लंबे इंतजार के बाद अपेक्स बैंक को अध्यक्ष, अंदरूनी खींचतान के बीच महेंद्र यादव पर मुहर
News in Short
- महेंद्र यादव का नाम पहले से सूची में शामिल था।
- बीच में संगठन स्तर पर खींचतान बढ़ी।
- कुछ समय के लिए उनकी दावेदारी कमजोर पड़ी।
- मोहन यादव और सिंधिया फैक्टर निर्णायक रहा।
- लंबे इंतजार के बाद बैंक को स्थायी नेतृत्व मिला।
News in Detail
मध्यप्रदेश के अपेक्स बैंक को एक दशक से ज्यादा समय बाद नया अध्यक्ष मिला है। किसान नेता महेंद्र सिंह यादव को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। खास बात यह है कि उनका नाम पहले से चर्चा में था, लेकिन बीच में संगठन की राजनीति के चलते मामला अटक गया। आखिरकार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और ज्योतिरादित्य सिंधिया की सहमति के बाद तस्वीर साफ हुई और नियुक्ति पर मुहर लग गई।
पहले तय, फिर अटका नाम
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा संगठन ने महेंद्र सिंह यादव का नाम काफी पहले ही तय कर लिया था। वे खुद भी आश्वस्त थे कि उन्हें जिम्मेदारी मिलेगी। लेकिन जैसे-जैसे निगम-मंडलों की नियुक्तियों पर राजनीतिक दांव-पेंच शुरू हुए, माहौल बदलने लगा। कई नाम सामने आए और समीकरण उलझ गए। इससे उनका उत्साह भी ठंडा पड़ गया।
यहां बदला पूरा खेल
बताया जा रहा है कि सीएम मोहन यादव के करीबी होने का फायदा महेंद्र यादव को मिला। साथ ही अशोकनगर चुनाव में प्रभारी रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया की सहमति भी उनके पक्ष में गई। यानी संगठन और सरकार दोनों स्तर पर सहमति बनने के बाद ही उनकी नियुक्ति संभव हो सकी।
लंबे समय तक खाली क्यों रही कुर्सी?
अपेक्स बैंक की शीर्ष कुर्सी वर्षों तक खाली रही। 13 मई 2015 को कोर्ट के आदेश से संचालक मंडल भंग हुआ। इसके बाद बैंक प्रशासक के जरिए संचालित होता रहा। कई बार चुनाव घोषित हुए, लेकिन हर बार टल गए। इस वजह से बैंक लंबे समय तक स्थायी नेतृत्व से वंचित रहा।
कांग्रेस से भाजपा तक का सफर
एक समय इस बैंक पर कांग्रेस नेताओं का प्रभाव रहा। 2009 से 2015 तक भंवर सिंह शेखावत अध्यक्ष रहे। उनका कार्यकाल खत्म होने के बाद भी नए चुनाव नहीं हुए और बाद में कोर्ट के आदेश से पूरी कार्यकारिणी भंग कर दी गई।अब भाजपा सरकार में यह एक अहम नियुक्ति मानी जा रही है।
संगठन का मैसेज क्या है?
यह नियुक्ति सिर्फ एक पद भरने भर की नहीं है। यह संकेत है कि सरकार और संगठन के बीच तालमेल बन चुका है लंबित नियुक्तियों की प्रक्रिया अब तेज हो सकती है।
अंतिम फैसले अब शीर्ष स्तर की सहमति से ही होंगे
महेंद्र सिंह यादव की नियुक्ति एक लंबे इंतजार का अंत है। यह साफ हो गया कि सिर्फ नाम तय होना काफी नहीं। संगठन की राजनीति और शीर्ष नेतृत्व की सहमति ही अंतिम निर्णय करती है। अब यह देखा जाएगा कि यह फैसला अपेक्स बैंक को स्थिरता देता है या सियासी समीकरण बदलते रहेंगे।
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