धार भोजशाला में याचिका लगाने वाले को पुलिस ने उठाया, हैबियस कार्पस लगी तो इंदौर हाईकोर्ट के बाहर छोड़ गए

सुप्रीम कोर्ट और इंदौर हाईकोर्ट ने भोजशाला में बसंत पंचमी के शांति से आयोजन के आदेश दिए। इस बीच, याचिका दायर करने वाले जेबरान अंसारी ने आरोप लगाया कि पुलिस वाले उन्हें उठाकर ले गए थे।

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Sanjay Gupta
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INDORE. धार भोजशाला को लेकर सुप्रीम कोर्ट से लेकर इंदौर हाईकोर्ट ने बसंत पंचमी पर शांति से आयोजन को लेकर गुरुवार को अहम आदेश जारी कर दिए। लेकिन इसके पहले पुलिस पर गंभीर आरोप लगे। इंदौर हाईकोर्ट में याचिका लगाने वाले जेबरान अंसारी गायब हो गए।

जब पत्नी ने हैबियस कार्पस लगाई तो उन्हें कुछ लोग इंदौर हाईकोर्ट के बाहर छोड़ गए। कोर्ट में उसने बयान दिया कि पुलिस वाले उठाकर ले गए थे। दबाव बनाया कि याचिका वापस लें, लेकिन अंसारी छूट गए तो उन्होंने मामले को आगे नहीं बढ़ाया और कोर्ट में याचिका खत्म हो गई। 

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इस तरह हुई पूरी घटना

दरअसल भोजशाला में नमाज के लिए बसंत पंचमी पर मंजूरी के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर हुई। यह याचिका सुनवाई के लिए गुरुवार को मेंशन हुई। इसी दौरान बुधवार को याचिकाकर्ता जेबरान अंसारी गायह हो गए। इसके बाद उनकी पत्नी ने इसकी शिकायत धार पुलिस को की, लेकिन पता नहीं चला।

इसके बाद गुरुवार सुबह पत्नी ने हैबियस कार्पस लगा दी और अधिवक्ता अशहर वारसी ने मेंशन ले लिया। इस पर सुनवाई शुक्रवार को करने की बात जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने की। इसी बीच अंसारी को इंदौर हाईकोर्ट के बाहर दो नंबर गेट पर करीब साढ़े ग्यारह बजे कोई छोड़ गया। फिर अधिवक्ता अशहर वारसी ने कोर्ट में खढ़े होकर बताया कि अपीलकर्ता आ गया है। इस पर बेंच ने उन्हें बयान के लिए बुलाया। 

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फिर कोर्ट में बताई अंसारी ने पुलिस की कहानी

अंसारी ने कोर्ट में बताया कि वह बुधवार सुबह जा रहे थे तभी बदनावार के पास कार अड़ाकर कुछ लोगों ने मुझे रोका और अपने साथ बैठा लिया। फिर मुझ पर धारा 151 लगाकर बदनावर जेल भेज दिया। यह कार्रवाई धार पुलिस द्वारा की गई। मुझ पर भोजशाला को लेकर याचिका वापस लेने का दबाव बनाया गया। फिर आज गुरुवार सुबह मुझे यहां कोर्ट के बाहर छोड़ गया। मुझे हंसते हुए हाथ हिलाने के लिए कहा और वीडियो बनाया। 

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हाईकोर्ट  ने अपने आदेश में यह लिखा

याचिकाकर्ता के पति को धार जिला पुलिस द्वारा अवैधानिक डिटेन करने का आरोप है। साथ ही है कि उसने बदनावर जेल भेजा गया। कोर्ट इस मामले को लेती इसके पहले ही उसे छोड़ दिया गया। उसे कोर्ट के बाहर छोड़ा गया। इसकी जानकारी कोर्ट को दी गई। वहीं धार कलेक्टर ने इस मामले में बताया कि उनके द्वारा कोई कस्टडी याचिकाकर्ता के पति की नहीं ली गई थी। अब  याचिकाकर्ता के पति कस्टडी में नहीं है, इसलिए यह हैबियस कार्पस याचिका अब सुनवाई योग्य नहीं रह गई है।

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