भोजशाला विवाद: आज होगी सुप्रीम सुनवाई, मंदिर के फैसले को मुस्लिम पक्ष ने दी थी चुनौती

Amresh Kushwaha | Aug 12, 2026, 10:38 IST
भोजशाला विवाद आज होगी सुप्रीम सुनवाई
धार की भोजशाला विवाद में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट के मंदिर वाले फैसले को चुनौती दी है। जानें पूरा घटनाक्रम और नमाज विवाद...

समझें क्या है पूरा मामला...

  • धार की भोजशाला को हाईकोर्ट ने मां सरस्वती का मंदिर घोषित किया था।
  • इस फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में 5 याचिकाएं दायर कीं।
  • आज बुधवार को इन्हीं याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी।
  • शुक्रवार नमाज की जगह को लेकर पहले भी विवाद हो चुका है।
  • 14 अगस्त को शुक्रवार है, इसलिए नई व्यवस्था पर सबकी नजर है।

मध्य प्रदेश के धार जिले की भोजशाला को लेकर विवाद फिर सुर्खियों में है। इस मामले में आज यानी बुधवार, 12 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। यह सुनवाई इंदौर हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर होगी। मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों ने इस फैसले को चुनौती दी है। कुल पांच याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई हैं। इससे पहले पांच और छह अगस्त को सुनवाई तय थी, पर हो न सकी।



भोजशाला का यह विवाद कई सालों से चला आ रहा है। इस पर हिंदू और मुस्लिम दोनों समाजों का दावा रहा है। हाल ही में इस मामले में एक बड़ा फैसला भी आया था। उसी फैसले के बाद से यह विवाद और गहरा गया है।



अब तक क्या हुआ है मामला

भोजशाला की स्थापना 11वीं सदी में परमार राजा भोज ने कराई थी। इतिहास के मुताबिक यहां वाग्देवी यानी सरस्वती मंदिर बनाया गया था। इसके बाद 1305 में अलाउद्दीन खिलजी ने भोजशाला को तोड़ा। यहां कमाल मौला मस्जिद बनाए जाने का दावा किया जाता है।



1935 में धार रियासत ने एक व्यवस्था बनाई थी। उस समय हिंदुओं को मंगलवार पूजा और मुसलमानों को शुक्रवार नमाज की अनुमति मिली। साल 1952 में भोजशाला परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधीन आ गया। यह एक संरक्षित स्मारक बन गया।



साल 2003 में विवाद बढ़ने पर व्यवस्था में बदलाव हुआ। हिंदुओं को हर मंगलवार पूजा और वसंत पंचमी पर विशेष पूजा की अनुमति मिली। वहीं मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार 1 से 3 बजे नमाज की अनुमति मिली।



साल 2024 में हिंदू पक्ष ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का रुख किया। उन्होंने पूरे परिसर को मंदिर घोषित करने की मांग रखी। साथ ही ASI सर्वे कराने की भी मांग की गई। कोर्ट के आदेश पर ASI ने करीब 98 दिनों तक वैज्ञानिक सर्वे किया। इस सर्वे में पुरातत्व, स्थापत्य और वैज्ञानिक तकनीकों का इस्तेमाल हुआ।



हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

15 मई 2026 को इंदौर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने भोजशाला को मां सरस्वती का मंदिर घोषित किया। साथ ही हिंदू समाज को वहां रोजाना पूजा करने की अनुमति दी। इस फैसले के खिलाफ मुस्लिम समाज सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। उन्होंने पांच अलग अलग याचिकाएं दायर कीं।



नमाज को लेकर विवाद क्यों

14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने एक अंतरिम आदेश दिया था। कोर्ट ने प्रदेश सरकार को शुक्रवार नमाज के लिए वैकल्पिक जगह देने को कहा। यह जगह भोजशाला के पास ही होनी चाहिए थी। इसके बाद प्रशासन ने मुस्लिम प्रतिनिधियों के साथ बैठक की।



प्रशासन ने पहले चालीस पीर दरगाह के पास खाली जमीन देने की बात कही। इस जगह को समतल भी करा दिया गया था। लेकिन मुस्लिम समाज ने इस पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि यह जगह भोजशाला से काफी दूर है। समाज के लोगों ने वहां नमाज पढ़ने से इनकार कर दिया।



इसके बाद मामला फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने सरकार को भोजशाला के पास ही उपयुक्त जगह देने के निर्देश दिए। प्रशासन ने इसके बाद भोजशाला के पीछे खसरा नंबर 612 की जमीन तय की। यह जगह भोजशाला के दाहिनी ओर स्थित है।



पिछले दो शुक्रवार से मुस्लिम समाज इसी जमीन पर नमाज अदा कर रहा है। प्रशासन की ओर से यहां सुरक्षा व्यवस्था भी की जा रही है। दोनों बार नमाज शांतिपूर्वक संपन्न हुई है।



सुप्रीम कोर्ट के निर्देश क्या थे...

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पहले भी कई अहम निर्देश दिए थे। कोर्ट ने कहा था कि सरकार एक से तीन बजे वैकल्पिक स्थान दे। साथ ही भोजशाला परिसर में नमाज की अनुमति देने से इनकार किया गया।



कोर्ट ने साफ किया कि भोजशाला परिसर में पूजा पर कोई रोक नहीं रहेगी। सूर्योदय से सूर्यास्त तक मां वाग्देवी की नियमित पूजा जारी रहेगी। हिंदू पक्ष के हक वाले फैसले पर रोक से कोर्ट ने इनकार किया।



इसके अलावा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को भी निर्देश दिए गए। कोर्ट की अनुमति बिना भोजशाला के मूल ढांचे में बदलाव नहीं होगा। बेंच ने सभी पक्षों को नोटिस जारी करने के आदेश भी दिए थे। मामले की अंतिम सुनवाई के लिए 5 अगस्त 2026 की तारीख तय हुई थी।



14 अगस्त पर टिकीं नजरें

बुधवार की सुनवाई के एक दिन बाद यानी 14 अगस्त को शुक्रवार पड़ रहा है है। ऐसे में प्रशासन को नई तैयारी के लिए भी तैयार रहना होगा। यदि कोई नया आदेश आता है, तो नमाज की व्यवस्था बदल सकती है। इसलिए प्रशासन और दोनों पक्षों की नजर आज की सुनवाई पर टिकी है।



शुक्रवार की नमाज की आगे की व्यवस्था कोर्ट के निर्देशों पर निर्भर करेगी। खसरा नंबर 612 की व्यवस्था जारी रहेगी या नहीं, यह आज साफ होगा। धार जिले के प्रशासन ने सुरक्षा के इंतजाम पहले से मजबूत कर रखे हैं। दोनों समुदायों से शांति बनाए रखने की अपील भी की जा रही है।



भोजशाला विवाद अब सिर्फ धार जिले तक सीमित नहीं रहा। यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। सुप्रीम कोर्ट का आज का फैसला आगे की दिशा तय करेगा। इस पर हिंदू और मुस्लिम दोनों समाजों की गहरी नजर है।



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यह खबर देश की एक संवेदनशील और चर्चित न्यायिक प्रक्रिया की सही जानकारी देती है। भारतीय संविधान हर नागरिक को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार देता है, और यह मामला उसी अधिकार से जुड़ा है। खबर में दोनों पक्षों का पक्ष तटस्थ भाषा में रखा गया है, किसी एक समुदाय के प्रति पूर्वाग्रह नहीं दिखाया गया है।



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