भोजशाला विवाद में जैन समाज की एंट्री, यक्षिणी अंबिका मूर्ति पर दावा

Sandeep Kumar | Mar 21, 2026, 19:36 IST
bhoolshala
Dhar: मध्य प्रदेश के धार जिले की भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर अब कानूनी लड़ाई का केंद्र बन चुका है। जैन समाज ने याचिका दायर कर दावा किया है कि यहां कभी जैन मंदिर और गुरुकुल था।

News in Short

  • भोजशाला परिसर विवाद में जैन समाज ने पूजा अधिकार के लिए याचिका दायर की।
  • याचिकाकर्ता का दावा है कि परिसर में कभी जैन मंदिर और गुरुकुल था।
  • ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मूर्ति को लेकर हिंदू और जैन पक्षों के दावे हैं।
  • हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य से जवाब मांगा और याचिका की वैधता पर सवाल उठाया।
  • अगर याचिका स्वीकार होती है, तो पूजा शेड्यूल में बदलाव और सुरक्षा व्यवस्था की चुनौती हो सकती है।

News in Detail

मध्यप्रदेश के धार जिले स्थित भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर विवाद का केंद्र बना है। इंदौर हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई की। केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया। याचिका में दावा किया गया है कि यहां कभी मध्यकालीन जैन मंदिर और गुरुकुल था।



दिल्ली के सामाजिक कार्यकर्ता सालेख चंद जैन ने यह याचिका दायर की है। याचिका ने वर्षों पुराने दावों को नई दिशा दी है। याचिकाकर्ता का कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 25, 26 और 29 के तहत जैन समुदाय को पूजा का अधिकार मिलना चाहिए।



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क्या है जैन समाज का दावा

इस मामले में सबसे चौंकाने वाला दावा ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मूर्ति को लेकर है। हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती की प्रतिमा मानता है। जैन याचिकाकर्ता का दावा है कि यह मूर्ति जैन यक्षिणी अंबिका की है।



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क्या है हाईकोर्ट की टिप्पणी?

जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस राजेश कुमार गुप्ता की बेंच ने सुनवाई की। बेंच ने सभी प्रतिवादियों को जवाब और आपत्ति दाखिल करने का समय दिया। सरकारी वकील ने याचिका की पोषणीयता पर सवाल उठाए। न्यायालय ने याचिका की वैधता पर जवाब मांगा है। सभी पक्षों को अगली सुनवाई तक स्थिति स्पष्ट करनी होगी।



यदि याचिका स्वीकार होती है, तो पूजा-अर्चना के शेड्यूल में बदलाव हो सकते हैं। ASI को जैन मंदिर के दावों की जांच करनी पड़ सकती है। प्रशासन के लिए सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी।



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अभी क्या हैं पूजा के नियम?

भोजशाला परिसर एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारक है। 2003 की व्यवस्था के अनुसार, मंगलवार को हिंदू पूजा करते हैं। शुक्रवार को मुसलमान नमाज अदा करते हैं। हिंदू पक्ष इसे सरस्वती मंदिर मानकर अधिकार मांग रहा है। मुस्लिम पक्ष इसे मस्जिद बताता है। अब जैन समाज की एंट्री ने कानूनी लड़ाई को नया मोड़ दिया है।



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