भोजशाला में अब पूरे साल पूजा, ASI ने जारी किया नया आदेश, नमाज का पुराना आदेश रद्द
Sanjay Gupta | May 16, 2026, 21:07 IST
Bhojshala
धार भोजशाला पर अब ASI ने अहम आदेश जारी कर दिया। इसके तहत अब परिसर में नमाज को प्रतिबंधित कर दिया गया है। हालांकि, पूजा गतिविधि किस तरह होगी और प्रवेश का समय क्या होगा यह एएसआई, जिला प्रशासन से चर्चा कर तय करेगा।
Indore: धार भोजशाला मां वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर है। हाईकोर्ट इंदौर द्वारा यह फैसला अहम था। अब इसी 242 पेज के आदेश और इसमें दिए गए निर्देशानुसार एएसआई ने भी अहम आदेश जारी कर दिया है। साल 2003 के पुराने आदेश को रद्द कर दिया। पूजा की गतिविधि को हर समय के लिए मान्य किया गया। अब नमाज नहीं होगी।
आदेश में अब
अभी तक एएसआई के आदेश में इस परिसर को भोजशाला व कमाल मौला मस्जिद परिसर कहा जाता था। लेकिन अब नए आदेश में इसे राजा भोज द्वारा स्थापित भोजशाला व संस्कृत पाठशाला कहा गया। यानी इसे अब कमाल मौला मस्जिद नहीं माना गाया है।
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इसके साथ ही आदेश में लिखा है कि भोजशाला संस्कृत भाषा, साहित्यव के अध्ययन, अनुसंधान का केंद्र रहा है। साथ ही
मां वाग्देवी/ सरस्वती पूजा के लिए समर्पित एक मंदिर था। इसलिए हिंदू समुदाय को देवी सरस्वती के पूजा की प्रथा के संबंध में भोजशाला परिसर में अप्रतिबंधित पहुंच रहेगी।
इसके साथ सबसे अहम रहा कि एएसआई (आर्कियोलाजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ) ने अपने आदेश में पूर्व के सभी आदेश निरस्त कर दिए। खासकर 7 अप्रैल 2003 का आदेश। इसी आदेश के तहत ही परिसर में हिंदू पूजा को लेकर कुछ प्रतिबंध लगे थे और मुस्लिम पक्ष को नमाज के अधिकार भी मिले थे। यह आदेश हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था। इसके कारण हिंदू समुदाय के अधिकार प्रभावित हो रहे थे। अब एएसआई ने भी इस आदेश को रद्द कर दिया है।
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आदेश में अब भोजशाला व संस्कृत पाठशाला लिखा
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आदेश में यह लिखा गया है
मां वाग्देवी/ सरस्वती पूजा के लिए समर्पित एक मंदिर था। इसलिए हिंदू समुदाय को देवी सरस्वती के पूजा की प्रथा के संबंध में भोजशाला परिसर में अप्रतिबंधित पहुंच रहेगी।
- साल 1958 आदेश के तहत यह एएसआई संरक्षित स्थल है। इसलिए यहां आंगतुक/हिंदू श्रद्धालुओं के प्रवेश का समय पुरातत्व विभाग द्वारा जिला प्रशासन से सुझाव लेकर तय किया जाएगा।
- हिंदू समुदाय द्वारा शिक्षा व पूजा के लिए गतिविधियों को पुरात्तव विभाग द्वारा प्रशासन से चर्चा के बाद किया जाएगा। इसमें 1958 एक्ट के तहत स्थल के संरक्षण और सुरक्षा को तय किया जाएगा।
साल 2003 का आदेश निरस्त किया
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