वर्दी में रील बैन: MP पुलिस के लिए नई सोशल मीडिया गाइडलाइन जारी
Jitendra Shrivastava | Sept 21, 2026, 23:06 IST
Photograph: (THESOOTR)
पुलिस मुख्यालय भोपाल ने पुलिसकर्मियों के लिए सोशल मीडिया गाइडलाइन 2026 जारी की है। वर्दी में रील, AI टूल्स पर सरकारी दस्तावेज और सोशल मीडिया से कमाई पर सख्त नियम बने हैं।
एमपी पुलिस के लिए सोशल मीडिया गाइडलाइन 2026 जारी की गई है। यह पत्र 21 सितंबर को पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने जारी किया है। इसमें कुल 24 निर्देश हैं। वर्दी में रील बनाने और AI टूल्स पर सरकारी दस्तावेज डालने पर रोक है। निर्देशों के बाद भी जानबूझकर गलती करने पर तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।
पुलिस मुख्यालय के मुताबिक कई मामलों में अनुचित रील और आपत्तिजनक टिप्पणियां सामने आई हैं। ये पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट की थीं। मुख्यालय ने इसे कदाचार और अनुशासन के खिलाफ माना है।
परिपत्र में मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 का हवाला दिया गया है। नियम 3 (1), 9 और 10 के साथ पुलिस रेगुलेशन की कंडिका 64 भी लिखी गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की गाइडलाइन भी आधार बनी है। साथ में MEITY (Ministry of Electronics and Information Technology) की गाइडलाइन भी शामिल है।
पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान या उसके बाद वर्दी में रील नहीं बनाएंगे। अशोभनीय वेशभूषा में फोटो, वीडियो या ऑडियो क्लिप अपलोड करना भी मना है। फेसबुक, व्हाट्सऐप, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर यही नियम लागू होगा।
ऐसा पुराना कंटेंट तत्काल हटाना होगा। परिजनों और मित्रों के लिए भी यही रोक है। वे पुलिस यूनिफॉर्म, वाहन या सरकारी हथियारों के साथ वीडियो अपने अकाउंट पर नहीं डालेंगे। वर्दी की गरिमा के खिलाफ पारिवारिक कार्यक्रमों की पोस्ट भी नहीं होगी।
सरकारी दस्तावेज स्कैन कर या स्क्रीनशॉट लेकर सोशल मीडिया पर शेयर नहीं होंगे। गोपनीय और संवेदनशील जानकारी पर खास रोक है। ऐसे दस्तावेज ChatGPT और Gemini जैसे AI (Artificial Intelligence) टूल्स पर भी अपलोड नहीं होंगे।
पुलिस की टैक्टिक्स, फील्ड क्राफ्ट या जांच की तकनीक भी उजागर नहीं होगी। बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के ऐसी जानकारी साझा करना मना है। जब्त सामग्री और हथियार बिना सीलबंद किए पोस्ट नहीं होंगे।
संवेदनशील ड्यूटी वाले पुलिसकर्मी अपने कार्य की प्रकृति और स्थान नहीं बताएंगे। ऐसे स्थलों पर लोकेशन और जियो टैगिंग ऑप्शन बंद रखने होंगे।
अतिविशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा में लगे कर्मचारी महत्वपूर्ण स्थलों के फोटो या सेल्फी नहीं डालेंगे। हथियार प्रशिक्षण, ड्रिल, चांदमारी और दबिश के फोटो या वीडियो पर पूरी रोक है। इन्हें लाइव करना भी मना है।
जांच, विवेचना और जनसुनवाई में पीड़ित, साक्षी, आवेदक और आरोपी के फोटो या वीडियो पोस्ट नहीं होंगे। परिपत्र इसे निजता के अधिकार का उल्लंघन बताता है। जरूरी होने पर चेहरे ब्लर कर और अनुमति लेकर ही पोस्ट होगा।
दुष्कृत्य और यौन हिंसा से पीड़ित महिला और बालिका की पहचान उजागर नहीं होगी। किशोर न्याय अधिनियम के तहत आने वाले बच्चों की पहचान भी उजागर नहीं होगी।
विवेचना या कोर्ट में लंबित अपराध की ऐसी जानकारी पोस्ट नहीं होगी, जो अभियोजन पर असर डाले। अदालत के आदेश पर ऐसी टिप्पणी भी नहीं होगी, जिससे अवमानना हो।
शासन की पूर्व अनुमति के बिना प्रोफाइल बनाकर पेड प्रमोशन नहीं होगा। अकाउंट को मॉनेटाइज कराना भी पूरी तरह प्रतिबंधित है। यही रोक आश्रितों और परिजनों के नाम या छद्म नाम वाले प्रोफाइल पर भी है।
निजी व्यवसाय, कंपनी, उत्पाद या सेवा का प्रचार भी मना है। इसे सिविल सेवा आचरण नियम 16 का उल्लंघन माना जाएगा। सोशल मीडिया से कोई आय हुई हो, तो पूरा विवरण देना होगा। यह विवरण गाइडलाइन जारी होने के 30 दिन के भीतर विभाग को देना अनिवार्य है।
जाति, धर्म या लिंग के आधार पर पक्षपात दिखाने वाली पोस्ट नहीं होगी। AI जेनरेटेड कंटेंट भी इसमें शामिल है। ऐसी किसी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देना भी मना है।
शासन की नीतियों, विभागीय कार्यपद्धति या वरिष्ठ अधिकारी पर टिप्पणी नहीं होगी। राष्ट्रीय सुरक्षा और शासन तंत्र से जुड़े मुद्दों पर भी टिप्पणी की मनाही है।
संदिग्ध आचरण या आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों की मित्रता स्वीकार नहीं होगी। ऐसे लोगों को फॉलो करना या उनके साथ कोलेबोरेट करना भी मना है। प्रोफाइल पिक या डीपी (DP – Display Picture) में राजनीतिक पार्टी या संगठन के प्रतीक नहीं लगेंगे।
निजी अकाउंट बनाते समय सरकारी CUG (Closed User Group) सिम, इंटरनेट या वाईफाई का उपयोग नहीं होगा। IP (Internet Protocol) एड्रेस और सरकारी ई-मेल आईडी भी इस्तेमाल नहीं होंगे। निजी मोबाइल पर सरकारी सोशल मीडिया अकाउंट लॉगिन भी नहीं होगा।
ड्यूटी के दौरान सोशल मीडिया का अनावश्यक उपयोग भी प्रतिबंधित है। सेवा से जुड़ी शिकायतें सोशल मीडिया पर नहीं रखी जाएंगी। पुलिसकर्मी अपनी समस्या वरिष्ठ अधिकारी के सामने रखेंगे।
निर्देश थाना स्तर से पुलिस मुख्यालय तक की सभी इकाइयों को भेजे गए हैं। इन्हें रोल कॉल में पढ़कर सुनाना अनिवार्य किया गया है। हर कर्मचारी के संज्ञान में इन्हें लाना जरूरी है।
परिपत्र के साथ गृह मंत्रालय के BPR&D (Bureau of Police Research and Development) का पत्र भी संलग्न है। यह पत्र 22 नवंबर 2024 का है। उसमें सरकारी कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया अनुशासन की विस्तृत गाइडलाइन है।
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क्यों जारी हुई गाइडलाइन
परिपत्र में मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 का हवाला दिया गया है। नियम 3 (1), 9 और 10 के साथ पुलिस रेगुलेशन की कंडिका 64 भी लिखी गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की गाइडलाइन भी आधार बनी है। साथ में MEITY (Ministry of Electronics and Information Technology) की गाइडलाइन भी शामिल है।
वर्दी में रील पर रोक
ऐसा पुराना कंटेंट तत्काल हटाना होगा। परिजनों और मित्रों के लिए भी यही रोक है। वे पुलिस यूनिफॉर्म, वाहन या सरकारी हथियारों के साथ वीडियो अपने अकाउंट पर नहीं डालेंगे। वर्दी की गरिमा के खिलाफ पारिवारिक कार्यक्रमों की पोस्ट भी नहीं होगी।
AI टूल्स पर अपलोड नहीं होंगे दस्तावेज
पुलिस की टैक्टिक्स, फील्ड क्राफ्ट या जांच की तकनीक भी उजागर नहीं होगी। बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के ऐसी जानकारी साझा करना मना है। जब्त सामग्री और हथियार बिना सीलबंद किए पोस्ट नहीं होंगे।
संवेदनशील ड्यूटी पर सख्ती
अतिविशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा में लगे कर्मचारी महत्वपूर्ण स्थलों के फोटो या सेल्फी नहीं डालेंगे। हथियार प्रशिक्षण, ड्रिल, चांदमारी और दबिश के फोटो या वीडियो पर पूरी रोक है। इन्हें लाइव करना भी मना है।
पीड़ित और जांच की निजता
दुष्कृत्य और यौन हिंसा से पीड़ित महिला और बालिका की पहचान उजागर नहीं होगी। किशोर न्याय अधिनियम के तहत आने वाले बच्चों की पहचान भी उजागर नहीं होगी।
विवेचना या कोर्ट में लंबित अपराध की ऐसी जानकारी पोस्ट नहीं होगी, जो अभियोजन पर असर डाले। अदालत के आदेश पर ऐसी टिप्पणी भी नहीं होगी, जिससे अवमानना हो।
कमाई और प्रचार पर शर्तें
निजी व्यवसाय, कंपनी, उत्पाद या सेवा का प्रचार भी मना है। इसे सिविल सेवा आचरण नियम 16 का उल्लंघन माना जाएगा। सोशल मीडिया से कोई आय हुई हो, तो पूरा विवरण देना होगा। यह विवरण गाइडलाइन जारी होने के 30 दिन के भीतर विभाग को देना अनिवार्य है।
टिप्पणी, दोस्ती और DP के नियम
शासन की नीतियों, विभागीय कार्यपद्धति या वरिष्ठ अधिकारी पर टिप्पणी नहीं होगी। राष्ट्रीय सुरक्षा और शासन तंत्र से जुड़े मुद्दों पर भी टिप्पणी की मनाही है।
संदिग्ध आचरण या आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों की मित्रता स्वीकार नहीं होगी। ऐसे लोगों को फॉलो करना या उनके साथ कोलेबोरेट करना भी मना है। प्रोफाइल पिक या डीपी (DP – Display Picture) में राजनीतिक पार्टी या संगठन के प्रतीक नहीं लगेंगे।
सरकारी सुविधाओं का निजी उपयोग
ड्यूटी के दौरान सोशल मीडिया का अनावश्यक उपयोग भी प्रतिबंधित है। सेवा से जुड़ी शिकायतें सोशल मीडिया पर नहीं रखी जाएंगी। पुलिसकर्मी अपनी समस्या वरिष्ठ अधिकारी के सामने रखेंगे।
रोल कॉल में सुनाए जाएंगे निर्देश
परिपत्र के साथ गृह मंत्रालय के BPR&D (Bureau of Police Research and Development) का पत्र भी संलग्न है। यह पत्र 22 नवंबर 2024 का है। उसमें सरकारी कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया अनुशासन की विस्तृत गाइडलाइन है।
ये खबरें भी पढ़ें...
ग्वालियर में NHAI सड़क सैंपल फेल, ठेकेदार के भुगतान से पहले हाईकोर्ट में सुनवाई
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