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Photograph: (thesootr)
News In Short
भोजशाला केस अब जबलपुर हाईकोर्ट में लिस्ट हुआ है, चीफ जस्टिस करेंगे सुनवाई।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट में सुनवाई के निर्देश दिए थे।
एएसआई की रिपोर्ट सभी पक्षकारों को दी जाएगी।
याचिका में हिंदू और मुस्लिम पक्षों के साथ कई संस्थाएं शामिल हैं।
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की थी, कोर्ट ने पक्षकारों को सुझाव देने का समय दिया।
News In Detail
धार भोजशाला विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 28 जनवरी को अहम आदेश दिया था। इसके बाद केस 16 फरवरी को इंदौर बेंच में लिस्ट हुआ था। इसमें सुप्रीम कोर्ट के आदेश को देखा गया, इसके बाद चीफ जस्टिस के पास मामला पहुंचा। अब यह केस औपचारिक तौर पर जबलपुर में लिस्ट हो गया है और चीफ जस्टिस की बेंच इसकी सुनवाई करेगी। यह केस 18 फरवरी के लिए लिस्ट हो चुका है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह दिए थे आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि- हाईकोर्ट चीफ जस्टिस मप्र की अध्यक्षता वाली बेंच इसकी सुनवाई करे। या फिर पीठ के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश की बेंच द्वारा तीन सप्ताह की अवधि में सुनवाई की जाए।
एएसआई की रिपोर्ट खुलना है
सुनवाई में ASI (आर्कियोलाजिकल सर्वे आफ इंडियाः) की रिपोर्ट जो बंद लिफाफे में थी वह भी सभी पक्षकारों को मिलेगी।
हाईकोर्ट में यह है याचिका और पक्षकार
हाईकोर्ट में भोजशाला के सर्वेक्षण को लेकर याचिका 10497/2022 लगी थी। इस पर हाईकोर्ट ने 11 मार्च 2024 को वैज्ञानिक सर्वेक्षण के आदेश दिए। इस आदेश के तहत सर्वे भी हुआ और रिपोर्ट बंद लिफाफे में पेश हुई। इसी बीच मौलाना कमालउद्दीन वेलफेयर सोसायटी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका थी।
हाईकोर्ट की याचिका में हिंदू फ्रंट फार जस्टिस प्रेसीडेंट रंजना अग्निहोत्री, आशीष गोयल, आशीष जनक, मोहित गर्ग, जितेंद्र सिंह, सुनील सारस्वत याचिकाकर्ता है। वहीं इसमें पक्षकार केंद्र सरकार, आर्कियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया, मप्र शासन, जिला कलेक्टर, एसपी धार, मौलाना कमालउद्दीन वेलफेयर सोसायटी प्रेसीडेंट अब्दुल समद, श्री महाराजा भोज सेवा संस्थान समिति सचिव गोपाल शर्मा है।
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सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई को लेकर ये दिए निर्देश...
- हाईकोर्ट चीफ जस्टिस मप्र की अध्यक्षता वाली बेंच इसकी सुनवाई करे। या फिर पीठ के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश की बेंच द्वारा तीन सप्ताह की अवधि में सुनवाई की जाए।
- डिवीजन बेंच से अनुरोध है कि वह खुली अदालत में रिपोर्ट को अनसील करे और दोनों पक्षों को उसकी प्रतियां उपलब्ध कराए।
- इसके बाद, पक्षों को अपनी-अपनी आपत्तियां, राय, सुझाव और/या सिफारिशें प्रस्तुत करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया जा सकता है;
- इसके बाद उच्च न्यायालय की खंडपीठ अंतिम सुनवाई के लिए मामले को ले सकती है और अंतिम सुनवाई के समय पक्षों के सभी निवेदनों पर विधिवत विचार किया जा सकता है।
- रिट याचिका पर अंतिम निर्णय होने तक, भोजशाला सरस्वती मंदिर-सह-मौलाना कमल मौला मस्जिद के स्वरूप में परिवर्तन के संबंध में पक्षकार यथास्थिति बनाए रखेंगे।
- पक्षकार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक द्वारा दिनांक 07.04.2003 को जारी आदेश का पालन और कार्यान्वयन करते रहेंगे।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश को हिंदू फ्रंट ने बताई थी जीत
याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने बताया था कि सुप्रीम कोर्ट में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से वरिष्ठ अभिभाषक विष्णु शंकर जैन ने प्रकरण में पैरवी की थी। हाईकोर्ट में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस एवं याचिका कर्ता की ओर से पैरवी अभिभाषक विनय जोशी इंदौर द्वारा की जाएगी। भोजशाला में जो एएसआई द्वारा 98 दिन तक का सर्वे हुआ है,उसके आधार पर हाईकोर्ट सुनवाई कर भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करेगी।
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