार में छपी खबर के मुताबिक, स्थानीय किसानों और गांववालों का कहना है कि ट्रस्ट ने 30 से ज्यादा गांवों की जमीन पर कब्जा कर लिया है।



इसमें आदिवासी और अनुसूचित जाति वर्ग के किसानों की अपनी पैतृक जमीन भी शामिल है। साथ ही श्मशान, तालाब और चरनोई की ज़मीन भी ट्रस्ट की दीवारों में आ गई है।



ट्रस्ट का दावा, जमीन पूरी तरह वैध है

वहीं, आनंदपुर ट्रस्ट के महात्मा शब्द सागरानंद (कुलदीप महात्मा) ने कहा है कि ट्रस्ट ने किसी भी जमीन पर अवैध कब्जा नहीं किया है। उनका दावा है कि ट्रस्ट की कुल 9 हजार बीघा जमीन है। इसका पूरा रिकॉर्ड राजस्व विभाग के पास मौजूद है और वर्षों से यहां खेती हो रही है।



ट्रस्ट की जमीन का बढ़ा रकबा

राजस्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, दो साल पहले लगान गणना के दौरान ट्रस्ट के नाम 2 हजार हेक्टेयर (लगभग 9 हजार 500 बीघा) जमीन दर्ज की गई थी। हाल ही में प्राप्त आंकड़ों में यह रकबा बढ़कर 2 हजार 53 हेक्टेयर (लगभग 9 हजार 750 बीघा) हो गया है।



बाउंड्रीवॉल के भीतर बना ली अपनी दुनिया

खबर के अनुसार, किसानों का कहना है कि ट्रस्ट ने गांवों की सामूहिक जमीन और निजी कृषि भूमि को भी अपनी बाउंड्रीवॉल के भीतर कर लिया है, जिससे आंकड़ा 14,000 बीघा से ज्यादा हो गया है।



कुछ जमीनों को लेकर पहले भी शिकायतें हो चुकी हैं। कुछ महीने पहले शांतपुर गांव में श्मशान की जमीन को राजस्व विभाग ने मुक्त कराया था, क्योंकि वह भी ट्रस्ट की दीवार के भीतर थी।



अपनी ही जमीन पर मजदूरी करने को मजबूर किसान

किसानों का आरोप है कि ट्रस्ट ने उनकी निजी कृषि भूमि और सामूहिक गांवों की जमीन पर कब्जा कर लिया है। इससे वे अपनी ही जमीन पर मजदूरी करने के लिए मजबूर हो गए हैं।



  • जमडेरा गांव के प्रेमसिंह आदिवासी ने कहा कि उनकी 18 बीघा पैतृक जमीन में से 5 बीघा पर ट्रस्ट ने कब्जा कर लिया है।
  • दिनेश गुर्जर बताते हैं कि उनकी मां के नाम 24 बीघा जमीन है। इस पर दो साल पहले बाउंड्रीवॉल बनवा दी गई थी। इसके बाद वहां जेसीबी से गड्ढे भी खुदवाए गए थे।
  • ईसागढ़ के स्कूल संचालक अशोक अहिरवार ने बताया कि बहेरिया ईसागढ़ में उनके पास 2 बीघा 5 डिस्मिल पैतृक जमीन है, जिसमें से एक बीघा से ज्यादा जमीन ट्रस्ट के कब्जे में है। वे पिछले 40 साल से इस जमीन को लेकर लड़ाई लड़ रहे हैं। कई बार सीमांकन भी हुआ, लेकिन ट्रस्ट के लोग महात्मा और गुर्गों के साथ बाउंसर लेकर आते हैं। उनके भाई प्रशासनिक अफसर हैं और ये जमीन उनके नाम पर भी है। वे भी कई बार आवेदन दे चुके हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
  • परमार सिंह आदिवासी का कहना है कि 1984 में शासन से मिली 18 बीघा जमीन पर उनका परिवार खेती करता था। एक साल पहले ट्रस्ट के लोगों ने उस जमीन को अपनी बता कर उस पर कब्जा कर लिया।

आश्रम परिसर में सरकारी सुविधाएं

आनंदपुर आश्रम में कई सरकारी सुविधाएं हैं, जैसे पंचायत भवन, पोस्ट ऑफिस, अस्पताल, एंबुलेंस, बस स्टैंड, और जेसीबी जैसी मशीनें। यहां 300 बाउंसर भी सुरक्षा के लिए तैनात हैं। इस आश्रम में एक समय में 1 हजार से ज्यादा लोग रहते हैं।



ये खबरें भी पढ़िए...



अशोकनगर न्यूज: धाम में यौन उत्पीड़न के आरोपों पर क्या बोला आनंदपुर धाम ट्रस्ट?



Tags:
  • अनुसूचित जाति
  • राजस्व विभाग
  • बस स्टैंड
  • आदिवासी
  • अशोकनगर
  • अस्पताल
  • पंचायत भवन
  • अशोकनगर न्यूज
  • एंबुलेंस
  • आनंदपुर धाम ट्रस्ट
  • आनंदपुर धाम अशोकनगर