134 नहीं 99 बच्चों का चल रहा इलाज, बालाघाट प्रशासन ने दी सफाई

Jitendra Shrivastava | Sept 01, 2026, 17:51 IST
Photograph: (THESOOTR)
BALAGHAT. बालाघाट के बिरसा क्षेत्र में मौसमी बीमार बच्चों के भर्ती होने का क्रम लगातार जारी है। जिला प्रशासन के अनुसार अस्पताल में 134 नहीं 99 बच्चों का इलाज चल रहा है।

बालाघाट जिले आदिवासी बाहुल्य कुड़ेकसा, अडोरी, कोरका, बोन्दारी, घुम्मुर, मछुरदा और मातला सहित आसपास के 36 गांव इस समय स्वास्थ्य विभाग की निगरानी में हैं। यहां के बच्चों को सर्दी, खांसी, बुखार, त्वचा रोग और मलेरिया के इलाज के लिए जिला चिकित्सालय बालाघाट लाया जा रहा है।



प्रशासन के अनुसार जिला अस्पताल में वर्तमान में 99 बच्चों का इलाज किया जा रहा है। प्रशासन ने यह भी बताया कि अस्पताल में 134 बच्चों के भर्ती होने की बात निराधार है, प्रशासन सतत निगरानी कर रहा है।



प्रशासन ने बताई वास्तविक स्थिति

बालाघाट प्रशासन की ओर से दी गई अधीकृत सूचना के अनुसार, 1 सितंबर 2026 की स्थिति में वार्ड में कुल 99 बच्चे भर्ती हैं। इनमें से 56 बच्चे प्रभावित 36 गांवों से हैं। बाकी 43 बच्चे जिले के अन्य विकासखंडों से मौसमी बीमारी के चलते भर्ती हुए हैं।



31 अगस्त 2026 की रात से लेकर 1 सितंबर की शाम 5 बजे तक 16 नए मरीज भर्ती किए गए। बीते 4-5 दिनों में प्रभावित क्षेत्र से कुल 76 मरीज इलाजरत रहे। इनमें से 36 मरीजों को आज सफलतापूर्वक डिस्चार्ज किया गया। इस तरह आज कुल 56 मरीज जिला अस्पताल में उपचाररत हैं।



अस्पताल में कितने बेड की व्यवस्था

जिला चिकित्सालय बालाघाट में बच्चों के इलाज के लिए कुल 89 बेड आरक्षित किए गए हैं। इनमें से 53 बेड शिशु वार्ड में हैं। बाकी 36 बेड अन्य वार्डों में उपलब्ध कराए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि बच्चों के इलाज की व्यवस्था पर्याप्त है।



बैगा समुदाय के बच्चों को लेकर क्यों दिखी भीड़

प्रभावित क्षेत्र में बैगा समुदाय के शिशु रोगियों को भर्ती किया जा रहा है। इन बच्चों के साथ परिवार के अन्य छोटे बच्चे भी अस्पताल आते हैं। इनके लिए अलग से प्रतीक्षालय की व्यवस्था है। लेकिन छोटे बच्चे अपनी मां के साथ वार्ड में ही रहते हैं। इसी वजह से वार्ड में बच्चों की संख्या ज्यादा दिखाई देती है।



बरसात के मौसम में बढ़ी बीमारी

जिला प्रशासन के अनुसार, बारिश के मौसम में मौसमी बीमारी बढ़ना सामान्य बात है। इसी वजह से जिले के अन्य विकासखंडों से भी बुखार और सर्दी-खांसी से पीड़ित बच्चे शिशु वार्ड में भर्ती किए जा रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि साल भर मौसमी और अन्य बीमारियों से ग्रसित बच्चे अस्पताल में भर्ती रहते हैं। यह कोई असामान्य स्थिति नहीं है।



मौत के दावे पर प्रशासन की चुप्पी

गौरतलब है कि प्रशासन की इस विज्ञप्ति में मौतों की संख्या को लेकर कोई जानकारी नहीं दी गई है। पहले की खबर में 27 मौतों का जो दावा किया गया था, उस पर प्रशासन ने कुछ नहीं कहा। यह पहलू अब भी अस्पष्ट बना हुआ है और आगे स्पष्टीकरण की जरूरत है।



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