FSI चार्ज पर 18 फीसदी की बढ़ोतरी, रियल एस्टेट सेक्टर पर पड़ेगा असर
फ्लोर स्पेस इंडेक्स यानी ( FSI ) चार्ज पर 18% जीएसटी लगाने का फैसला रियल एस्टेट सेक्टर और घर खरीदारों के लिए समस्याएं पैदा करेगा। इससे न केवल घरों की कीमतें बढ़ेंगी, बल्कि "हाउसिंग फॉर ऑल" योजना भी मुश्किल में पड़ सकती है। क्रेडाई एमपी और भोपाल ने इस फैसले का विरोध किया है और केंद्र से इसे फिर से देखने की अपील की है।
इस फैसले से मुख्य समस्याएं
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रियल एस्टेट सेक्टर होगा कमजोर?
मध्यप्रदेश क्रेडाई के प्रवक्ता मनोज मीक का कहना है कि इससे रियल एस्टेट सेक्टर कमजोर होगा और लाखों लोगों के घर खरीदने का सपना चूर हो सकता है। खासकर भोपाल जैसे शहरों पर इसका सीधा असर पड़ेगा, जो आवासीय विकास में अग्रणी हैं। वहीं क्रेडाई का मानना है कि एफएसआई चार्ज पर जीएसटी नहीं लगाया जाना चाहिए, क्योंकि यह शहरी नियोजन और भूमि उपयोग से संबंधित है, जैसा कि संविधान में कहा गया है।
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क्रेडाई ने सरकार से कुछ खास मांगें की हैं
- एफएसआई चार्ज को जीएसटी से बाहर रखा जाए।
- निर्माण सामग्री और एफएसआई चार्ज पर जीएसटी का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) दिया जाए।
- रेट्रोस्पेक्टिव टैक्सेशन से बचाव किया जाए और यह केवल भविष्य पर लागू हो।
- प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी सस्ती आवास परियोजनाओं को पूरी तरह जीएसटी से मुक्त रखा जाए।
- क्रेडाई एमपी और भोपाल सरकार से अपील करते हैं कि वे इस फैसले को वापस लें, क्योंकि मध्यप्रदेश पहले ही कई समस्याओं का सामना कर रहा है, जैसे उच्च टैक्सेशन, महंगी बिजली, और ईंधन। यह सिर्फ डेवलपर्स का मुद्दा नहीं है, बल्कि हर उस व्यक्ति का है जो अपना घर खरीदना चाहता है।
क्या है FSI?
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