धार भोजशाला पर सुप्रीम कोर्ट का अहम आदेश- ASI की रिपोर्ट ओपन हो, हाईकोर्ट करे सुनवाई

धार भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट ने ASI की रिपोर्ट सार्वजनिक करने का निर्देश दिया है। पक्षकारों को दो सप्ताह का समय दिया जाएगा।

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Sanjay Gupta
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News In Short

  • सुप्रीम कोर्ट ने धार भोजशाला के ASI द्वारा किए गए सर्वे की रिपोर्ट को खोलने का आदेश दिया।
  • हाईकोर्ट को रिपोर्ट को अनसील कर सभी पक्षों को उसकी प्रतियां देने के लिए कहा गया।
  • सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि रिपोर्ट के आधार पर दो सप्ताह में पक्षों को आपत्तियां और सुझाव प्रस्तुत करने का समय मिले।
  • उच्च न्यायालय को मामले की अंतिम सुनवाई के लिए तीन सप्ताह में सुनवाई करनी होगी।
  • सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उन्होंने मामले की मेरिट पर कोई राय नहीं दी है और उच्च न्यायालय को निर्णय लेने का अधिकार दिया है।

News In Detail 

धार भोजशाला को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम आदेश दिया है। हाईकोर्ट इंदौर द्वारा भोजशाला के भारतीय पुरात्तव सर्वेक्षण (ASI) सर्वे के आदेश हुए थे। इसी के खिलाफ मौलाना कमालउद्दीन वेलफेयर सोसायटी ने हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस व अन्य को पक्षकार बनाकर केस लगाया था। 

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इस आधार पर लगाई गई थी याचिका

हाईकोर्ट में भोजशाला के सर्वेक्षण को लेकर याचिका 10497/2022 लगी थी। इस पर हाईकोर्ट ने 11 मार्च 2024 को वैज्ञानिक सर्वेक्षण के आदेश दिए। इस आदेश के तहत सर्वे भी हुआ और रिपोर्ट बंद लिफाफे में पेश हुई। 

इसी बीच मौलाना कमालउद्दीन वेलफेयर सोसायटी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई। इसमें सामने आया कि सर्वेक्षण तो भोजशाला का हो गया है। ऐसे में अंतरिम आदेश हुए कि अभी रिपोर्ट को नहीं खोला जाए। हाईकोर्ट आगे सुनवाई नहीं करे। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निराकरण कर अहम आदेश जारी कर दिए हैं।

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सीजेआई की तीन सदस्यीय बेंच के आदेश

यह आदेश चीफ जस्टिस आफ इंदिया सूर्यकांत के साथ जस्टिस जोयमाला बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने जारी किए हैं। 

हाईकोर्ट चीफ जस्टिस मध्यप्रदेश की अध्यक्षता वाली बेंच इसकी सुनवाई करे। फिर पीठ के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश की बेंच द्वारा तीन सप्ताह की अवधि में सुनवाई की जाए। 

  •  डिवीजन बेंच से अनुरोध है कि वह खुली अदालत में रिपोर्ट को अनसील करे। दोनों पक्षों को उसकी प्रतियां उपलब्ध कराए। 
  •   इसके बाद, पक्षों को अपनी-अपनी आपत्तियां, राय, सुझाव और या सिफारिशें प्रस्तुत करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया जा सकता है।
  •   इसके बाद उच्च न्यायालय की खंडपीठ अंतिम सुनवाई के लिए मामले को ले सकती है। अंतिम सुनवाई के समय पक्षों के सभी निवेदनों पर विधिवत विचार किया जा सकता है।
  • रिट याचिका पर अंतिम निर्णय होने तक, भोजशाला सरस्वती मंदिर-सह-मौलाना कमल मौला मस्जिद के स्वरूप में परिवर्तन के संबंध में पक्षकार यथास्थिति बनाए रखेंगे। 
  •  पक्षकार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक द्वारा दिनांक 07.04.2003 को जारी आदेश का पालन और कार्यान्वयन करते रहेंगा।
  •  यह स्पष्ट किया जाता है कि हमने मामले की मेरिट पर कोई राय व्यक्त नहीं की है। पक्षों की ओर से उठाए गए सभी तर्क उच्च न्यायालय द्वारा उठाए जाने और विचार किए जाने के लिए खुले रखे गए हैं।

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यह हमारी जीत है

भोजशाला के याचिकाकर्ता आशीष गोयल धार ने बताया कि हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने प्रकरण में पैरवी की। हाईकोर्ट में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस एवं याचिका कर्ता की ओर से पैरवी अधिवक्ता विनय जोशी इंदौर की तरफ से की जाएगी।

याचिकाकर्ता आशीष गोयल धार ने बताया कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के इन निर्देश के बाद भोजशाला में जो एएसआई द्वारा 98 दिन तक का सर्वे हुआ है। उसके आधार पर हाईकोर्ट सुनवाई कर भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करेगी।

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