धार भोजशाला में ऐतिहासिक जश्न: हाईकोर्ट के फैसले के बाद 365 दिन पूजन का मिला अधिकार
समझें पूरा मामला...
- भोजशाला में 365 दिन पूजन का अधिकार मिला।
- महासत्याग्रह में हजारों श्रद्धालु जुटे।
- 24 घंटे अखंड ज्योति और हवन-पूजन हुआ।
- लंदन से मूल प्रतिमा वापसी की मांग उठी।
- दीपावली जैसा माहौल रहा भोजशाला परिसर में।
धार की ऐतिहासिक भोजशाला में हाईकोर्ट और ASI के फैसले ने इतिहास रच दिया। हिंदू समाज को 365 दिन पूजन का अधिकार मिलते ही भोजशाला परिसर उत्सव में डूब गया। महासत्याग्रह और महाविजय महोत्सव में सैकड़ों श्रद्धालु एकत्र हुए। मां वाग्देवी की महाआरती, हवन और अखंड ज्योति के साथ यह दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया।
ऐतिहासिक फैसले से बदला इतिहास
धार भोजशाला (Bhojshala) में हाईकोर्ट और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के फैसले ने नया इतिहास रचा। हिंदू समाज को वर्ष के 365 दिन पूजन का अधिकार (365 din pujan adhikar) मिला। इस ऐतिहासिक निर्णय के बाद भोजशाला परिसर में भारी उत्साह और आनंद का माहौल बना। श्रद्धालुओं के लिए यह क्षण अत्यंत भावनात्मक और ऐतिहासिक था। मां वाग्देवी की भूमि पर यह विजय पूरे हिंदू समाज की आस्था की जीत थी।
महासत्याग्रह का विशेष महत्व
भोज उत्सव समिति के गोपाल शर्मा ने बताया कि प्रत्येक मंगलवार को भोजशाला में सत्याग्रह होता है। यह पहला मंगलवार था जब 365 दिन पूजन का आदेश लागू हुआ था। इसीलिए इस विशेष अवसर को 'महासत्याग्रह' (Mahasatyagrah) का नाम दिया गया। श्रद्धालु अपने घरों से पटाखे लेकर भोजशाला परिसर पहुंचे। अखंड ज्योति मंदिर पर आतिशबाजी कर विजय महोत्सव (Vijay Mahotsav) मनाया गया।
महाआरती और दीपावली सा माहौल
मंगलवार की सुबह से ही भोजशाला में भक्ति और आस्था का अद्भुत दृश्य था। हवन और महाआरती (Maha Aarti) से पूरा परिसर मंत्रमुग्ध हो उठा। भजन संध्या में बड़ी संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित हुए।
परिसर में जयकारों के बीच बसंत पंचमी और दीपावली जैसा उत्सव नजर आया। मां वाग्देवी की आराधना में डूबे लोगों के चेहरे पर अपार प्रसन्नता और श्रद्धा थी।
अखंड ज्योति की स्थापना
रविवार को हिंदू समाज द्वारा मां वाग्देवी की प्रतिकृति स्थापना की गई थी। इतिहास में पहली बार पूरे 24 घंटे मां का स्वरूप भोजशाला में विराजमान रहा।
अखंड ज्योति (Akhand Jyoti) प्रज्वलित रहने से परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ। पंडितों ने मंत्रोच्चार के साथ पूजन की शुरुआत की। अब प्रतिदिन यहां मां वाग्देवी का पूजन किया जाएगा।
लंदन से मूल प्रतिमा वापसी की मांग
धार भोजशाला पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की एक प्रमुख मांग सामने आई। वे चाहते हैं कि मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा (Mool Pratima) लंदन से वापस लाई जाए। श्रद्धालुओं का कहना है कि मां की आत्मा यहां स्थापित हो चुकी है। अब मूल स्वरूप को भी यहां स्थापित किया जाना चाहिए। यह मांग अब एक जन-आंदोलन का रूप लेती नजर आ रही है।
सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन की तैयारी
आयोजन के दौरान पुलिस-प्रशासन की व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई। परिसर में शांति और अनुशासन बनाए रखने के लिए चाक-चौबंद इंतजाम किए गए।
भारी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति के बावजूद सब कुछ सुव्यवस्थित रहा। प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि आयोजन सुरक्षित और शांतिपूर्ण रहे। श्रद्धालुओं ने भी अनुशासन का पालन करते हुए उत्सव मनाया।
मां वाग्देवी और भोजशाला का इतिहास
भोजशाला (Bhojshala Temple Dhar) राजा भोज द्वारा निर्मित एक प्राचीन संरचना है। यह मां वाग्देवी (Maa Vagdevi) अर्थात सरस्वती की उपासना का पवित्र स्थल है।
सदियों से यह स्थल हिंदू आस्था और संस्कृति का केंद्र रहा है। अब हाईकोर्ट के फैसले ने इसे हिंदू समाज को पूर्ण रूप से समर्पित कर दिया। यह निर्णय आने वाली पीढ़ियों के लिए एक ऐतिहासिक धरोहर है।
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