एमपी में हनीट्रैप गैंग की आरोपी महिला निकली HIV संक्रमित, पीड़ितों की जान को भी खतरा
समझें क्या है पूरा मामला...
- भिंड में देहात थाना पुलिस ने एक हनीट्रैप गैंग को पकड़ा है।
- गैंग की एक महिला मेडिकल जांच में एचआईवी पॉजिटिव पाई गई है।
- गैंग रसूखदार लोगों को फंसाकर आपत्तिजनक वीडियो बनाता था।
- वीडियो वायरल करने की धमकी देकर लाखों रुपए की उगाही की जाती थी।
- अब तक चार आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं, जांच जारी है।
भिंड में हनीट्रैप का जाल
मध्यप्रदेश के भिंड जिले में पुलिस ने एक संगठित हनीट्रैप गैंग का भंडाफोड़ किया है। देहात थाना पुलिस ने इस गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनमें दो महिलाएं और दो पुरुष शामिल हैं। गैंग का तरीका बेहद शातिराना था। पहले रसूखदार लोगों को प्रेमजाल में फंसाया जाता था, फिर आपत्तिजनक वीडियो बना लिए जाते थे।
इसके बाद पीड़ितों को धमकी दी जाती थी कि वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए जाएंगे। डर के मारे पीड़ित लाखों रुपए देते रहे।
HIV का चौंकाने वाला खुलासा
जांच के दौरान जिला अस्पताल में हुई मेडिकल जांच में एक महिला आरोपी एचआईवी संक्रमित पाई गई है। पूछताछ में पता चला कि वह पिछले करीब तीन साल से इस बीमारी का इलाज करा रही थी। यानी जब यह महिला गैंग के लिए काम कर रही थी, तब वह खुद इस संक्रमण से पीड़ित थी।
यह खुलासा होते ही मामले की गंभीरता कई गुना बढ़ गई है। अब यह सिर्फ ब्लैकमेलिंग का मामला नहीं रहा।
पीड़ितों की जान को भी खतरा
गैंग की शिकार हुए लोगों के लिए अब स्वास्थ्य सुरक्षा भी बड़ी चिंता बन गई है। पुलिस इस पहलू की गंभीरता से जांच कर रही है कि इस महिला के संपर्क में कितने लोग आए थे। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की तरफ से अभी तक इस संबंध में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान नहीं आया है।
एचआईवी एक गंभीर संक्रामक बीमारी है जो शारीरिक संपर्क से फैल सकती है। जो लोग इस गैंग के जाल में फंसे थे, उन्हें तत्काल जांच कराने की जरूरत है।
मोबाइल और लैपटॉप में मिले सबूत
पुलिस ने आरोपियों के पास से मोबाइल फोन और लैपटॉप जब्त किए हैं। इनमें बड़ी संख्या में आपत्तिजनक वीडियो, फोटो और वित्तीय लेनदेन के दस्तावेज मिले हैं। इन डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि गैंग ने कितने लोगों को शिकार बनाया है। यह भी जांचा जा रहा है कि उगाही का नेटवर्क किन-किन जिलों तक फैला था।
वकील की भूमिका संदिग्ध
जांच में एक अधिवक्ता यानी वकील का नाम भी सामने आया है। पुलिस यह पड़ताल कर रही है कि ब्लैकमेलिंग से वसूली गई रकम के लेनदेन में इस वकील की क्या भूमिका रही है। यदि वकील का नाम साबित हुआ तो यह मामला और भी उलझ सकता है। फिलहाल पुलिस सभी डिजिटल सबूतों की बारीकी से जांच कर रही है।
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