रहने के लिए बसी भोपाल की अरेरा कॉलोनी, अब कैफे-कोचिंग का ठिकाना, धड़ल्ले से चल रहा कमर्शियल खेल
Sanjay Sharma | Jul 01, 2026, 12:25 IST
अरेरा कॉलोनी भोपाल
भोपाल की अरेरा कॉलोनी में आवासीय प्लॉटों पर खुलेआम कैफे, क्लीनिक और कोचिंग सेंटर चल रहे हैं। स्थानीय लोग लगातार शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के बजाय निर्माण कार्य जारी है। कई मामलों में कोर्ट का स्टे भी बताया जा रहा है।
समझें क्या है पूरा मामला
- आवासीय अरेरा में बंगले तोड़ बन रहे कॉम्प्लेक्स।
- दस साल में 500 शिकायतें, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं।
- हाईकोर्ट स्टे के बावजूद निर्माण पर भी अधिकारी चुप।
- खुलेआम टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और भवन अनुज्ञा का उल्लंघन।
- आवासीय कॉलोनी बाजार के शोर में डूबी, रहवासी परेशान।
News in Detail
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बाजार के शोर में डूबा आवासीय इलाका
पाबंदी पर भारी पड़ रहा बाजार का दवाब
नियम साफ कहता है कि आवासीय प्लॉट पर व्यावसायिक गतिविधियां नहीं चलाई जा सकतीं। इसके बावजूद यहां खुलेआम कारोबार चल रहा है और जिम्मेदार अफसर आंखें मूंदे बैठे हैं।
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हर एक्सटेंशन में घर की जगह दुकान
इनमें E-2 में 11, E-3 में 26, E-4 में 37 और E-5 में 4 भवनों में नियमों के खिलाफ निर्माण या व्यावसायिक गतिविधियां पाई गईं। इतनी बड़ी गड़बड़ी सामने आने के बाद भी कार्रवाई सिर्फ नोटिस देने तक सीमित रही। न निर्माण रुका और न ही व्यावसायिक गतिविधियों पर कोई ठोस रोक लगाई गई।
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शिकायतें कागज पर, कार्रवाई जीरो
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के पास जमीन के तय उपयोग का उल्लंघन और आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां चलाने की शिकायतें पहुंची हैं। वहीं, कलेक्टर और पुलिस से शोर-शराबे, ट्रैफिक जाम, आम रास्ता बंद करने और रात 10 बजे के बाद कैफे-बार में हंगामे की शिकायत की गई है। इसके बावजूद हालात में कोई खास बदलाव नजर नहीं आया।
रहवासियों में बढ़ रही नाराजी
कोर्ट भी नहीं दिला पा रहा राहत
भूमि विकास नियमों की अनदेखी
सीधी बात यह है कि यहां मकानों या आवासीय प्लॉटों पर दुकान, शोरूम, होटल या रेस्टोरेंट नहीं चलाए जा सकते। रहवासियों की याचिकाओं पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट भी कई बार सख्ती दिखा चुका है। कोर्ट अवैध व्यावसायिक गतिविधियां रोकने और अनधिकृत निर्माण तोड़ने के निर्देश दे चुका है।
क्या बोल रहे जिम्मेदार
इन्होंने की शिकायत
इस मामले को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की गई है, जिस पर सुनवाई चल रही है। हाईकोर्ट नगर निगम को ऐसे मामलों की जांच करने और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई के निर्देश भी दे चुका है।
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