अंजड़ में पेयजल योजना घोटाला: अधूरे काम के बावजूद 10 करोड़ का भुगतान, EOW इंदौर ने दर्ज की FIR

Pawan Modiya | Apr 09, 2026, 17:17 IST
Photograph: (the sootr)
बड़वानी जिले के अंजड़ में पेयजल योजना घोटाला सामने आया। अधूरे काम के बावजूद 10 करोड़ से अधिक भुगतान पर EOW ने FIR दर्ज की। कई अधिकारी और ठेकेदार जांच के घेरे में।

मध्यप्रदेश के बड़वानी जिले के अंजड़ नगर परिषद में संचालित पेयजल योजना में करोड़ों के घोटाले का मामला सामने आया है। इस मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) इंदौर ने कई अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और ठेकेदारों के खिलाफ FIR दर्ज की है।



प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि अधूरा काम होने के बावजूद ठेकेदार को लगभग 10 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान कर दिया गया, जिससे शासन को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। इस मामले ने एक बार फिर सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।



क्या है पूरा मामला?

वर्ष 2016 में अंजड़ नगर परिषद में पेयजल योजना के तहत घर-घर नल कनेक्शन देने के लिए सरकार ने 12 करोड़ 20 लाख 8 हजार 500 रुपए की राशि मंजूर की थी। इस योजना का उद्देश्य नगर परिषद के लगभग 2700 घरों तक नियमित पेयजल उपलब्ध कराना था, ताकि लोगों को पानी की समस्या से राहत मिल सके।



योजना के क्रियान्वयन के लिए ई-टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से सोरठिया वेलजी रत्ना एंड कंपनी को ठेका दिया गया। लेकिन जांच में सामने आया कि योजना का काम पूरी तरह पूरा नहीं हुआ, इसके बावजूद ठेकेदार को भारी राशि का भुगतान कर दिया गया।



टेंडर की शर्तें क्या थीं?

  • योजना के तहत 2700 घरों में नल कनेक्शन देना था
  • ठेकेदार को 18 महीने में काम पूरा करना था
  • यदि काम तय समय में पूरा नहीं होता, तो बिल की राशि से 10 प्रतिशत कटौती की जानी थी

लेकिन जांच में सामने आया कि इन शर्तों का पालन नहीं किया गया।



अधूरा काम, फिर भी पूरा भुगतान

जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पेयजल योजना का काम पूरी तरह पूरा नहीं हुआ। ठेकेदार ने कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत नहीं किया। इसके बावजूद नगर परिषद के अधिकारियों ने 10 करोड़ 20 लाख 46 हजार 254 रुपए का भुगतान कर दिया। इससे यह स्पष्ट हुआ कि भुगतान प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं।



दस्तावेजों में भी मिली गड़बड़ी

EOW की जांच में कई दस्तावेजों में भी गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं। जांच में पाया गया कि माप पुस्तिका (Measurement Book) में कार्य का सही विवरण दर्ज नहीं था। कई जगह संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार के हस्ताक्षर नहीं थे। कैशबुक में गलत प्रविष्टियां दर्ज की गईं।इन अनियमितताओं से यह संकेत मिलता है कि योजना के क्रियान्वयन में जानबूझकर नियमों की अनदेखी की गई।



इन अधिकारियों और ठेकेदारों पर दर्ज हुआ मामला

EOW ने इस मामले में कई लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।



आरोपियों में शामिल हैं:

  • तत्कालीन अध्यक्ष मंजुला राकेश पाटीदार
  • पुष्पा परमार
  • तत्कालीन CMO सुरेंद्र सिंह परमार
  • अमरदास सेनानी
  • मायाराम सोलंकी
  • तत्कालीन इंजीनियर दिनेश पटेल
  • लेखापाल हुकुमचंद मालवीय
  • कंपनी संचालक परेश सोरठिया
  • ठेकेदार मिनेश मकवाना

इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने मिलकर सरकारी नियमों का उल्लंघन किया और अधूरे काम के बावजूद भुगतान कर दिया।



किन धाराओं में दर्ज हुई FIR

आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने आरोपियों के खिलाफ कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है।



IPC की धाराएं

  • धारा 420 – धोखाधड़ी
  • धारा 467 – जालसाजी
  • धारा 468 – फर्जी दस्तावेज बनाना
  • धारा 471 – फर्जी दस्तावेज का उपयोग
  • धारा 409 – सरकारी धन का दुरुपयोग
  • धारा 120B – आपराधिक साजिश

इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में भी केस दर्ज किया गया है।



जांच में क्या होगा आगे?

EOW अब इस मामले में विस्तृत जांच कर रही है।



जांच के दौरान निम्न बिंदुओं की पड़ताल की जा रही है:



  • वास्तव में कितना काम हुआ
  • भुगतान की प्रक्रिया कैसे हुई
  • क्या अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच मिलीभगत थी
  • शासन को कितना आर्थिक नुकसान हुआ

यदि जांच में आरोप साबित होते हैं, तो आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो सकती है।



सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता की जरूरत

यह मामला सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को उजागर करता है। यदि समय रहते निगरानी और ऑडिट की मजबूत व्यवस्था हो, तो इस तरह के घोटालों को रोका जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मॉनिटरिंग, सोशल ऑडिट और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करना जरूरी है।



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