बालाघाट में 24 बच्चों की मौत के बाद जागी सरकार, की चींटी सी कार्रवाई

Sandeep Kumar | Aug 22, 2026, 19:58 IST
बालाघाट में 24 बच्चों की मौत के बाद जागी सरकार
बालाघाट के बिरसा में महामारी से 24 बच्चों की मौत के बाद अब सरकार ने चींटी जैसा एक्शन लिया है। डिप्टी सीएम के निर्देश के बाद टीकाकरण और मलेरिया के अधिकारियों को हटाया गया है।

समझें क्या है पूरा मामला

बालाघाट के बिरसा क्षेत्र में 24 बच्चों की मौत हुई थी।


मौतों की वजह मलेरिया और कुपोषण बताई गई है।


टीकाकरण में कमी भी बड़ा कारण माना गया।


डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने गांवों का दौरा किया।


दो स्वास्थ्य अधिकारियों पर कार्रवाई की गई।



बालाघाट जिले के बिरसा विकासखंड में महामारी फैलने से 24 बच्चों की मौत हुई थी। यह इलाका आदिवासी बहुल है। मौत की वजह टीकाकरण में कमी, मलेरिया और कुपोषण बताई जा रही है। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने शनिवार को गांवों का दौरा किया। उन्होंने दो जिम्मेदार अधिकारियों को तुरंत हटा दिया।



ग्रामीणों को सरकारी व्यवस्था पर भरोसा नहीं

मंत्री ने चेतावनी दी कि किसी भी तरह की लापरवाही पर सरकार सख्त कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगी। जरूरत पड़ने पर प्रभावित गांवों में अतिरिक्त स्टाफ भी भेजा जाएगा। मंत्री ने खुद स्वीकार किया कि ग्रामीणों को डॉक्टरों और सरकारी व्यवस्था पर भरोसा नहीं है।



उन्होंने भरोसा दिलाया कि बैगा आदिवासियों के स्वास्थ्य को लेकर कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। अगर किसी विशेषज्ञ या संसाधन की जरूरत हो तो प्रशासन प्रस्ताव बनाकर भेज सकता है। टेक होम राशन को लेकर मंत्री ने बताया कि यह विकल्प के आधार पर दिया जा रहा है।



गांव पहुंचकर सुनी लोगों की बात

डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने प्रभावित गांव मछुरदा का दौरा किया। उन्होंने वहां ग्रामीणों से सीधी बातचीत की। एक ग्रामीण महिला ने मंत्री को बताया कि गांव में अस्पताल तो मौजूद है, लेकिन डॉक्टर उपलब्ध नहीं रहते।



इस पर मंत्री ने तुरंत मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO – Chief Medical and Health Officer) से जानकारी ली। उन्होंने अस्पताल में एएनएम (ANM – Auxiliary Nurse Midwife) तैनात करने के निर्देश दिए। मंत्री ने मौके पर ही अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए।



दशकों बाद नक्सल मुक्त हुआ इलाका

निरीक्षण के बाद मीडिया से बात करते हुए मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि यह क्षेत्र दशकों बाद नक्सल मुक्त हुआ है। उन्होंने बताया कि सरकार यहां के आदिवासियों को मुख्यधारा में लाने का प्रयास कर रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार में उनकी भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।



मंत्री ने आगे बताया कि निरीक्षण के दौरान प्रभावित गांवों में टीकाकरण, मलेरिया से बचाव के लिए दवा छिड़काव और कुपोषण दूर करने की जरूरत सामने आई। इसके लिए प्रशासनिक अमला सक्रिय रूप से काम कर रहा है।



बच्चों के लिए शुरू होगा विशेष अभियान

बीमारी प्रभावित गांवों में बच्चों को खसरा-रूबेला जैसी संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए विशेष टीकाकरण अभियान शुरू किया गया है। मंत्री ने माना कि प्रभावित क्षेत्रों में जागरूकता की भारी कमी है।



उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार इस बीमारी को लेकर पूरी तरह गंभीर है। मुख्यमंत्री खुद पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि हालात पर लगातार नजर रखी जाएगी।



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