भोपाल की अरेरा कॉलोनी में घरों से कारोबार, सरकार की तैयारी पर बवाल
भोपाल की अरेरा कॉलोनी के मामले में सरकार का दोहरा रवैया दिखाई दे रहा है। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद मुख्य सचिव की निगरानी में बनी समिति जांच कर रही है। दूसरी तरफ नगरीय प्रशासन और आवास विभाग ने आवासीय कॉलोनियों में व्यावसायिक गतिविधियों को वैध करने का रास्ता खोल दिया है।
विभाग ने इसको लेकर नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। जबकि मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। अरेरा कॉलोनी के रहवासी इसे लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि व्यावसायियों के दबाव में विभाग ने नोटिफिकेशन जारी करने में जल्दबाजी दिखाई है।
बदल गई अरेरा कॉलोनी की फिजा
अरेरा कॉलोनी में बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों ने यहां का माहौल बिगाड़ दिया है। कभी शांत रहने वाली चौड़ी और हरी-भरी सड़कें अब ट्रैफिक और शोर से भरी रहती हैं। धूल, धुआं और शोर की वजह से पॉश कॉलोनी के रहवासियों की परेशानी बढ़ गई है।
नगर निगम की अनदेखी से परेशान होकर अब रहवासी कोर्ट का रास्ता अपनाने को मजबूर हो गए हैं। घरेलू लीज वाली जमीन पर व्यावसायिक निर्माण और उपयोग को लेकर अरेरा अलर्ट ग्रुप ने सुप्रीम कोर्ट का ध्यान खींचने की कोशिश की है। इसके लिए ग्रुप ने एमिकस क्यूरी एके सिन्हा से मदद मांगी है।
अरेरा कॉलोनी में बीते सालों में लैंड यूज में मनमाने बदलाव और नगर निगम की अनदेखी से जुड़े दस्तावेज भी एमिकस क्यूरी को भेजे गए हैं। अब रहवासियों को सुप्रीम कोर्ट से राहत की उम्मीद है।
कार्रवाई टालने व्यापारियों का दबाव
एमिकस क्यूरी एडवोकेट एके सिन्हा के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट द्वारा संज्ञान लिए जाने की स्थिति को देखते हुए प्रशासन हरकत में आ गया है। मुख्य सचिव अनुराग जैन के निर्देश पर एक समिति बनाई गई है। इसमें नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग, नगर निगम आयुक्त और सिटी प्लानर को शामिल किया गया है।
सिटी प्लानर को अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर और अन्य कॉलोनियों की जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांच में देखा जाएगा कि कहां लैंड यूज बदला गया है और कहां आवासीय जमीन का व्यावसायिक उपयोग हो रहा है। जांच के दौरान वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई जाएगी।
दूसरी तरफ नगर निगम के नोटिस पहुंचते ही अरेरा में कारोबार करने वाले व्यापारी भी सक्रिय हो गए हैं। बताया जा रहा है कि व्यापारियों के समूह ने कार्रवाई टालने के लिए पूर्व विधायक ध्रुवनारायण सिंह को आगे किया है। वे सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
नोटिस जारी, भौतिक सत्यापन शुरू
अरेरा कॉलोनी राजधानी की सबसे पुरानी, सुंदर और व्यवस्थित पॉश कॉलोनियों में गिनी जाती है। लेकिन अब यहां कई घरों में दुकान, रेस्टोरेंट, होटल और बार खुलने लगे हैं। इसके खिलाफ अरेरा अलर्ट ग्रुप लगातार मुहिम चला रहा है।
हाल ही में चीफ सिटी प्लानर नीरज आनंद लिखार ने अनधिकृत निर्माण और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए हैं। अरेरा कॉलोनी में 290 और रोहित नगर में 100 नोटिस दिए गए हैं।
नोटिस जारी होने के बाद अब मौके पर जाकर जांच की जा रही है। इसमें देखा जा रहा है कि कहां अनधिकृत निर्माण हुआ है और कहां आवासीय जमीन पर व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं।
सरकार की मंशा पर सवाल
अरेरा अलर्ट ग्रुप (Bhopal News) के सदस्यों ने भोपाल नगर निगम की जांच के बीच जारी हुए नोटिफिकेशन पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब मौके पर भौतिक सत्यापन चल रहा है, तब नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग ने यह नोटिफिकेशन क्यों जारी किया।
अरेरा एलर्ट ग्रुप के कमल राठी, विवेक त्रिपाठी, लवनीश भाटी, नीरज गुलाटी, सुश्री गुप्ता, एस.शर्मा, एचके. वर्मा, एस. माहेश्वरी के अलावा पूर्व संभाग आयुक्त के. कियावत भी शिकायतकर्ताओं में शामिल हैं।
उनका कहना है कि यह नोटिफिकेशन सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के खिलाफ है। सुप्रीम कोर्ट उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के दो मामलों में आवासीय कॉलोनियों में व्यावसायिक गतिविधियों पर सख्त टिप्पणी कर चुका है।
कोर्ट ने इस मामले में 12 सूत्रीय गाइडलाइन भी जारी की थी। साथ ही सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिए गए थे। ऐसे में नगरीय प्रशासन और आवास विभाग द्वारा लैंड यूज बदलने का नोटिफिकेशन जारी करना ठीक नहीं है।
बिगड़ेगा कॉलोनियों का स्वरूप
विभाग ने 29 जून को नया नोटिफिकेशन जारी किया है। इसमें कई बदलावों को रियायत देने की बात कही गई है। इस नोटिफिकेशन के बाद लैंड यूज की सख्ती काफी हद तक खत्म हो जाएगी। यानी जिस भूखंड का उपयोग पहले केवल एक तय काम के लिए हो सकता था, अब उसका उपयोग दूसरी गतिविधियों के लिए भी किया जा सकेगा।
इससे भूखंड और भवनों के मिक्स्ड यूज का रास्ता खुल जाएगा। यानी आवासीय इलाके में भी व्यावसायिक गतिविधियां चल सकेंगी। व्यक्तिगत स्वामित्व वाले भूखंडों पर मल्टीस्टोरी भवन बनाए जाने की राह भी आसान होगी।
सरकार का कहना है कि इससे कम आय वर्ग के लोगों को सस्ते आवास आसानी से मिल सकेंगे। भूमि विकास नियमों में संशोधन के ड्राफ्ट में कई रियायतें दी गई हैं।
आवासीय इकाइयों के निर्माण में प्रति हेक्टेयर अधिकतम घनत्व की पाबंदी भी नहीं रहेगी। अभी चार हेक्टेयर वाली इकाइयों में 350 ईडब्ल्यूएस और 260 एलआईजी भवन बनाने की अनुमति थी। अधिकतम चार मंजिल निर्माण की सीमा भी थी। अब यह पाबंदी भी खत्म हो जाएगी।
भवन निर्माण में एफएआर अनुपात में भी रियायत दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट दे चुका ये निर्देश
इस मामले में केवल सर्वे रिपोर्ट देना काफी नहीं होगा। एमपी प्रशासन को एक्शन टेकन रिपोर्ट भी देनी होगी। यानी यह साफ बताना होगा कि अनधिकृत निर्माणों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि कार्रवाई के नाम पर सिर्फ नोटिस जारी करना काफी नहीं है। जरूरत पड़ने पर ऐसे निर्माणों को सील किया जाए और अनधिकृत निर्माणों को तोड़ा भी जाए।
कार्रवाई को लेकर जिम्मेदार अधिकारी को हलफनामा भी देना होगा। यह हलफनामा निकाय, प्राधिकरण के चेयरमैन, सीईओ या आयुक्त की ओर से पेश किया जाएगा।
जो मामले लंबे समय से अटके हुए हैं, उन पर तीन महीने में फैसला लेना होगा। यानी भवन या जमीन के उपयोग परिवर्तन से जुड़े मामलों का जल्द निपटारा करना होगा।
ऐसी शिकायतों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सीनियर एडवोकेट अजीत कुमार सिन्हा को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है। कॉलोनियों में अवैध निर्माण की समस्या पर कोर्ट ने राज्य सरकारों पर 50 हजार रुपए की कॉस्ट भी लगाई है।
अरेरा कॉलोनी से जुड़ी हमारी खास सीरीज की ये खबरें भी पढ़ें...
नीचे फोटो पर «क्लिक»करें...
----
भोपाल के अरेरा कॉलोनी में अवैध कमर्शियल निर्माण पर PIL, सरकार से HC ने मांगा जवाब