भोपाल के बड़े तलाब क्षेत्र पर विधायक, अफसर और करोबारी का कब्जा, निगम रिपोर्ट ने खोली पोल

Amresh Kushwaha | Jul 30, 2026, 10:01 IST
बड़े तलाब क्षेत्र पर विधायक, अफसर और करोबारी का कब्जा
भोपाल के बड़े तालाब से अतिक्रमण हटाने के मामले में नगर निगम ने पहली बार कब्जेधारियों के नाम बताए हैं। इनमें विधायक, पूर्व आईपीएस अफसर और कारोबारी शामिल हैं। 303 अतिक्रमण चिन्हित हुए थे, इनमें से सिर्फ 57 हटाए जा सके हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • भोपाल के बड़े तालाब में अतिक्रमण का बड़ा खुलासा हुआ है।
  • नगर निगम ने पहली बार कब्जेधारियों के नाम सार्वजनिक किए हैं।
  • इनमें विधायक, पूर्व आईपीएस अफसर और कारोबारी शामिल हैं।
  • 303 अतिक्रमण चिन्हित हुए, अब तक सिर्फ 57 हटे हैं।
  • एनजीटी की सख्ती के बीच निगम ने स्टेटस रिपोर्ट पेश की है।

भोपाल के बड़े तालाब से जुड़े अतिक्रमण मामले में बड़ी जानकारी सामने आई है। नगर निगम ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) को सौंपी रिपोर्ट में पहली बार कब्जेधारियों के नाम बताए हैं। यह खुलासा फुल टैंक लेवल (एफटीएल) और बफर जोन से जुड़े मामलों में हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक अभी तक कई बड़े नामों पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। इनमें जनप्रतिनिधि, अधिकारी और कारोबारी तक शामिल हैं। यह मामला काफी समय से एनजीटी में लंबित है।



15 मामलों में हाई कोर्ट की रोक

निगम ने ट्रिब्यूनल को बताया कि 15 मामलों में हाई कोर्ट ने कार्रवाई पर रोक लगा रखी है। इस वजह से इन मामलों में निगम फिलहाल कुछ नहीं कर सकता। इनमें अनवर हसन खान का कोहेफिजा स्थित मैरिज गार्डन शामिल है। विकास विधानी का लेक व्यू परिसर भी इसी सूची में है। मोहम्मद शब्बीर, ताहिर आजम, यूसुफ और जीशान अली के निर्माण भी शामिल हैं। इन सभी मामलों में अदालत का फैसला आने के बाद ही कार्रवाई हो सकेगी।



53 पुराने निर्माण अलग श्रेणी में

इसके अलावा 53 निर्माणों को अलग श्रेणी में रखा गया है। निगम का कहना है कि ये निर्माण 16 मार्च 2022 से पहले के हैं। इस तारीख से पहले जारी सर्कुलर के मुताबिक नई कार्रवाई सिर्फ बाद के निर्माणों पर लागू होती है। इसी वजह से इन पुराने निर्माणों को अभी नहीं छुआ गया। हालांकि इनके आसपास के अतिक्रमण पहले ही हटाए जा चुके हैं। सिर्फ एफटीएल की सीमा से सटे मुख्य निर्माण अब भी खड़े हैं।



किन बड़े नामों का खुलासा हुआ

53 निर्माणों की सूची में कई जाने पहचाने नाम शामिल हैं। इनमें विधायक विष्णु खत्री का नाम सबसे ऊपर है। उनका निर्माण कोलूखेड़ी इलाके में पक्का मकान बताया गया है। उनके रिश्तेदार राकेश शर्मा का नाम भी सूची में है। पूर्व आईपीएस अधिकारी मैथलीशरण गुप्त का शेड वाला पक्का मकान बिशनखेड़ी में है।



कारोबारी देवेंद्र जैन की पक्की बाउंड्री और कमरा सेवनिया गौंड़ इलाके में दर्ज है। इनके अलावा जया नेमानी, मुकेश चौधरी और अशोक गोयल के नाम भी सूची में शामिल हैं। अमृत तिपाठी, मंजू बरवाल और नगर निगम पंप हाउस का निर्माण भी सूची में है। भारती सक्सेना और श्यामा शर्मा का नाम गोरा क्षेत्र से जुड़ा है।



प्रीति और सत्येंद्र अग्रवाल का मैरिज गार्डन भी सूची में शामिल है। किरण गोयल, नेहा गुप्ता और सुरेश कुमार वासवानी के निर्माण बिशनखेड़ी में हैं। पी.एस. भटनागर, घोड़ा फार्म हाउस, सयाजी और होटल टेरेस भी सूची में शामिल हैं। अमल्तास गार्डन की सड़क और इलियास अली का मैरिज गार्डन भी इसी में आते हैं। राकेश शर्मा, परमानंद और मनीष जैन के नाम भी लिस्ट में दर्ज हैं।



303 चिन्हित, सिर्फ 57 हटे

नगर निगम और जिला प्रशासन ने बड़े तालाब क्षेत्र में कुल 303 अतिक्रमण चिन्हित किए थे। इनमें से अब तक सिर्फ 57 अतिक्रमण हटाए जा सके हैं। यानी अभी भी 246 मामलों में कार्रवाई बाकी है। हटाए गए निर्माणों में टीटी नगर क्षेत्र के 45 मामले शामिल हैं।



बैरागढ़ क्षेत्र में 12 अतिक्रमण हटाए गए हैं। इस अभियान के तहत आखिरी बड़ी कार्रवाई 2 जुलाई को हुई थी। उसके बाद से कोई नई कार्रवाई नहीं हुई है। अब निगम ने पूरी स्टेटस रिपोर्ट एनजीटी के सामने पेश कर दी है।



10 साल में सिर्फ एक बड़ी कार्रवाई

बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में पिछले 10 साल में केवल एक बड़ा अभियान चला। करीब दो साल पहले एनजीटी के आदेश पर भदभदा झुग्गी बस्ती के 386 मकान हटाए गए थे। इसके बाद कोई बड़ा अभियान नहीं चलाया गया। हालिया सुनवाई में आवेदक पक्ष ने गंभीर आरोप लगाए।



उनका कहना था कि सिर्फ छोटे अतिक्रमण हटाकर कार्रवाई का दावा किया जा रहा है। जबकि प्रभावशाली और रसूखदार लोगों के बड़े निर्माण अब भी जस के तस खड़े हैं। इस पर एनजीटी ने अधिकारियों से सीधा सवाल पूछा। ट्रिब्यूनल ने पूछा कि अगर कानूनी बाधा नहीं है तो निर्माण कब तक हटेंगे। नगर निगम ने जवाब दिया कि कानूनी अड़चनें दूर होते ही एक माह में कार्रवाई की जाएगी।



अफसरों का क्या कहना है

इस पूरे मामले पर नगर निगम भोपाल के चीफ सिटी प्लानर नीरज आनंद लिखार ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हाई कोर्ट से रोक वाले मामलों में जल्द ऑफिसर इन चार्ज नियुक्त किए जाएंगे। इसके बाद निगम अदालत में अपना पक्ष रखेगा। उनके मुताबिक बड़े तालाब केस की निगरानी के लिए हाई लेवल टास्क फोर्स पहले से बनी है।



यह समिति जो भी निर्णय लेगी, उसी आधार पर आगे कार्रवाई होगी। उन्होंने साफ किया कि 16 मार्च 2022 से पहले के निर्माणों पर सर्कुलर के मुताबिक ही फैसला होगा। उनके अनुसार सभी संबंधित लोगों ने नोटिस का जवाब पहले ही दे दिया है।



आगे क्या होगा

अब पूरे मामले की अगली दिशा एनजीटी और टास्क फोर्स के फैसले पर निर्भर करेगी। हाई कोर्ट से जुड़े 15 मामलों में अदालती फैसला आना अभी बाकी है। वहीं 53 पुराने निर्माणों पर टास्क फोर्स को अंतिम निर्णय लेना है। जब तक ये प्रक्रियाएं पूरी नहीं होतीं, तब तक बड़े नाम बचे रहेंगे। आम लोगों के अतिक्रमण तेजी से हटाए गए हैं। लेकिन प्रभावशाली लोगों के मामलों में प्रक्रिया धीमी नजर आ रही है। इससे प्रशासन की मंशा पर भी सवाल उठ रहे हैं।



यह खबर क्यों जरूरी है

यह खबर पर्यावरण संरक्षण और कानून के समान लागू होने से जुड़ी है। बड़ा तालाब भोपाल की पहचान है और इसका संरक्षण जरूरी है। यह दिखाती है कि नियम सबके लिए बराबर लागू होने चाहिए, चाहे आम आदमी हो या प्रभावशाली व्यक्ति। एनजीटी जैसी संस्थाएं पर्यावरण से जुड़े संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करती हैं।



नागरिकों को अपने शहर की जल संरचनाओं की स्थिति जानने का अधिकार है। यह खबर तथ्यों और आधिकारिक रिपोर्ट पर आधारित है। इसमें किसी व्यक्ति या पार्टी के खिलाफ आरोप नहीं लगाया गया है। यह जिम्मेदार और संतुलित पत्रकारिता का उदाहरण है।



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