भोपाल में थमे 2000 डंपर: 4 लाख की पेनाल्टी पर भड़के मालिक, सीएम से लगाई गुहार
समझें क्या है पूरा मामला
- भोपाल में डंपर मालिक दो दिनों से हड़ताल पर हैं।
- करीब 2000 डंपरों का संचालन पूरी तरह बंद है।
- चूनाभट्टी चौराहे पर 700 मालिक धरना दे रहे हैं।
- हड़ताल से रेत और गिट्टी की आपूर्ति प्रभावित हुई।
- संगठन ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से हस्तक्षेप मांगा है।
भोपाल में डंपर मालिक भारी जुर्माने से नाराज हैं। करीब 2000 डंपरों के पहिए थम गए हैं। 700 मालिकों ने चूनाभट्टी चौराहे पर धरना शुरू किया। उनका आरोप है कि सरकार 4 लाख रुपए तक पेनाल्टी वसूल रही है। मांग नहीं मानी तो सड़कें जाम करने की चेतावनी दी गई है।
भारी पैनॉल्टी के विरोध में हड़ताल
भोपाल की सड़कों पर इन दिनों डंपरों का संकट गहराता जा रहा है। भारी पैनॉल्टी के विरोध में करीब दो हजार डंपर मालिकों ने अपने वाहन खड़े कर दिए हैं। मालिकों का कहना है कि सरकार कार्रवाई के दौरान चार लाख रुपए तक का जुर्माना ठोक रही है। उन्हें यह रकम अनुचित लगती है।
पिछले दो दिनों से मालिकों ने अलग-अलग इलाकों में डंपर सड़क किनारे खड़े कर दिए हैं। कोलार रोड पर सौ, ईंटखेड़ी में अस्सी, रायसेन रोड पर पच्चीस और ग्यारह मील पर करीब सत्तर डंपर बंद पड़े हैं। चूनाभट्टी चौराहे से सर्वधर्म ब्रिज तक दोनों तरफ कतार लगी है।
सप्लाई पर सीधा असर
डंपर बंद होने का सीधा असर निर्माण सामग्री की सप्लाई पर पड़ा है। कई इलाकों में रेत, गिट्टी और कोपरा की आपूर्ति रुक गई है। इससे छोटे-बड़े निर्माण कार्य प्रभावित होने लगे हैं। ठेकेदारों और बिल्डरों में भी चिंता बढ़ गई है।
तीन साल से चल रही कार्रवाई
लोकल ट्रांसपोर्ट जागरूकता सहायता समिति के बैनर तले मालिक सोमवार को दूसरे दिन भी धरने पर बैठे। संगठन के सचिव रोहित यादव ने बताया कि परिवहन के दौरान पकड़े जाने पर डंपर पर चार लाख रुपए फिक्स जुर्माना लगाया जाता है। इसके अलावा बीस से चालीस हजार रुपए तक अतिरिक्त पेनाल्टी वसूली जाती है।
उनका कहना है कि यह कार्रवाई पिछले तीन साल से लगातार चल रही है। मालिकों का आरोप है कि जुर्माना मनमाने और भेदभावपूर्ण तरीके से लगाया जा रहा है। संगठन की मांग है कि इसे तुरंत रोका जाए।
सीएम से मिलने की तैयारी
संगठन पदाधिकारियों ने साफ कहा है कि वे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात करना चाहते हैं। इसके लिए स्थानीय सांसद और विधायकों से संपर्क किया जा रहा है। पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने समस्या का हल नहीं निकाला तो डंपर मालिक सड़कों पर वाहन खड़े कर देंगे।
मंगलवार को संगठन एक बैठक करने वाला है। इसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी। मालिकों का कहना है कि यह उनकी आखिरी चेतावनी है।
आगे क्या हो सकता है
अगर सरकार जल्द कोई फैसला नहीं लेती है तो हड़ताल और बड़े स्तर पर फैल सकती है। इससे निर्माण उद्योग पर असर और गहरा हो सकता है। प्रशासन की तरफ से अभी तक कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है।
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