25 करोड़ का मुनाफा, फिर भी 24 करोड़ का कर्ज: नीलाम होगी पूर्व मंत्री अरुण यादव की मिल
समझें क्या है पूरा मामला...
- पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव की जवाहर कॉटन मिल नीलाम होगी।
- मिल पर NCDC का 24 करोड़ बकाया है।
- 23 सितंबर 2026 को ई-नीलामी होने वाली है।
- रिजर्व प्राइस 8.08 करोड़ रुपए तय की गई है।
- मिल दिसंबर 2023 से बंद पड़ी है।
क्यों बिकेगी यह मिल
पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव की 40 साल पुरानी कॉटन मिल नीलाम होने जा रही है। यह मिल जवाहरलाल नेहरू सहकारी एग्रीकल्चर प्रोड्यूस प्रोसेसिंग सोसायटी लिमिटेड, खरगोन के नाम से चलती है।
इस मिल पर NCDC (National Cooperative Development Corporation) का भारी कर्ज हो गया है। ब्याज सहित यह बकाया 24 करोड़ 16 लाख रुपए तक पहुंच गया है। यही वजह है कि अब मिल की जमीन और मशीनरी नीलाम करने की तैयारी हो चुकी है।
कितना है बकाया
सूत्रों के मुताबिक सिर्फ NCDC ही नहीं, बल्कि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और नाबार्ड का भी बकाया इस सोसायटी पर है। छह मई 2025 को NCDC ने 20 करोड़ 97 लाख 91 हजार 380 रुपए की मांग निकाली थी। इसके बाद 25 अगस्त 2025 को NCDC ने मिल पर कब्जा ले लिया था। बाद में 16 जुलाई 2026 तक यह रकम बढ़कर 24 करोड़ 16 लाख 39 हजार 17 रुपए हो गई थी। इसमें ब्याज की राशि भी शामिल है। बकाया वसूलने के लिए अब जमीन नीलाम करने का फैसला लिया गया है।
नीलामी की पूरी जानकारी
NCDC ने नीलामी की तारीख 23 सितंबर 2026 तय की है। यह प्रक्रिया ई-नीलामी के जरिए पूरी होगी। नीलामी के लिए रिजर्व प्राइस 8.08 करोड़ रुपए रखी गई है। मिल की जमीन दो हिस्सों में बेची जाएगी। रिपोर्ट में जमीन का रकबा अलग-अलग जगह अलग बताया गया है।
कहीं इसे 19.78 एकड़ लिखा गया है, तो कहीं 19.25 एकड़ बताया गया है। दोनों आंकड़ों में यह छोटा अंतर सामने आया है। NCDC की क्षेत्रीय निदेशक इज्जत कौर ने नीलामी की औपचारिक सूचना जारी कर दी है।
नीलामी दो हिस्सों में
NCDC ने सोसायटी की संपत्ति को दो भागों में बांटकर नीलाम करने की योजना बनाई है। पहले हिस्से का रिजर्व मूल्य करीब 4.25 करोड़ रुपए रखा गया है। दूसरे हिस्से का रिजर्व मूल्य करीब 3.83 करोड़ रुपए है। इन दोनों हिस्सों में जमीन के साथ बिल्डिंग और मशीनरी भी शामिल है। इस तरह पूरी संपत्ति को बेचकर बकाया वसूलने की कोशिश की जा रही है।
मुनाफे से घाटे तक का सफर
सबसे दिलचस्प बात यह है कि यही मिल वित्तीय वर्ष 2023-24 में मुनाफे में थी। उस साल मिल ने 25 करोड़ 56 लाख रुपए का लाभ कमाया था। इसके कुछ समय बाद सोसायटी में चुनाव हुए और अरुण यादव चेयरमैन बन गए। प्रबंध निदेशक का जिम्मा दीपक कही ने संभाला। इसके बाद मिल की स्थिति लगातार बिगड़ती गई और यह घाटे में चली गई। दिसंबर 2023 में आखिरकार मिल को पूरी तरह बंद कर दिया गया। इसी सोसायटी से जुड़ी एक शुगर मिल भी बंद हो चुकी है।
सोसायटी का पुराना इतिहास
जवाहरलाल नेहरू सहकारी एग्रीकल्चर प्रोड्यूज प्रोसेसिंग सोसायटी लंबे समय तक 100% कॉटन बनाती रही। इसी से जुड़ी शुगर मिल सफेद शक्कर बनाया करती थी। इस सोसायटी के पहले अध्यक्ष सुभाष यादव थे। वे सहकारिता क्षेत्र के जाने माने नेता माने जाते थे। उनके बाद उनकी पत्नी सोसायटी की चेयरपर्सन बनीं।
वर्तमान में अरुण यादव इस सोसायटी के चेयरमैन हैं। डिप्टी चेयरमैन के तौर पर खरगोन के भूपेंद्र भरत यादव और मोरगांव की संगीता सिलदार पटेल भी शामिल रहीं। सोसायटी में इनके अलावा नौ और डायरेक्टर भी हैं।
अरुण यादव से संपर्क नहीं हो पाया
इस पूरे मामले पर अरुण यादव का पक्ष जानने की कोशिश की गई। लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया। वहीं प्रबंध निदेशक दीपक कही से जब इस बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने साफ जवाब दिया। उनका कहना है कि NCDC ने अपनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसकी जानकारी वेबसाइट पर भी डाल दी गई है। अब आगे की कार्यवाही सोसायटी करेगी। उन्होंने यह भी माना कि यूनिट पिछले करीब एक साल से बंद है।
अब आगे क्या होगा
23 सितंबर 2026 को होने वाली ई-नीलामी पर सबकी नजर टिकी है। अगर नीलामी तय समय पर होती है, तो सोसायटी की जमीन, बिल्डिंग और मशीनरी बिक जाएगी। इससे मिली रकम से NCDC अपना बकाया वसूल सकेगा। हालांकि यूनियन बैंक और नाबार्ड के बकाए का आगे क्या होगा, यह अभी साफ नहीं है। सहकारिता क्षेत्र से जुड़े लोग इस मामले को गंभीरता से देख रहे हैं। एक समय मुनाफे में चलने वाली मिल का इस तरह नीलाम होना कई सवाल भी खड़े करता है।
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