जनता दिनभर सड़क पर करती रही इंतजार, नहीं लगा सीएम का दरबार

Vikram Jain | Jan 06, 2025, 20:47 IST
सड़क पर मुख्यमंत्री का इंतजार करते रहे लोग। Photograph: (the sootr)
भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पहले जनता दरबार में फरियादियों को निराशा का सामना करना पड़ा। सीएम की व्यस्तताओं के कारण वह जनता दरबार में उपस्थित नहीं हो सके, जिसके चलते लोग इंतजार करते रहे।

BHOPAL. मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव का पहला जनता दरबार ही फीका रहा। इसकी बड़ी वजह रही, खुद सीएम (CM Mohan Yadav) का नहीं पहुंचना। प्रदेश के दूरदराज के इलाकों से आए फरियादी दिनभर सड़क पर मोहन का इंतजार करते रहे, लेकिन मुख्यमंत्री व्यवस्ताओं के चलते जनता दरबार में नहीं पहुंच सके। इसे लेकर लोग निराश नजर आए।



सीएम से नहीं हो सकी मुलाकात

दरअसल, राजधानी भोपाल में सीएम डॉ.मोहन यादव के जनता दरबार लगाने की खबर सुनकर प्रदेश के कई हिस्सों से अपनी समस्याएं लेकर लोग सीएम हाउस पहुंचे थे, पर सीएम से उनकी मुलाकात नहीं हो सकी। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने फरियादियों से आवेदन लेकर समस्याओं के निराकरण का विश्वास दिलाया।



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केस 01. 334 किमी दूर बुरहानपुर से आई सीएम से मिलने

334 किलोमीटर दूर बुरहानपुर से भोपाल आई सरिता ने दो लोगों पर प्रताड़ना के आरोप लगाए। उन्होंने बताया, कुछ लोग हमें लगातार परेशान कर रहे हैं। घर की बिजली और पानी का कनेक्शन काट दिया है। बाथरूम के बाहर कैमरे लगा दिए हैं, जहां हमारी बच्चियां नहाती हैं। मैं कई बार भोपाल आकर शिकायत कर चुकी हूं। हर बार अधिकारी किसी न किसी बात को आवेदन लेकर चलता कर देते हैं। आज सोचा था सीएम को पूरी बात बताउंगी, पर उनसे मुलाकात नहीं हो गई।



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केस 02. सम्मान करने पहुंचे थे, नहीं मिले सीएम

जनता दरबार के बीच कुछ ऐसे किसान भी पहुंचे, जो सीएम से मुलाकात कर उन्हें हल भेंट करते हुए सम्मान करना चाहते थे, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी। सीहोर के चंदेरी गांव के किसान एमएस मेवाड़ा अन्य किसानों के साथ हल लेकर आए थे। उन्होंने कहा, किसानों की समस्याओं को लेकर सीएम से मिलने पहुंचे थे। मुलाकात होती तो सीएम को साफा बांधकर उनका सम्मान भी करते, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।



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सीधा संवाद बनाने की कवायद

दरअसल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 6 जनवरी से मुख्यमंत्री निवास में जनता दरबार की शुरुआत करने वाले थे, लेकिन पहला ही दरबार फीका रहा। लोगों को निराशा हाथ लगी। जनता दरबार का मकसद आमजन से सीधा संवाद स्थापित करना है। मुख्यमंत्री स्वयं जनता की समस्याओं को सुनकर अधिकारियों के साथ तत्काल समाधान निकालेंगे।



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उमा और शिवराज भी बढ़े थे राह पर

गौरतलब है कि इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती और शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में भी जनदर्शन और जनसुनवाई की व्यवस्था की गई थी। उमा भारती ने कुछ समय जनदर्शन कार्यक्रम चलाया था, जिसमें वह जनता से मिलती थीं, लेकिन भीड़ की वजह से इसे बाद में बंद कर दिया गया। शिवराज के कार्यकाल में भी यह व्यवस्था ज्यादा कारगर नहीं रही।



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