बरगी क्रूज हादसे में जांच शुरू होने से पहले ही तोड़ दिया गया दुर्घटनाग्रस्त क्रूज, जांच आयोग ने जताई चिंता

Neel Tiwari | May 26, 2026, 17:43 IST
Retired Justice Sanjay Dwivedi
बरगी क्रूज हादसे की न्यायिक जांच शुरू हो गई है। रिटायर्ड जस्टिस संजय द्विवेदी सुनवाई कर रहे हैं। जांच शुरू होने से पहले ही दुर्घटनाग्रस्त क्रूज तोड़े जाने के आरोप लगे हैं।

News In Short

  • रिटायर्ड जस्टिस संजय द्विवेदी ने कलेक्ट्रेट में शुरू की सुनवाई।
  • जांच से पहले क्यों तोड़ा दुर्घटनाग्रस्त क्रूज - 'द सूत्र' ने पूछा था सवाल।
  • क्रूज में फोर-स्ट्रोक इंजन नहीं था और फिटनेस जांच भी अधूरी थी।
  • प्रस्तुत बिंदुओं को जांच में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।
  • NGT के आदेशों और Inland Vessels Act 2021 के उल्लंघन के आरोप लगाए गए।

News in detail

बरगी क्रूज हादसे की न्यायिक जांच जारी है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने गंभीर आरोप लगाए। द सूत्र पहले गोपनीय दस्तावेज दिखा चुका है। दस्तावेज में क्रूज की फिटनेस पर सवाल थे। खराब इंजन की जानकारी भी सामने आई थी। मंच ने सबूत नष्ट करने का आरोप लगाया। दावा है क्रूज पहले ही तोड़ दिया गया। जिला प्रशासन के आदेश का भी जिक्र हुआ। कई अहम सबूत नष्ट होने की आशंका जताई गई। रिटायर्ड जस्टिस संजय द्विवेदी ने सुनवाई की। उन्होंने आरोपों को गंभीर माना। जांच में सभी बिंदु शामिल किए जाएंगे।



पहले दिन ही उठे बड़े सवाल

बरगी बांध में हुए चर्चित क्रूज हादसे की न्यायिक जांच अब औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। जांच आयोग के अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस संजय द्विवेदी ने मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय के कक्ष क्रमांक 43 में सुनवाई की।



सुनवाई के पहले ही दिन ऐसे आरोप सामने आये जिसने पूरे हादसे की जांच की दिशा बदल दी। 'द सूत्र' ने पहले ही क्रूज चलाने के नियमों के उल्लंघन के साथ ही उसके फिटनेस सहित जांच के पहले ही उसे तोड़कर सबूत मिटाने पर सवाल खड़े किए थे।



अब नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने आयोग के सामने दावा किया कि जिस क्रूज में हादसा हुआ। उसे जांच शुरू होने से पहले ही तोड़ दिया गया। मंच ने इसे सबूतों को खत्म करने जैसा गंभीर मामला बताया।



ये उठे सवाल

नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने आयोग में याचिका पेश की। अध्यक्ष डॉ. पी.जी. नाजपांडे भी मौजूद रहे। अधिवक्ता वेदप्रकाश अधौलिया ने पक्ष रखा। याचिका में कानूनी प्रावधानों का हवाला दिया गया। Inland Vessels Act 2021 की धाराएं भी बताई गईं। मंच ने क्रूज तोड़े जाने पर सवाल उठाए। दावा है जांच पहले पूरी नहीं हुई थी। जिला प्रशासन के आदेश का भी जिक्र हुआ। आरोप है क्रूज को dismantle कराया गया। तकनीकी जांच प्रभावित होने की आशंका जताई गई। फिटनेस परीक्षण मुश्किल होने की बात कही गई।



NGT के आदेशों के उल्लंघन का आरोप

याचिका में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के 12 सितंबर 2023 के आदेश का भी हवाला दिया गया। मंच ने कहा कि NGT ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जलाशयों में संचालित नावों में फोर-स्ट्रोक आउटबोर्ड इंजन होना चाहिए। लेकिन हादसे वाली क्रूज में दो 105 एचपी के डीजल इंजन लगाए गए थे।



आरोप यह भी है कि हादसे के समय एक इंजन फेल हो गया था, इससे जुड़े हुए एक्सक्लूसिव गोपनीय दस्तावेज 'द सूत्र' अपने दर्शकों को पहले ही दिखा चुका है।



मंच ने दावा किया कि क्रूज संचालकों के पास पर्यावरणीय मंजूरी और प्रदूषण नियंत्रण संबंधी आवश्यक प्रमाणपत्र भी उपलब्ध नहीं थे। सबसे बड़ा सवाल यह उठाया गया कि जब क्रूज को ही तोड़ दिया गया, तब अब उसकी फिटनेस और तकनीकी खामियों की जांच आखिर कैसे होगी।



पांच साल तक नहीं हुआ सर्वे

याचिका में गंभीर सुरक्षा लापरवाही के आरोप लगाए गए। Inland Vessels Act 2021 का उल्लंघन बताया गया। बिना सर्वे सर्टिफिकेट क्रूज संचालन प्रतिबंधित बताया गया। हादसे वाली क्रूज का पांच वर्षों से सर्वे नहीं हुआ। फिर भी क्रूज लगातार यात्रियों को लेकर चलती रही। बरगी बांध क्षेत्र को इनलैंड वाटर ज़ोन घोषित नहीं किया गया। सुरक्षा मानकों की प्रक्रिया अधूरी रहने का दावा किया गया। क्रूज में बाद में बदलाव किए जाने का आरोप लगा। रीमॉडिफिकेशन का कानूनी पंजीकरण नहीं कराया गया।



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सभी बिंदुओं को गंभीरता से लिया जाएगा

सुनवाई के दौरान जस्टिस संजय द्विवेदी ने मंच की आपत्तियों को गंभीर माना। आयोग ने कहा कि प्रस्तुत सभी बिंदुओं को जांच में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा। साथ ही याचिकाकर्ताओं को आगे भी सुनवाई का अवसर दिया जाएगा।



आयोग ने विशेष रूप से इस बात पर चिंता जताई कि यदि नाव नष्ट कर दी गई है तो फिटनेस परीक्षण और तकनीकी जांच किस आधार पर होगी। इसके लिए संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए हैं।



नाव सुरक्षा दिशानिर्देशों की अनदेखी का भी आरोप

इस मामले में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की सितंबर 2017 की Boat Safety Guidelines की भी अनदेखी हुई है। मंच का कहना है कि बरगी बांध में इन सुरक्षा निर्देशों का पालन नहीं किया गया।



नाव सुरक्षा मुद्दे पहले संसद में उठ चुके हैं। लोकसभा में 28 जुलाई 2023 को सवाल पूछा गया था। अतारांकित प्रश्न क्रमांक 1444 में सुरक्षा खामियां उठाई गईं। मंच ने सरकारी सतर्कता का भी हवाला दिया। स्थानीय स्तर पर गंभीर लापरवाही सामने आई।



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