गंगाजल और गोमूत्र से हुआ भोजशाला का शुद्धिकरण, मां वाग्देवी की विधिवत पूजा

Sandeep Kumar | May 17, 2026, 16:25 IST
bhojshala
हिंदू समाज और भोज उत्सव समिति के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में भोजशाला पहुंचे। भोजशाला में प्रवेश करते ही पूरे परिसर को गो-मूत्र छिड़ककर शुद्ध किया गया।

News in Short

  • धार की भोजशाला में रविवार को विधिवत पूजा हुई।
  • परिसर को गोमूत्र और गंगाजल से शुद्ध किया गया।
  • गर्भगृह में अखंड ज्योत स्थापित की गई।
  • केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर ने ध्वजारोहण किया।
  • CM डॉ. मोहन यादव ने भोजशाला विकास का ऐलान किया।

News in Detail

धार की ऐतिहासिक भोजशाला में रविवार को मां वाग्देवी की पूजा-अर्चना हुई। ASI की नई गाइडलाइन के तहत परिसर को गोमूत्र और गंगाजल से शुद्ध किया गया। गर्भगृह में अखंड ज्योत स्थापित की गई। केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर ने ध्वजारोहण किया और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विकास का ऐलान किया।



भोजशाला में मां वाग्देवी की आराधना

धार की ऐतिहासिक भोजशाला (Bhojshala) में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की नई गाइडलाइन लागू होने के बाद रविवार को विधिवत पूजा की गई। श्रद्धालु सूर्योदय से ही मां वाग्देवी के चित्र लेकर पहुंचे। समिति ने सबसे पहले परिसर को गोमूत्र शुद्धि (Cow Urine Purification) और गंगाजल से शुद्ध किया। इसके बाद गर्भगृह को रंगोली और फूलों से सजाया गया।



गर्भगृह में अखंड ज्योत की स्थापना

गर्भगृह में अखंड ज्योत (Eternal Flame) स्थापित की गई। सूर्योदय से ही मंत्रोच्चार और देवी अनुष्ठान (Devi Rituals) आरंभ हो गए। मंदिर परिसर में श्रद्धालु अपने परिवार के साथ शामिल हुए। अखंड ज्योत ने गर्भगृह में दिव्यता और आध्यात्मिक वातावरण बनाया।



भोजशाला में मंत्री ने किया ध्वजारोहण

आरती के बाद केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर (Savita Thakur) ने भोजशाला में ध्वजारोहण किया। सुरक्षा कारणों से उन्होंने गुंबद तक नहीं पहुंचकर सीढ़ियों पर लगे दरवाजे पर ध्वज फहराया। उन्होंने कहा कि किसी भी मंदिर के शिखर पर ध्वज लगाना महत्वपूर्ण है।



भोजशाला का भव्य स्वरूप

मुख्यमंत्री मोहन यादव (CM Mohan Yadav) ने कहा कि भोजशाला को पुराने वैभव के साथ संवारा जाएगा। इसे और बेहतर तरीके से विकसित किया जाएगा। अब श्रद्धालु कभी भी दर्शन कर सकते हैं। समारोह ने स्थानीय संस्कृति और पर्यटन को भी बढ़ावा दिया।



ASI की नई गाइडलाइन

ASI की नई गाइडलाइन (ASI Guidelines) के अनुसार ऐतिहासिक स्थलों पर पूजा विधिपूर्वक की जा सकती है। इससे संरक्षण और धार्मिक गतिविधियों में संतुलन बना रहता है। गाइडलाइन के तहत सुरक्षा उपाय लागू किए गए। धार्मिक उत्सवों के आयोजन में अनुशासन सुनिश्चित किया गया।



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