बेतवा नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए 10 से 16 मई तक श्रमदान अभियान, जनजागरण बढ़ेगा
News in Short
- बेतवा नदी के सूखे उद्गम स्थल को पुनर्जीवित करने के लिए 10 से 16 मई तक अभियान चलेगा।
- अभियान में पर्यावरण प्रेमी और सामाजिक कार्यकर्ता श्रमदान करेंगे।
- अभियान का नेतृत्व आर के पालीवाल और डॉ. सुरेश गर्ग करेंगे।
- बेतवा नदी के संरक्षण के लिए समाज को जागरूक करना अभियान का मुख्य उद्देश्य है।
- पिछली बार 55 चैक डैम बनाए गए थे, जिससे नदी की स्थिति सुधारने में मदद मिली थी।
News in Detail
बेतवा नदी के सूखे उद्गम स्थल को पुनर्जीवित करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य नदी की स्थिति सुधारना और प्रदूषण से बचाना है। यह अभियान बेतवा अध्ययन एवं जनजागरण समूह द्वारा तीन सालों से चलाया जा रहा है। इस वर्ष यह अभियान 10 मई से 16 मई तक झिरी ग्राम (जिला रायसेन-कोलार रोड) में फिर से शुरू हो रहा है। इस दौरान हजारों लोग बेतवा नदी के संरक्षण के लिए श्रमदान करेंगे।
इस अभियान के तहत बेतवा नदी के सूखे उद्गम स्थल को पुनर्जीवित करने के लिए श्रमदान किया जाएगा। आयोजन मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के विभिन्न हिस्सों से आए पर्यावरण प्रेमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय निवासियों द्वारा किया जाएगा। इस वर्ष यह अभियान पहले स्थगित किया गया था, लेकिन अब इसे बड़े स्तर पर शुरू किया जा रहा है।
इस साल की प्रमुख गतिविधियां
अभियान का नेतृत्व मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के पूर्व प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त आरके पालीवाल और गांधीवादी डॉ. सुरेश गर्ग करेंगे। इस अभियान में प्रमुख पर्यावरणविद, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न सामाजिक संस्थाएं भी शामिल होंगी।
पिछले साल बनाए गए थे 55 चैक डैम
2022 में बेतवा अध्ययन एवं जनजागरण समूह द्वारा एक सप्ताह के श्रमदान से 55 चैक डैम बनाए गए थे। इस श्रमदान में भोपाल, विदिशा, गंजबसौदा, सीहोर, बैतूल और इंदौर जैसे शहरों से सैकड़ों प्रकृति प्रेमी और आदिवासी बच्चों ने भाग लिया था। इस कार्य से बेतवा नदी के उद्गम स्थल को आंशिक रूप से पुनर्जीवित किया गया।
नदी-प्रेमियों से जुटने की अपील
जनजागरण समूह ने इस अभियान में अधिक से अधिक लोगों से जुड़ने की अपील की है। इस अभियान का उद्देश्य केवल बेतवा नदी के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़ा जन जागरूकता अभियान भी है। इस अभियान में भाग लेने वाले लोग नदी के महत्व को समझते हुए उसे संरक्षित करने का प्रयास करेंगे।
समाज की भूमिका
समिति का कहना है कि बेतवा नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए समाज को जागरूक करना बेहद जरूरी है। यह अभियान केवल नदी के लिए नहीं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम है। समिति ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे इस सप्ताहभर के आयोजन में सहभागिता करें। वे अपनी ओर से नदी के संरक्षण के लिए योगदान दें।
कहां से निकलती है बेतवा नदी?
बेतवा नदी मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में विंध्य पर्वतमाला (Vindhya Range) के उत्तरी ढलानों पर स्थित कुम्हरा गांव (झीरी) से निकलती है। यह नदी उत्तर-पूर्व की ओर बहती हुई मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से गुजरती है और अंततः उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में यमुना नदी में मिल जाती है।
ये भी पढ़ें...
केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट : प्रशासन के आश्वासन पर किसानों का उग्र आंदोलन 10 दिन के लिए टला
कौशल एवं प्रशिक्षण विभाग ने किया खेल, मेरिट और नियुक्ति बेमेल
नगरीय निकाय और पंचायतों में चुनावी शंखनाद; 11 मई से नामांकन, जून के पहले हफ्ते में फैसला
MP Top News : मध्य प्रदेश की बड़ी खबरें