मध्य प्रदेश में 10 जिलों का मास्टर प्लान इसी साल, बड़वानी का जारी
समझें क्या है पूरा मामला
- बड़वानी का मास्टर प्लान जारी होकर जनता की आपत्तियों के लिए पहुंच गया है।
- खंडवा और रतलाम के ड्राफ्ट भी लगभग तैयार हो चुके हैं।
- टीएंडसीपी (Town And Country Planning) सैटेलाइट-ड्रोन डेटा से प्लान बना रहा है।
- साल के अंत तक करीब 10 जिलों के मास्टर प्लान आ सकते हैं।
- भोपाल, इंदौर और जबलपुर का प्लान मेट्रोपॉलिटन वजह से टल गया है।
मध्य प्रदेश के शहरों का भविष्य अब सैटेलाइट और ड्रोन डेटा से तय हो रहा है। टीएंडसीपी ने इसकी शुरुआत बड़वानी (बड़वानी की खबरें) से कर दी है। बड़वानी का मास्टर प्लान तैयार होकर दावे-आपत्ति के लिए जनता के सामने आ गया है। यानी अब लोग इस प्लान पर अपनी राय दे सकते हैं।
सैटेलाइट-ड्रोन से नया प्लान
कहां क्या बनेगा शहर में
मास्टर प्लान में साफ बताया जाएगा कि रेसीडेंशियल जोन कहां बनेगा। कमर्शियल इलाके किस जगह होंगे, जहां नई दुकानें और मॉल खुल सकें। औद्योगिक क्षेत्र शहर से दूर रखा जाएगा। इसका मकसद यह है कि फैक्ट्रियों का प्रदूषण रिहायशी इलाकों तक न पहुंचे। ग्रीन बेल्ट और पानी के संसाधनों को भी प्लान में जगह मिलेगी। जरूरी जमीनें भविष्य के लिए रिजर्व रखी जाएंगी।
टीएंडसीपी के आयुक्त कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि जैसे-जैसे डेटा और जमीनी काम पूरा हो रहा है, प्लान बनाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बड़वानी का प्लान जारी हो चुका है और बाकी जिलों के प्लान भी जल्द जारी होंगे। जहां मेट्रोपॉलिटन एरिया बन रहे हैं, वहां नए निर्देशों के साथ काम होगा।
28 छोटे शहरों पर नजर
सिर्फ बड़े जिले नहीं, बल्कि 28 छोटे शहरों का भी सर्वे चल रहा है। ब्यावरा, इटारसी, जावरा और मंडीदीप का सैटेलाइट डेटा मिल चुका है। गोहद, सिरोंज, सिहोरा और सेंधवा का ड्रोन डेटा भी आ गया है। दोनों तरह के डेटा का मिलान किया जा रहा है।
आष्टा, अंबाह, जौरा, संबलगढ़ और पोरसा के लिए सर्वे ऑफ इंडिया से बेसमैप लिया जा रहा है। सारंगपुर में तो निवेश क्षेत्र का गठन भी हो चुका है। हालांकि राघौगढ़-विजयपुर, गाडरवारा और मैहर का डेटा अभी तैयार नहीं हो पाया है। इन शहरों का काम बाद के चरण में होगा।
सीहोर को क्यों दी प्राथमिकता
जिन जिलों पर अभी काम चल रहा है, उनमें खंडवा-रतलाम के अलावा विदिशा, सीहोर, रीवा, कटनी, शाजापुर, नरसिंहपुर और शहडोल शामिल हैं। सीहोर को खास तौर पर प्राथमिकता दी गई है। इसकी वजह है भोपाल-देवास कॉरिडोर, जहां दोनों तरफ तेजी से कमर्शियल डेवलपमेंट हो रहा है। सीहोर इसी कॉरिडोर के बीच में स्थित है।
इसी तरह रीवा-कटनी और शहडोल भी अहम माने जा रहे हैं। ये तीनों जिले त्रिकोण के आकार में जुड़े हुए हैं। शहडोल सीधे कटनी और रीवा से कनेक्ट होता है। इन जिलों का मास्टर प्लान आगे औद्योगिक निवेश की दिशा तय करेगा।
मेट्रोपॉलिटन से क्यों देरी
भोपाल और इंदौर के मास्टर प्लान में अभी देरी है। सरकार पहले ही कह चुकी है कि भोपाल और उज्जैन-इंदौर को मेट्रोपॉलिटन रीजन बनाया जाएगा। इसके बाद ही इन दोनों शहरों का मास्टर प्लान नए सिरे से तैयार होगा।
जबलपुर और ग्वालियर भी मेट्रोपॉलिटन बनने की राह पर हैं। इन दोनों शहरों पर भी आगे नए नियमों के साथ काम शुरू होगा। हालांकि ग्वालियर के मौजूदा मास्टर प्लान की मियाद अभी खत्म नहीं हुई है, इसलिए वहां फिलहाल पुराना प्लान ही लागू रहेगा।
कुल मिलाकर मध्य प्रदेश में शहरी विकास (नया मास्टर प्लान) अब पुराने ढर्रे से हटकर डेटा आधारित तरीके से हो रहा है। सैटेलाइट और ड्रोन सर्वे की मदद से हर जिले की जरूरत के हिसाब से प्लान बनाया जा रहा है। इससे आने वाले सालों में शहरों (mp master plan) का व्यवस्थित विकास हो सकेगा।
FAQ
- सवाल 1: मध्य प्रदेश में कौन-कौन से जिलों का मास्टर प्लान तैयार हो रहा है?
जवाब: बड़वानी का मास्टर प्लान जारी हो चुका है। खंडवा और रतलाम का ड्राफ्ट लगभग तैयार है। इसके अलावा विदिशा, सीहोर, रीवा, कटनी, शाजापुर, नरसिंहपुर और शहडोल पर भी काम चल रहा है। - सवाल 2: भोपाल और इंदौर का मास्टर प्लान अभी क्यों नहीं आया?
जवाब: सरकार ने भोपाल और उज्जैन-इंदौर को मेट्रोपॉलिटन रीजन घोषित करने का फैसला लिया है। इस वजह से इन दोनों शहरों का मास्टर प्लान मेट्रोपॉलिटन नियमों के हिसाब से नए सिरे से बनाया जाएगा। - सवाल 3: मध्य प्रदेश में मास्टर प्लान किस आधार पर तैयार किया जा रहा है?
जवाब: टीएंडसीपी (Town And Country Planning) विभाग सैटेलाइट और ड्रोन सर्वे के डेटा के आधार पर मास्टर प्लान तैयार कर रहा है। इसमें अगले 20 से 25 साल के शहरी विकास की दिशा तय की जाती है।
ये खबरें भी पढ़ें...
एमपी पुलिस के मास्टर प्लान से ड्रग्स तस्कर और साइबर माफियाओं का टूटेगा नेटवर्क
भोपाल मास्टर प्लान में हंगामा, विधायक आरिफ मसूद और जनपद अध्यक्ष में तू-तू, मैं-मैं
65 साल बाद बदलेंगे शहरों और गांवों के पैमाने, जानें सरकार का मास्टर प्लान
इंदौर पीछे, अब उज्जैन आगे... नाम पर अटका मेट्रोपॉलिटन रीजन, आगे क्या होगा?