भोजशाला मामला : जबलपुर मुख्य पीठ से दोबारा इंदौर बेंच भेजा केस, 23 फरवरी को अगली सुनवाई

धार भोजशाला मामले की सुनवाई एकबार फिर अब 23 फरवरी को इंदौर हाईकोर्ट में होगी। जबलपुर मुख्य पीठ ने क्षेत्राधिकार के चलते केस ट्रांसफर कर दिया है।

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Neel Tiwari
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Bhojshala case Case again sent to Indore bench from Jabalpur main bench

Photograph: (the sootr)

News in short

  • सुप्रीम कोर्ट के 28 जनवरी के आदेश के बाद मामला जबलपुर मुख्य पीठ में लिस्ट हुआ था।
  • चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की डिविजन बेंच में सुनवाई हुई।
  • कोर्ट ने माना कि मामला क्षेत्राधिकार के अनुसार इंदौर बेंच में ही सुना जाना चाहिए।
  • सभी याचिकाएं और दस्तावेज इंदौर ट्रांसफर करने के निर्देश।
  • हाईकोर्ट इंदौर बेंच में अगली सुनवाई 23 फरवरी 2026 को निर्धारित।

JABALPUR/INDORE. धार स्थित भोजशाला विवाद में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। चीफ जस्टिस की डिविजन बेंच में सुनवाई के बाद मामला फिर से इंदौर बेंच ट्रांसफर कर दिया गया है। अब 23 फरवरी 2026 को इंदौर हाईकोर्ट में इस बहुचर्चित प्रकरण पर सुनवाई होगी।

News in detail 

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बदला घटनाक्रम

धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर 28 जनवरी को Supreme Court of India ने अहम निर्देश जारी किए थे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मामले की सुनवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच या वरिष्ठतम न्यायाधीश की बेंच द्वारा तीन सप्ताह में की जाए। इसी आदेश के अनुपालन में यह मामला पहले इंदौर बेंच में 16 फरवरी को सूचीबद्ध हुआ और बाद में प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत मुख्य पीठ जबलपुर भेजा गया।

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MP हाईकोर्ट की मुख्य पीठ में हुई सुनवाई

आज बुधवार 18 फरवरी को Madhya Pradesh High Court की मुख्य पीठ जबलपुर में इस मामले की सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिविजन बेंच के समक्ष तीन जनहित याचिकाओं और एक रिट अपील को एक साथ सुना जाना था। राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप ही मामला जबलपुर सूचीबद्ध हुआ है।

ASI की सीलबंद रिपोर्ट पर क्या हुआ?

सुनवाई के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा 98 दिनों तक किए गए वैज्ञानिक सर्वे की रिपोर्ट हाईकोर्ट में सीलबंद लिफाफे में जमा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, यह रिपोर्ट खुली अदालत में अनसील कर सभी पक्षकारों को उपलब्ध कराई जानी है, ताकि वे अपनी आपत्तियां, सुझाव और सिफारिशें दो सप्ताह के भीतर प्रस्तुत कर सकें। हालांकि, इस प्रक्रिया से पहले ही क्षेत्राधिकार का सवाल प्रमुख हो गया।

क्षेत्राधिकार बना ट्रांसफर की वजह

चीफ जस्टिस की डिविजन बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि चूंकि भोजशाला धार जिले में स्थित है और धार इंदौर बेंच के क्षेत्राधिकार में आता है, इसलिए इस प्रकरण की सुनवाई इंदौर हाईकोर्ट की बड़ी बेंच द्वारा की जानी अधिक उपयुक्त होगी। इसी आधार पर अदालत ने सभी लंबित याचिकाओं को इंदौर बेंच ट्रांसफर करने का आदेश पारित किया। कोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिए हैं कि इस मामले से जुड़े सभी दस्तावेज तत्काल इंदौर कोर्ट को भेज दिये जाए।

23 फरवरी को इंदौर में अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देशित किया है कि मामले से संबंधित सभी दस्तावेज तत्काल इंदौर बेंच को भेजे जाएं। अब यह संवेदनशील और बहुचर्चित मामला 23 फरवरी 2026 को इंदौर हाईकोर्ट में सुना जाएगा। संभावना है कि वहां सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार एएसआई की रिपोर्ट को अनसील करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

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क्या है पूरा विवाद?

उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट में याचिका क्रमांक 10497/2022 में भोजशाला के वैज्ञानिक सर्वे की मांग की गई थी। 11 मार्च 2024 को हाईकोर्ट ने सर्वे के आदेश दिए थे। इसके बाद एएसआई ने विस्तृत सर्वे कर रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश की। इस बीच मौलाना कमालउद्दीन वेलफेयर सोसायटी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अंतिम निर्णय तक भोजशाला सरस्वती मंदिर-सह-मौलाना कमल मौला मस्जिद के स्वरूप में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा और 7 अप्रैल 2003 के एएसआई आदेश का पालन जारी रहेगा।

अब निगाहें 23 फरवरी की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि एएसआई की रिपोर्ट खुलने के बाद इस ऐतिहासिक-धार्मिक विवाद की दिशा किस ओर बढ़ती है।

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