भोजशाला; देवी वाग्देवी मंदिर का स्वरूप मान्य, हिंदुओं को पूजा का पूरा अधिकार, नमाज नहीं
INDORE. धार भोजशाला पर फैसला 15 मई की दोपहर ढाई बजे इंदौर हाईकोर्ट की बेंच ने सुना दिया। जस्टिस विजय शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने 242 पेज का विस्तृत आदेश दिया। हालांकि आदेश करीब तीन मिनट तक खुली कोर्ट में पढ़ा गया। जस्टिस शुक्ला ने इस आदेश को पढ़ा और सभी पक्षकारों को इसमें संयमित रूप से पैरवी करने पर धन्यवाद भी दिया।
यहां लगातार पूजा की गई
बेंच ने अपने आदेश में खासकर एएसआई (ASI) की रिपोर्ट को तवज्जो दी है और अयोध्या मंदिर के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अहम बिंदुओं को लिया है। बेंच ने कहा है कि राजा भोज द्वारा संस्कृत पाठशाला के रूप में बनाई गई। इसमें लगातार पूजा हुई है, इस संबंध में प्रमाण मिले हैं। साथ ही सर्वे को लेकर कहा कि यह वैज्ञानिक पद्दति पर है और यह अहम आधार है। साथ ही साहित्य व अन्य दस्तावेज है। एएसआई ने यहां पर 106 पिलर्स, मंदिर स्ट्रक्चर के कई साक्ष्य प्राप्त किए हैं।
आदेश के मुख्य बिंदु
हाईकोर्ट ने हिंदू फ्रस्ट फार जस्टिस और कुलदीप तिवारी व अन्य की याचिकाओं को मान्य किया है। इसमें मांग रखी गई थी कि हिंदुओं को पूजा का पूरा अधिकार हो, नमाज बंद की जाए, मां वाग्देवी की प्रतिमा को स्थापित किया जाए। यह सभी बातें मान्य की गई है। इस संबंध में हाईकोर्ट ने यह निर्देश जारी किए हैं।
- विवादित भोजशाला और कमाल मौला मस्जिद परिसर जो 18 मार्च 1904 और 1958 एक्ट के तहत संरक्षित स्थल है।
- भोजशाला परिसर औऱ कमाल मौला मस्जिद परिसर का धार्मिक स्वरूप एक भोजशाल के रूप में माना जाता है, जिसमें देवी वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर है।
- एएसआई डायरेक्टर द्वारा 7 अप्रैल 2003 को जारी आदेश जिसके तहत भोजशाल परिसर के भीतर हिंदुओं के पूजा करने के अधिकार को प्रतिबंधित करने और मुस्लिम समुदाय द्वारा प्रार्थना की मंजूरी दी गई। इसे रद्द किया जाता है।
- भारत सरकार और एएसआई धार इस भूमि नंबर 604 पर स्थित भोजशाला मंदिर और संस्कृत शिक्षण के मामलों के प्रशासन और प्रबंधन के लिए निर्णय लेंगे। एएसआई एक्ट 1958 के तहतस ंपत्ति का समग्र प्रशासन और प्रबंधन जारी रखेगा।
- एएसआई को धार्मिक पहुंच के संरक्षण, सर्वधन पर पूरा कंट्रोल रहेगा
- याचिकाकर्ता ने लंदन म्यूजियम से देवी सरस्वती की प्रतिमा वापसी चाही है और इसे भोजशाला में स्थापित करना चाहते हैं। भारत सरकार इस प्रतिमा को वापस लाने और परिसर में फिर स्थापित करने के लिए दिए गए प्रतिवेदन पर विचार कर सकती है
- मुस्लिम समुदाय के धार्मिक अधिकारों की रक्षा करने और पक्षों के बीच पूर्ण न्याय को सुनिश्चित करने के लिए इनके द्वारा मस्जिद या प्रार्थना स्थल निर्माण के लिए जमीन आवंटन के लिए आवेदन देना होगा। यदि आवेदन दिया जाता है तो राज्य सरकार इस पर कानून के अनुसार विचार कर उपयुक्त स्थायी भूमि आवंटन कर सकती है।
- साथ ही जैन समाज द्वारा लगाई गई याचिका को खारिज किया जाता है। साथ ही कमालउद्दीन वेलफेयर सोसायटी द्वारा पेश याचिका व अन्य याचिका को भी खारिज किया जाता है।
सभी अधिवक्ताताओं को दिया धन्यवाद
बेंच ने याचिकाकर्ता, प्रतिवादियों और इंटरविनर सभी के अधिवक्ताओं को धन्यवाद दिया। इसमें सलमान खुर्शीद, शोभा मेनन, एके चितले, प्रशांत सिंह, सुनील जैन व अन्य सभी है। याचिका मुख्य रूप से हिंदू पक्ष की ओर से आशीष गोयल की थी। इसमें अधिवक्ता विष्शु शंकर जैन, विनय जोशी, वर्षा पाराशर, हरिशंकर जैन, पार्थ यादव, सौरभ सिंह व अन्य थे।
भोजशाला फैसले पर कैलाश विजयवर्गीय बोले
भोजशाला को लेकर आए फैसले पर मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने खुशी जताते हुए इसे ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण बताया है। उन्होंने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने विस्तृत सुनवाई और प्रस्तुत साक्ष्यों के गहन परीक्षण के बाद भोजशाला को मंदिर स्वरूप स्वीकार किया है । विजयवर्गीय ने कहा ये फैसला करोड़ों लोगों की आस्था, सांस्कृतिक चेतना और सनातन परंपरा के सम्मान का प्रतीक है।
कैलाश ने कहा कि यह क्षण इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठों में दर्ज होने वाला अविस्मरणीय अवसर है, जिसने समाज को गर्व और आत्मिक आनंद से भर दिया है।उन्होंने कहा कि यह निर्णय सत्य, श्रद्धा और इतिहास की पुनर्प्रतिष्ठा का महत्वपूर्ण पल है। विजयवर्गीय ने इसे भारतीय सभ्यता और सांस्कृतिक स्वाभिमान की जीत बताते हुए कहा कि भोजशाला को लेकर वर्षों से चल रही भावनाओं और संघर्ष को इस फैसले से नई पहचान मिली है।
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