भोजशाला वक्फ संपत्ति नहीं, यहां प्लेसेस ऑफ वरशिप एक्ट नहीं होता लागू, हाईकोर्ट में हिंदू फ्रंट ने रखे तर्क

Sanjay Gupta | Apr 08, 2026, 23:14 IST
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Indore: इंदौर हाईकोर्ट में भोजशाला धार को लेकर चल रही अंतिम सुनवाई बुधवार को भी जारी रही। दो घंटे में हिंदू पक्ष की ओर से कई अहम तर्क दिए गए। इसमें वक्फ एक्ट को भी लेकर कहा गया कि भोजशाला वक्फ संपत्ति नहीं है।

धार भोजशाला को लेकर लगी विविध याचिकाओं पर तीसरे दिन भी सुनवाई जारी रही। दो घंटे तक हिंदू फ्रंट के वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन द्वारा तर्क रखे गए। इसमें मुख्य तौर पर वक्फ संपत्ति एक्ट को लेकर बहस हुई और बताया गया कि यह एक्ट भोजशाला पर लागू नहीं होता है और यह वक्फ संपत्ति नहीं है।



इस तरह रखे गए तर्क

हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जैन ने कहा कि यदि मंदिर में वर्तमान में भौतिक रूप से मूर्ति नहीं है तो भी मंदिर ही रहेगा। मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी के जवाब में ही है, भोजशाला के मंदिर होने के कई प्रमाण मौजूद है। सोसाइटी ने अपने जवाब में यह माना है कि भोजशाला संस्कृत विद्यालय रहा है। मूर्ति के अपने अधिकार रहते हैं, श्री राम मंदिर निर्णय में भी मूर्ति को अधिकार मिले हैं।



प्राण प्रतिष्ठा से ही मंदिर होता है

तर्क दिए गए कि हिंदू धर्म में प्राण प्रतिष्ठा होने पर वह स्थान हमेशा मंदिर ही कहलाता है। भगवान के स्थल के चरित्र को बदला नहीं जा सकता। आक्रमण,अतिक्रमण और आतंक से यदि मंदिर के स्थान को ध्वस्त करने का प्रयास भी किया गया तो भी वह मंदिर ही रहता है। तर्कों में श्री राम जन्मभूमि और श्री कृष्ण जन्म भूमि के फैसलों के कई उदाहरण रखे गए।



प्लेसेस ऑफ वरशिप एक्ट भी लागू नहीं

वक्फ एक्ट 2025 के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए अधिवक्ता जैन ने बताया कि भोजशाला वक़्फ़ संपत्ति हो ही नहीं सकती। क्षेत्र 3D के अंतर्गत यह एक्ट भी भोजशाला पर लागू नहीं होता है। साथ ही प्लेसेस ऑफ़ वरशिप एक्ट 1991 को लेकर भ्रम भ्रांतियां फैलाई जा रही है। धारा 4(3)(1 )के अनुसार यह एक्ट भी भोजशाला पर लागू नहीं होता है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के संरक्षित स्मारकों पर यह एक्ट लागू नहीं होता है। यह परमार कालीन स्मारक है और यहां राजा भोज राज करते थे। इस जवाब में कई संस्कृत शिलालेख मिलने का भी उल्लेख है।



मंदिर को मस्जिद में बदलने के प्रयास हुए

तर्क में कहा गया कि दस्तावेजों और प्रमाणों से साफ है कि मुस्लिम आक्रांताओं ने मंदिर को ध्वस्त करके मस्जिद में परिवर्तित करने का असफल प्रयास किया। हमें भोजशाला में पूजा का वैधानिक अधिकार प्राप्त है। भोजशाला में मां वाग्देवी पवित्र रूप से विराजमान है। हम केवल आस्था के आधार पर बात नहीं कर रहे हैं,हम रिसर्च के आधार पर अपने तर्क प्रस्तुत कर रहे हैं।



सुनवाई जारी रहेगी

अंतिम सुवाई 9 अप्रैल गुरुवार को भी दोपहर 2:30 बजे जारी रहेगी। इसमें मुख्य रूप से अब पुरात्तव सर्वे रिपोर्ट पर बात रखी जाएगी। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता विनय जोशी,पार्थ यादव,मनी मुंजाल,सौरभ सिंह और मुख्य याचिकाकर्ता आशीष गोयल उपस्थित रहे।



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