धार भोजशाला विवाद: ASI रिपोर्ट पर आज हाईकोर्ट में बहस
Sourabh Bhatnagar | Mar 16, 2026, 10:08 IST
dhar bhojshala case
भोजशाला विवाद (Bhojshala Dispute) से जुड़े मामले में सोमवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच (MP High Court Indore Bench) में अहम सुनवाई होने जा रही है।
यह सुनवाई भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई सर्वे रिपोर्ट (ASI Survey Report) को लेकर हो रही है।
पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सभी पक्षों को निर्देश दिया था कि वे एएसआई (bhojshala asi survey report) द्वारा की गई वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट पर अपनी लिखित आपत्तियां और सुझाव दाखिल करें। इन्हीं जवाबों के आधार पर कोर्ट आगे की कार्रवाई तय करेगा।
इस मामले को लंबे समय से पूजा के अधिकार बनाम नमाज की अनुमति (Right to Worship vs Namaz Permission) के संवैधानिक विवाद के रूप में देखा जा रहा है।
23 फरवरी को हुई पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने सभी याचिकाकर्ताओं और प्रतिवादियों को दो सप्ताह के भीतर एएसआई रिपोर्ट (ASI Report) पर अपने सुझाव और आपत्तियां देने का निर्देश दिया था।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि रिपोर्ट पहले ही खोली जा चुकी है और उसकी प्रतियां सभी पक्षों को उपलब्ध करा दी गई हैं। इसलिए अब उसे दोबारा कोर्ट में अनसील करने की जरूरत नहीं है।
अब सभी पक्षों के जवाब आने के बाद 16 मार्च को इस मामले की सुनवाई (Bhojshala Case Hearing) तय की गई है।
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से अधिवक्ता विनय जोशी ने कहा कि कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए दो सप्ताह के भीतर एएसआई रिपोर्ट पर अपनी आपत्तियां और सुझाव दाखिल किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि रिपोर्ट पर सभी पक्षों की प्रतिक्रियाओं के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।
इस मामले में 22 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच को तीन सप्ताह के भीतर सुनवाई आगे बढ़ाने के निर्देश दिए थे।
दरअसल, एएसआई सर्वे (Bhojshala ASI report) के बाद की कानूनी प्रक्रिया कुछ समय के लिए रुकी हुई थी। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद यह रोक हटाई गई और अब मामले की सुनवाई आगे बढ़ रही है।
भोजशाला विवाद से जुड़ा मामला पहले मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ (Indore Bench) में चल रहा था। बाद में इसे जबलपुर की प्रिंसिपल बेंच (Jabalpur Principal Bench) में ट्रांसफर कर दिया गया।
हालांकि, 18 फरवरी को चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने सुनवाई करते हुए मामले को फिर से मध्यप्रदेश हाईकोर्ट इंदौर बेंच को सौंप दिया। इसके बाद अब इंदौर बेंच में इस मामले की सुनवाई जारी है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने 22 मार्च 2024 से भोजशाला परिसर और उसके आसपास 50 मीटर क्षेत्र में विस्तृत जांच की।
यह सर्वे लगभग 98 से 100 दिनों तक चला। इस दौरान टीम ने सीमित उत्खनन, संरचनात्मक जांच और ऐतिहासिक दस्तावेजों का अध्ययन किया।
इस टीम में कई विशेषज्ञ शामिल थे:
एएसआई की रिपोर्ट में 12वीं से 20वीं सदी तक के कई ऐतिहासिक प्रमाण मिलने की बात सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार परिसर में विभिन्न भाषाओं और लिपियों के शिलालेख मिले हैं।
वहीं 12वीं से 16वीं सदी के संस्कृत और प्राकृत शिलालेखों में पारिजातमंजरी-नाटिका और अवनिकर्मसातम जैसे उल्लेख पाए गए हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ पत्थरों पर पुरानी लिखावट को मिटाकर दोबारा इस्तेमाल किए जाने के संकेत मिले हैं।
भोजशाला विवाद (Bhojshala Dispute) मध्यप्रदेश के धार शहर में स्थित एक ऐतिहासिक परिसर से जुड़ा मामला है।
एएसआई की रिपोर्ट (Dhar Bhojshala case) में यह भी उल्लेख किया गया है कि भोजशाला परिसर अलग-अलग कालखंडों में धार्मिक, शैक्षणिक और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र रहा है।
ब्रिटिश काल से लेकर वर्तमान समय तक इस स्थल के संरक्षण के प्रयासों का भी उल्लेख रिपोर्ट में किया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थान मध्यकालीन भारत के सांस्कृतिक इतिहास को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
भोजशाला पर ASI रिपोर्ट में लिखा पूर्व संरचना मंदिर की, जल्दबाजी में तोड़कर बनी मस्जिद
भोजशाला पर ASI की रिपोर्ट तो पहले ही खुल चुकी, हाईकोर्ट चौंका, दो सप्ताह में आपत्ति-सुझाव मांगे
भोजशाला मामला : जबलपुर मुख्य पीठ से दोबारा इंदौर बेंच भेजा केस, 23 फरवरी को अगली सुनवाई
भोजशाला केस इंदौर बेंच से जबलपुर हाईकोर्ट शिफ्ट, चीफ जस्टिस करेंगे सुनवाई
पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सभी पक्षों को निर्देश दिया था कि वे एएसआई (bhojshala asi survey report) द्वारा की गई वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट पर अपनी लिखित आपत्तियां और सुझाव दाखिल करें। इन्हीं जवाबों के आधार पर कोर्ट आगे की कार्रवाई तय करेगा।
इस मामले को लंबे समय से पूजा के अधिकार बनाम नमाज की अनुमति (Right to Worship vs Namaz Permission) के संवैधानिक विवाद के रूप में देखा जा रहा है।
एएसआई सर्वे रिपोर्ट पर आज अहम बहस
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि रिपोर्ट पहले ही खोली जा चुकी है और उसकी प्रतियां सभी पक्षों को उपलब्ध करा दी गई हैं। इसलिए अब उसे दोबारा कोर्ट में अनसील करने की जरूरत नहीं है।
अब सभी पक्षों के जवाब आने के बाद 16 मार्च को इस मामले की सुनवाई (Bhojshala Case Hearing) तय की गई है।
ऐसे तय होगी आगे की प्रक्रिया
उन्होंने बताया कि रिपोर्ट पर सभी पक्षों की प्रतिक्रियाओं के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बढ़ी प्रक्रिया
दरअसल, एएसआई सर्वे (Bhojshala ASI report) के बाद की कानूनी प्रक्रिया कुछ समय के लिए रुकी हुई थी। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद यह रोक हटाई गई और अब मामले की सुनवाई आगे बढ़ रही है।
केस ट्रांसफर की प्रक्रिया भी हुई थी
हालांकि, 18 फरवरी को चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने सुनवाई करते हुए मामले को फिर से मध्यप्रदेश हाईकोर्ट इंदौर बेंच को सौंप दिया। इसके बाद अब इंदौर बेंच में इस मामले की सुनवाई जारी है।
ASI ने करीब 100 दिन किया वैज्ञानिक सर्वे
यह सर्वे लगभग 98 से 100 दिनों तक चला। इस दौरान टीम ने सीमित उत्खनन, संरचनात्मक जांच और ऐतिहासिक दस्तावेजों का अध्ययन किया।
इस टीम में कई विशेषज्ञ शामिल थे:
- पुरातत्वविद्
- अभिलेखविद्
- रसायन विशेषज्ञ
- संरचना विशेषज्ञ
ASI रिपोर्ट में क्या मिला
रिपोर्ट के अनुसार परिसर में विभिन्न भाषाओं और लिपियों के शिलालेख मिले हैं।
प्रमुख खोजें
- संस्कृत और प्राकृत भाषा के शिलालेख
- नागरी लिपि के अभिलेख
- अरबी और फारसी में लिखे शिलालेख
- धार्मिक और शैक्षणिक गतिविधियों के संकेत
वहीं 12वीं से 16वीं सदी के संस्कृत और प्राकृत शिलालेखों में पारिजातमंजरी-नाटिका और अवनिकर्मसातम जैसे उल्लेख पाए गए हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ पत्थरों पर पुरानी लिखावट को मिटाकर दोबारा इस्तेमाल किए जाने के संकेत मिले हैं।
धार भोजशाला विवाद क्या है?
- हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का मंदिर मानता है
- मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद मानता है
- दोनों समुदाय यहां धार्मिक अधिकारों की मांग करते रहे हैं
- इसी कारण यह मामला अदालत में विचाराधीन है
स्थल का ऐतिहासिक महत्व
ब्रिटिश काल से लेकर वर्तमान समय तक इस स्थल के संरक्षण के प्रयासों का भी उल्लेख रिपोर्ट में किया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थान मध्यकालीन भारत के सांस्कृतिक इतिहास को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
ये खबरें भी पढ़ें...
भोजशाला पर ASI की रिपोर्ट तो पहले ही खुल चुकी, हाईकोर्ट चौंका, दो सप्ताह में आपत्ति-सुझाव मांगे
भोजशाला मामला : जबलपुर मुख्य पीठ से दोबारा इंदौर बेंच भेजा केस, 23 फरवरी को अगली सुनवाई
भोजशाला केस इंदौर बेंच से जबलपुर हाईकोर्ट शिफ्ट, चीफ जस्टिस करेंगे सुनवाई
मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती
By VINAY VERMA
नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता
By Sanjay Gupta, Sandeep Kumar
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
By Neel Tiwari
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj