रहने के लिए बसी भोपाल की अरेरा कॉलोनी, अब कैफे-कोचिंग का ठिकाना, धड़ल्ले से चल रहा कमर्शियल खेल

Sanjay Sharma | Jul 01, 2026, 12:25 IST
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अरेरा कॉलोनी भोपाल
अरेरा कॉलोनी भोपाल

भोपाल की अरेरा कॉलोनी में आवासीय प्लॉटों पर खुलेआम कैफे, क्लीनिक और कोचिंग सेंटर चल रहे हैं। स्थानीय लोग लगातार शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के बजाय निर्माण कार्य जारी है। कई मामलों में कोर्ट का स्टे भी बताया जा रहा है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • आवासीय अरेरा में बंगले तोड़ बन रहे कॉम्प्लेक्स।
  • दस साल में 500 शिकायतें, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं।
  • हाईकोर्ट स्टे के बावजूद निर्माण पर भी अधिकारी चुप।
  • खुलेआम टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और भवन अनुज्ञा का उल्लंघन।
  • आवासीय कॉलोनी बाजार के शोर में डूबी, रहवासी परेशान।

News in Detail

BHOPAL. अरेरा कॉलोनी, भोपाल का पॉश इलाका है। यह आवासीय उपयोग में दर्ज कॉलोनी है, लेकिन अब व्यावसायिक गतिविधियों की बाढ़ आ गई है। स्थानीय लोग लगातार इसकी शिकायत करते आ रहे हैं। इसके बावजूद भोपाल नगर निगम, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और प्रशासन आवासीय भूखण्डों पर व्यवसायिक निर्माण रोक नहीं पा रहा है। घरों के बीच कैफे, क्लीनिक, कोचिंग, ऑफिस, जिम खुल रहे हैं। यहां अब पार्किंग गायब, ट्रैफिक जाम और बाजार का शोर-शराबा है।

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बाजार के शोर में डूबा आवासीय इलाका

1970-80 के दशक में भोपाल डेवलपमेंट अथॉरिटी ने अरेरा कॉलोनी बसाई थी। प्लान केवल आवासीय क्षेत्र विकसित करने का था, जहां लोग साफ, स्वच्छ और कोलाहलमुक्त माहौल में रह सकें। समय बीतने और व्यावसायिकता की दौड़ ने इस शांत इलाके को बाजार के शोर में डुबा दिया है।

पाबंदी पर भारी पड़ रहा बाजार का दवाब

अरेरा कॉलोनी के E-1 से E-5 तक लगभग हर सेक्टर में पुराने बंगले तोड़कर चार मंजिला कॉम्प्लेक्स खड़े कर दिए गए हैं। कहीं ग्राउंड फ्लोर पर कैफे चल रहा है, तो पहली मंजिल पर डायग्नोस्टिक लैब खुली है। दूसरी मंजिल पर कोचिंग सेंटर और सबसे ऊपर फ्लैट बनाए गए हैं।

नियम साफ कहता है कि आवासीय प्लॉट पर व्यावसायिक गतिविधियां नहीं चलाई जा सकतीं। इसके बावजूद यहां खुलेआम कारोबार चल रहा है और जिम्मेदार अफसर आंखें मूंदे बैठे हैं।

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हर एक्सटेंशन में घर की जगह दुकान

शिकायतें मिलने के बाद नगर निगम और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग ने अरेरा कॉलोनी की जांच की। जांच में अनधिकृत व्यावसायिक निर्माण और आवासीय भवनों के व्यावसायिक इस्तेमाल की पुष्टि हुई। रिपोर्ट के मुताबिक E-1 से E-8 तक ऐसे 80 भवन चिन्हित किए गए हैं।

इनमें E-2 में 11, E-3 में 26, E-4 में 37 और E-5 में 4 भवनों में नियमों के खिलाफ निर्माण या व्यावसायिक गतिविधियां पाई गईं। इतनी बड़ी गड़बड़ी सामने आने के बाद भी कार्रवाई सिर्फ नोटिस देने तक सीमित रही। न निर्माण रुका और न ही व्यावसायिक गतिविधियों पर कोई ठोस रोक लगाई गई।

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शिकायतें कागज पर, कार्रवाई जीरो

पिछले 10 साल का रिकॉर्ड खंगालें तो अरेरा कॉलोनी से जुड़ी शिकायतों का ढेर मिल जाएगा। लोगों ने नगर निगम से अवैध निर्माण, पार्किंग पर कब्जा और बिना नक्शा पास कराए भवन बनाने की शिकायतें की हैं।

टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के पास जमीन के तय उपयोग का उल्लंघन और आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां चलाने की शिकायतें पहुंची हैं। वहीं, कलेक्टर और पुलिस से शोर-शराबे, ट्रैफिक जाम, आम रास्ता बंद करने और रात 10 बजे के बाद कैफे-बार में हंगामे की शिकायत की गई है। इसके बावजूद हालात में कोई खास बदलाव नजर नहीं आया।

रहवासियों में बढ़ रही नाराजी

स्थानीय लोगों (भोपाल के अरेरा कॉलोनी) में बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर नाराजगी है। उनका कहना है कि हम शिकायत करते हैं, अधिकारी आते हैं लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं होती। अगले ही दिन फिर बाजार का शोर शुरू हो जाता है। आवासीय भूखंडों पर दुकानों का निर्माण और गतिविधियों पर प्रशासन रोक ही नहीं लगा पा रहा है। नगर निगम में शिकायत करने पर भी निर्माण नहीं रुकते और व्यावसायिक निर्माण पर पाबंदी के बावजूद टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से नक्शे पास किए जा रहे हैं।

कोर्ट भी नहीं दिला पा रहा राहत

मामले को एमपी हाईकोर्ट ले जाने वाले रहवासी अब तक कई केस लगा चुके हैं। कोर्ट से स्टे मिलता भी है तो निर्माण चोरी छिपे करा दिया जाता है। शिकायत के बाद भी निगम और प्रशासन अनदेखी करते हैं या फिर नोटिस जारी कर भूल जाते हैं। नतीजा कोर्ट में सुनवाई होते होते ही निर्माण पूरा हो जाता है।

भूमि विकास नियमों की अनदेखी

अरेरा कॉलोनी (Bhopal News) को साल 1968 के मास्टर प्लान में पूरी तरह आवासीय इलाके के रूप में बसाया गया था। E-1 से E-5 तक के क्षेत्रों में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग एक्ट 1973 और भूमि विकास नियम 2012 के तहत व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक है।

सीधी बात यह है कि यहां मकानों या आवासीय प्लॉटों पर दुकान, शोरूम, होटल या रेस्टोरेंट नहीं चलाए जा सकते। रहवासियों की याचिकाओं पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट भी कई बार सख्ती दिखा चुका है। कोर्ट अवैध व्यावसायिक गतिविधियां रोकने और अनधिकृत निर्माण तोड़ने के निर्देश दे चुका है।

क्या बोल रहे जिम्मेदार

भोपाल नगर निगम के सिटी प्लानर नीरज आनंद लिखार का कहना है कि बिल्डिंग परमिशन से अलग किया गया कोई भी निर्माण अनधिकृत माना जाएगा। ऐसे मामलों में भवन निर्माण की अनुमति रद्द की जा सकती है और नगर निगम कार्रवाई भी कर सकता है। अरेरा कॉलोनी से जुड़ी शिकायतों पर नोटिस जारी किए गए हैं और उनकी जांच कराई जा रही है।

इन्होंने की शिकायत

अरेरा कॉलोनी में आवासीय भूखंडों पर नियमों के खिलाफ व्यावसायिक निर्माण और इस्तेमाल को लेकर स्थानीय नागरिक विपिन बड़जात्या, राजेश मेहता, ए.के. गुप्ता, आशा हरिया, सागर श्रीवास्तव, अरविंद वर्मा, बी.एम. तिवारी, मुकेश निगम, संजय इंदुरख्या, हर्ष सिन्हा और जे.एन. वर्मा ने शिकायत की है।

इस मामले को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की गई है, जिस पर सुनवाई चल रही है। हाईकोर्ट नगर निगम को ऐसे मामलों की जांच करने और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई के निर्देश भी दे चुका है।

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