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News in Short
- धार भोजशाला पर ASI की रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की गई।
- हाईकोर्ट ने रिपोर्ट पर दावे, आपत्तियां और सुझाव देने के लिए 2 सप्ताह का समय दिया।
- सुनवाई 16 मार्च को तय की गई, राज्य के लिए यह एक अर्जेंट मामला बताया गया।
- सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिए थे कि ASI की रिपोर्ट सभी पक्षकारों को दी जाए और फिर फाइनल हियरिंग हो।
- भोजशाला के धार्मिक स्वरूप पर निर्णय लेने के लिए ASI सर्वेक्षण रिपोर्ट का आधार लिया जाएगा।
News in Detail
INDORE. धार भोजशाला को लेकर आर्कियोलाजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) की सीलबंद रिपोर्ट खुल चुकी है। यह बात हाईकोर्ट इंदौर खंडपीठ में सोमवार 23 फरवरी को हुई सुनवाई में सामने आई। इस पर हाईकोर्ट बेंच चौंक गई। हालांकि, फिर सामने आया कि यह केस सुप्रीम कोर्ट में जाने से पहले ही हाईकोर्ट इसकी कॉपी सभी पक्षकारों को देने का आदेश दे चुका था। इसके बाद हाईकोर्ट ने दो सप्ताह में इस रिपोर्ट पर दावे, आपत्ति, सुझाव देने के लिए कहा। अब सुनवाई 16 मार्च को तय की गई।
यह राज्य के लिए जरूरी मैटर: एजी
एजी प्रशांत सिंह वीडियो के जरिए सुनवाई में जुड़े थे। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत इसे अर्जेंट बेस पर सुना जाना है और दावे, सुझाव लेने के बाद फाइनल हियरिंग होना है। जब जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने अगली सुनवाई के लिए 23 मार्च की तारीख का कहा तो एजी ने जल्द सुनवाई का निवेदन किया। एजी सिंह ने कहा कि यह राज्य शासन के लिए भी अर्जेंट मैटर है, इसलिए इसे 16 मार्च को रख सकते हैं। इस पर हाईकोर्ट ने तारीख 16 मार्च रख दी।
सुप्रीम कोर्ट ने यह दिए थे आदेश
इंदौर हाईकोर्ट से यह मामला पहले सुप्रीम कोर्ट गया था। वहां आदेश हुए कि हाईकोर्ट चीफ जस्टिस मध्यप्रदेश की अध्यक्षता वाली बेंच इसकी सुनवाई करे। फिर पीठ के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश की बेंच द्वारा तीन सप्ताह की अवधि में सुनवाई की जाए। साथ ही कहा कि एएसआई की सीलबंद रिपोर्ट सभी को दी जाए। इस पर वह अपने सुझाव, आपत्ति देंगे और फिर फाइनल हियरिंग होगी। इसके बाद मामला हाईकोर्ट जबलपुर गया जहां से इसे फिर इंदौर बेंच को भेजा गया, क्योंकि न्यायालयीन क्षेत्र इंदौर था।
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हाईकोर्ट में यह है याचिका और पक्षकार
हाईकोर्ट में भोजशाला के सर्वेक्षण को लेकर याचिका 10497/2022 लगी। इस पर हाईकोर्ट ने 11 मार्च 2024 को वैज्ञानिक सर्वेक्षण के आदेश दिए। इस आदेश के तहत सर्वे भी हुआ और रिपोर्ट बंद लिफाफे में पेश हुई। इसी बीच मौलाना कमालउद्दीन वेलफेयर सोसायटी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका थी।
हाईकोर्ट की याचिका में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस प्रेसीडेंट रंजना अग्निहोत्री, आशीष गोयल, आशीष जनक, मोहित गर्ग, जितेंद्र सिंह, सुनील सारस्वत याचिकाकर्ता है। वहीं इसमें पक्षकार केंद्र सरकार, आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, मप्र शासन, जिला कलेक्टर, एसपी धार, मौलाना कमालउद्दीन वेलफेयर सोसायटी प्रेसीडेंट अब्दुल समद, श्री महाराजा भोज सेवा संस्थान समिति सचिव गोपाल शर्मा है।
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इन्होंने रखे पक्ष
याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से वरिष्ठ एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने वीडियो के जरिए प्रकरण में पैरवी की। साथ ही अभिभाषक विनय जोशी भी रहेंगे। भोजशाला में जो एएसआई द्वारा 98 दिन तक का सर्वे हुआ है,उसके आधार पर हाईकोर्ट सुनवाई कर भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करेगी।
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