इंदौर चूहा कांड से सीख नहीं ले रहे एमपी के अस्पताल, नवजातों की जान खतरे में डाल रहा सिस्टम!
मध्यप्रदेश के सरकारी अस्पतालों के सिस्टम (System) ने क्या पिछले जख्मों से कोई सबक नहीं लिया है? पिछले साल इंदौर के एमवाय अस्पताल (MY Hospital) में चूहों के काटने से दो मासूमों की मौत हो गई थी। इसकी यादें अभी धुंधली भी नहीं पड़ी थीं कि अब राजधानी भोपाल के एम्स से डराने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां सबसे सुरक्षित माने जाने वाले एनआईसीयू (NICU) में चूहों की घुसपैठ ने पूरे प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
एनआईसीयू में चूहों का डेरा
एम्स भोपाल का एनआईसीयू वार्ड वह जगह है जहां समय से पहले जन्मे और गंभीर हालत वाले नवजात अपनी जिंदगी की जंग लड़ते हैं। करीब 20 बेड वाले इस वार्ड में हमेशा भारी दबाव रहता है। चौंकाने वाली बात यह है कि यहां तैनात स्टाफ कई दिनों से चूहों की आवाजाही की शिकायत कर रहा था।
प्रबंधन (Management) को जानकारी देने के बावजूद तुरंत ठोस कदम नहीं उठाए गए। जब पानी सिर से ऊपर चला गया, तब जाकर खानापूर्ति के लिए पेस्ट कंट्रोल (Pest Control) कराया गया, लेकिन शिकायतें अब भी बदस्तूर जारी हैं।
इंदौर एमवाय की खौफनाक रात
इतिहास खुद को दोहराने की कगार पर है। याद दिला दें कि 31 अगस्त और 1 सितंबर 2025 की दरम्यानी रात इंदौर के एमवाय अस्पताल में चूहों ने दो नवजातों को कुतर दिया था। इलाज के दौरान उन मासूमों ने दम तोड़ दिया।
मामला हाई कोर्ट (High Court) तक पहुंचा, जहां कोर्ट ने इसे गंभीर लापरवाही करार दिया। उस दौरान एक डॉक्टर समेत 8 कर्मचारियों को सस्पेंड (Suspend) किया गया था। सवाल यह है कि क्या भोपाल एम्स भी किसी ऐसे ही बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
विशेषज्ञ की राय: बिना काटे भी जानलेवा हैं चूहे
शिशु रोग विशेषज्ञ और एनएचएम के पूर्व डायरेक्टर डॉ. पंकज शुक्ला का कहना है कि एनआईसीयू एक जीरो टॉलरेंस (Zero Tolerance) जोन होना चाहिए। उनके अनुसार:
- चूहे बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी (Parasites) के वाहक होते हैं।
- उनके मल-मूत्र और लार से संक्रमण (Infection) फैल सकता है, जो कमजोर इम्यूनिटी वाले बच्चों के लिए घातक है।
- चूहे मेडिकल उपकरणों और लाइफ सपोर्ट सिस्टम (Life Support Systems) की केबल कुतर सकते हैं, जिससे शॉर्ट सर्किट का खतरा बढ़ जाता है।
गाइडलाइन की उड़ी धज्जियां
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और आईसीएमआर (ICMR) की गाइडलाइंस स्पष्ट कहती हैं कि एनआईसीयू पूरी तरह पेस्ट-फ्री होना चाहिए। यहां नियमित सैनिटाइजेशन ऑडिट अनिवार्य है। बावजूद इसके, फॉल्स सीलिंग और सेंट्रलाइज्ड कूलिंग सिस्टम के जरिए चूहों का वार्ड में पहुंचना सुरक्षा प्रोटोकॉल का गंभीर उल्लंघन है।
फॉल्स सीलिंग से निकल रहे हैं चूहे- प्रबंधन
मामले की गंभीरता पर एम्स भोपाल के मेडिकल सुप्रीटेंडेंट डॉ. विकास गुप्ता का कहना है कि वर्तमान में पेस्ट कंट्रोल प्रक्रिया को सघन (Intensive) किया गया है। इसी कारण चूहे और कॉकरोच सेंट्रलाइज्ड कूलिंग सिस्टम की फॉल्स सीलिंग से निकलकर वार्डों में दिखाई दे रहे हैं।
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