बालाघाट डबलमनी घोटाला: 600 करोड़ की हेराफेरी करने वाला मास्टरमाइंड सोमेन्द्र कंकरायने
पूनम राउत @ बालाघाट
समझें क्या है पूरा मामला...
- बालाघाट के डबलमनी घोटाले का मास्टरमाइंड सोमेन्द्र कंकरायने गिरफ्तार हुआ है।
- पुलिस ने उसे उत्तराखंड के हरिद्वार से 6 साथियों समेत पकड़ा है।
- सोमेन्द्र ने निवेशकों को रकम दोगुनी करने का लालच दिया था।
- 2022 में जमानत मिलने के बाद वह फरार हो गया था।
- अब सभी आरोपियों को बालाघाट लाया जा रहा है।
कौन है मुख्य आरोपी
सोमेन्द्र कंकरायने बालाघाट जिले की लांजी तहसील के बोलेगांव गांव का रहने वाला है। वह जिले के चर्चित डबलमनी घोटाले का मुख्य आरोपी है। लंबे समय से पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। आखिरकार पुलिस को उसे पकड़ने में कामयाबी मिल गई है।
पुलिस ने उसे उत्तराखंड के हरिद्वार से गिरफ्तार किया है। उसके साथ छह अन्य साथियों को भी पकड़ा गया है। पुलिस की एक विशेष टीम ने मुखबिर की सूचना पर यह कार्रवाई की। टीम ने हरिद्वार में दबिश देकर सभी पांच आरोपियों को धर दबोचा।
कैसे रचा गया था ठगी का जाल
सोमेन्द्र कंकरायने और उसके एजेंटों ने एक बड़ा ठगी का जाल फैलाया था। उन्होंने निवेशकों को कम समय में रकम दोगुनी करने का लालच दिया। यह लालच सिर्फ बालाघाट तक सीमित नहीं था। दूसरे प्रदेशों के निवेशक भी इस जाल में फंसाए गए।
इस स्कीम में हर तरह के लोग फंसे। एक गरीब मजदूर से लेकर कई लखपति भी इसमें शामिल हो गए। लोगों को सोमेन्द्र पर इतना भरोसा हो गया कि उन्होंने अपनी जमापूंजी लगा दी। कई लोगों ने अपने घर बेच दिए। कुछ ने जमीन बेचकर पैसा लगाया। कई लोगों ने अपने जेवर तक बेच दिए थे।
शुरुआत में भरोसा जीतने के लिए चालाकी भरा तरीका अपनाया गया। कुछ शुरुआती निवेशकों को दोगुनी रकम के चेक दिए गए। इससे बाकी लोगों का भरोसा और मजबूत हो गया। धीरे-धीरे ज्यादा से ज्यादा लोग इस स्कीम में पैसा लगाने लगे। लेकिन कुछ समय बाद सोमेन्द्र और उसके साथियों ने पैसा देना बंद कर दिया।
जैसे ही निवेशकों को असलियत समझ आई, हड़कंप मच गया। तब तक सोमेन्द्र और उसके करीबी साथी फरार हो चुके थे। इस तरह हजारों लोगों की मेहनत की कमाई डूब गई। कई परिवार आर्थिक रूप से पूरी तरह टूट गए।
2022 में हुआ था पूरे रैकेट का खुलासा
बालाघाट पुलिस ने साल 2022 में इस बड़े ठगी रैकेट (बालाघाट डबलमनी घोटाला) का पर्दाफाश किया था। उस समय पुलिस ने सोमेन्द्र कंकरायने और उसके अन्य एजेंटों को गिरफ्तार किया था। यह गिरफ्तारी उस समय बड़ी खबर बनी थी। हजारों पीड़ितों को उम्मीद जगी थी कि उन्हें न्याय मिलेगा।
हालांकि कुछ समय बाद सोमेन्द्र और उसके साथियों को सशर्त जमानत मिल गई। जमानत मिलते ही आरोपी फरार हो गए। इसके बाद से वे लगातार पुलिस को चकमा दे रहे थे। पुलिस लगातार उनकी तलाश में जुटी हुई थी, लेकिन आरोपी हाथ नहीं आ रहे थे।
मुखबिर की सूचना पर हुई कार्रवाई
आखिरकार पुलिस को एक अहम सुराग मिला। मुखबिर ने पुलिस को सोमेन्द्र और उसके साथियों के हरिद्वार में छिपे होने की सूचना दी। इस सूचना पर पुलिस की विशेष टीम तुरंत हरकत में आई। टीम ने हरिद्वार पहुंचकर दबिश दी।
इस दबिश में पुलिस को बड़ी सफलता मिली। टीम ने सोमेन्द्र कंकरायने समेत चार अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। लंबे समय से फरार चल रहा मास्टरमाइंड आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया। पुलिस के लिए यह गिरफ्तारी एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
पुलिस अब कर रही आगे की जांच
गिरफ्तारी के बाद पुलिस के सामने अब बड़ा सवाल है कि ठगी की रकम आखिर कहां गई। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह पैसा कहां-कहां निवेश किया गया। साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि इस पूरे घोटाले में और कौन-कौन शामिल है।
पुलिस को शक है कि इस रैकेट से जुड़े कुछ और लोग अब भी फरार हो सकते हैं। जांच एजेंसी इस दिशा में भी काम कर रही है। पीड़ितों को उम्मीद है कि अब उन्हें अपनी डूबी हुई रकम वापस मिल सकेगी। हालांकि इसके लिए अभी लंबी कानूनी प्रक्रिया बाकी है।
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि आसान मुनाफे का लालच कितना खतरनाक हो सकता है। कम समय में पैसा दोगुना करने वाली स्कीमों से बचना बहुत जरूरी है। ऐसी स्कीमों में निवेश करने से पहले पूरी जांच पड़ताल करनी चाहिए।
FAQ
- बालाघाट डबलमनी घोटाले का मास्टरमाइंड कौन है?
इस घोटाले का मास्टरमाइंड सोमेन्द्र कंकरायने है, जो लांजी तहसील के बोलेगांव गांव का रहने वाला है। पुलिस ने उसे उत्तराखंड के हरिद्वार से 4 अन्य साथियों के साथ गिरफ्तार किया है। - बालाघाट डबलमनी घोटाले में लोगों को कैसे ठगा गया था?
सोमेन्द्र कंकरायने और उसके एजेंटों ने निवेशकों को कम समय में रकम दोगुनी करने का लालच दिया था। शुरुआत में कुछ लोगों को दोगुनी रकम के चेक देकर भरोसा जीता गया। बाद में पैसा देना बंद कर दिया गया और आरोपी फरार हो गए, जिससे हजारों लोगों की जमापूंजी डूब गई।
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