भोजशाला मामले में नया मोड़, सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार
समझें क्या है पूरा मामला
- धार भोजशाला विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है।
- हाईकोर्ट ने इसे देवी सरस्वती मंदिर माना था।
- सुप्रीम कोर्ट याचिकाओं पर सुनवाई के लिए तैयार है।
- CJI ने तकनीकी कमियां सुधारने के निर्देश दिए हैं।
- हिंदू पक्ष ने कैविएट दाखिल कर दी है।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ के सामने यह मामला आया। मुस्लिम पक्ष की ओर से इस पर बेहद जल्द सुनवाई करने की गुहार लगाई गई।
मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील हुजेफा अहमदी और वकील निजाम पाशा पेश हुए। उन्होंने अदालत से मामले को तुरंत सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने वकीलों को याचिकाओं की तकनीकी कमियां फौरन दूर करने के निर्देश दिए।
हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष की ओर से कई याचिकाएं एक साथ दायर की गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भरोसा दिलाया कि कमियां दूर होते ही याचिकाएं जल्द सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की जाएंगी।
हिंदू पक्ष ने भी दाखिल की कैविएट
इस मामले में हिंदू पक्ष ने पहले ही सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल कर दी है। इसका मकसद है कि उनका पक्ष सुने बिना अदालत कोई एकतरफा आदेश न पारित करे।
क्या था हाईकोर्ट का फैसला ?
15 मई 2026 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाया था। कोर्ट ने विवादित भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर को साफ तौर पर देवी सरस्वती यानी वाग्देवी का मंदिर माना था।
इसी फैसले में कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI – Archaeological Survey of India) के अप्रैल 2003 के आदेश को भी रद्द कर दिया था। यह आदेश 21 साल पुराना था। इसके तहत हिंदुओं को मंगलवार और मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार के दिन पूजा-नमाज की इजाजत थी। कोर्ट ने परिसर के प्रबंधन की जिम्मेदारी केंद्र सरकार और एएसआई को सौंपी थी।
1034 ईस्वी के इतिहास का हवाला
हाईकोर्ट के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच ने एएसआई की वैज्ञानिक रिपोर्टों का हवाला दिया था।
कोर्ट ने कहा था कि पुरातात्विक साक्ष्यों से यह साफ है कि यह इमारत हिंदू मंदिर और संस्कृत अध्ययन केंद्र है। कोर्ट ने बताया था कि इस परिसर का निर्माण 1034 ईस्वी में राजा भोज ने कराया था। यह मस्जिद निर्माण के दावे से सदियों पुराना है। कोर्ट ने एएसआई को अपने कर्तव्यों में ढिलाई बरतने पर कड़ी फटकार भी लगाई थी।
मस्जिद के लिए जमीन और मूर्ति वापसी का सुझाव
हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया था कि वह धार जिले में ही मस्जिद निर्माण के लिए दूसरी उपयुक्त जमीन आवंटित करने पर विचार करे। इसके लिए वक्फ बोर्ड आवेदन कर सकता है।
कोर्ट ने केंद्र सरकार को यह भी सुझाव दिया था कि लंदन के म्यूजियम में रखी देवी सरस्वती की मूल वाग्देवी प्रतिमा को भारत वापस लाया जाए।
इसे फिर से भोजशाला परिसर में स्थापित करने पर भी विचार करने को कहा गया था। हाईकोर्ट के इसी फैसले के बाद अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है।
FAQ
- धार भोजशाला मामला क्या है?
यह मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित एक ऐतिहासिक परिसर से जुड़ा विवाद है। हाईकोर्ट ने इसे देवी सरस्वती का मंदिर माना था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। - भोजशाला पर सुप्रीम कोर्ट ने अभी क्या आदेश दिया है?
CJI सूर्यकांत ने मुस्लिम पक्ष की याचिकाओं में मौजूद तकनीकी कमियां दूर करने को कहा है। कमियां दूर होते ही याचिकाएं जल्द सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होंगी। - हाईकोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा था?
हाईकोर्ट ने भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर और संस्कृत अध्ययन केंद्र माना था। कोर्ट ने 2003 के पुराने आदेश को भी रद्द कर दिया था।
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