भोपाल फर्जी पासपोर्ट केस: STF के रडार पर 75 आरोपी, 19 फरार जालसाजों पर 20 हजार का इनाम
समझें क्या है पूरा मामला...
- भोपाल में बांग्लादेशी नागरिकों को फर्जी पासपोर्ट दिलाने वाला नेटवर्क पकड़ में आया है।
- एसटीएफ (Special Task Force) ने अब तक 75 आरोपी चिह्नित किए हैं।
- इनमें से 19 आरोपी अभी फरार हैं।
- फरार आरोपियों पर 20-20 हजार रुपए का इनाम रखा गया है।
- डबरा और भोपाल के बौद्ध मठों के पते से फर्जी पासपोर्ट बनवाए गए।
भोपाल फर्जी पासपोर्ट केस: 75 आरोपी चिह्नित
भोपाल में बांग्लादेशी नागरिकों को फर्जी पासपोर्ट दिलाने वाला बड़ा नेटवर्क सामने आया है। एसटीएफ (Special Task Force) की जांच में अब तक 75 आरोपी चिह्नित हो चुके हैं। इनमें बांग्लादेशी नागरिकों को फर्जी दस्तावेज, पता और गवाह देने वाले लोग शामिल हैं। मामले में 19 आरोपी अभी भी फरार हैं। इन सभी पर 20-20 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया है।
फरार आरोपियों की सूची
फरार आरोपियों में डबरा का गुलाब राय और एक अन्य आरोपी शामिल है। भोपाल से 14 आरोपी फरार बताए गए हैं। बैतूल से तीन आरोपी भी अभी पकड़ में नहीं आए हैं। इन सभी की तलाश तेज कर दी गई है। पुलिस टीमें अलग-अलग राज्यों में दबिश दे रही हैं।
मठों के पते का हुआ इस्तेमाल
एसटीएफ डीआईजी राहुल लोढ़ा के मुताबिक आरोपियों ने कई शहरों के मठों के पते इस्तेमाल किए। भोपाल, बैतूल, छिंदवाड़ा, डबरा और पाहुर्ना के मठों के पते से पासपोर्ट बनवाए गए। जांच में कुछ अफसरों और कर्मचारियों की मिलीभगत भी सामने आई है। अब पासपोर्ट सेवा केंद्र से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच हो रही है।
तीन गवाहों पर टिकी जांच
जांच में एक अहम कड़ी सामने आई है। करीब 70 फर्जी पासपोर्ट में से 50 पासपोर्ट में सिर्फ तीन लोग गवाह बने। इनमें गयाप्रसाद गौतम, गुलाब राय और रियाल चौधरी उर्फ भंते मेतानंद शामिल हैं। ज्यादातर पासपोर्ट में इन्हीं तीनों के मोबाइल नंबर भी दर्ज मिले। इसी वजह से एसटीएफ की जांच इन्हीं तीनों के इर्दगिर्द घूम रही है।
कैसे मिले गुलाब और भंते
फरार आरोपी गुलाब राय की मुलाकात रियाल चौधरी से बैतूल के आमला में हुई थी। यहां एक शिविर के दौरान दोनों की पहचान हुई। इसके बाद झांसी में लगे शिविर में भी दोनों मिले। साल 2022 में डबरा के आंबेडकर पार्क में शिविर लगा था। गुलाब यहां अपने साथियों के साथ पहुंचा था। इसके बाद बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए विदेश जाने की बात सामने आई। इसी आधार पर कई फर्जी पासपोर्ट बनवाए गए। एसटीएफ को गुलाब के झांसी में छिपे होने की जानकारी मिली है।
छह राज्यों में चल रही तलाश
फरार आरोपी सिर्फ मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं हैं। इनके असम, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, दिल्ली और पंजाब में छिपे होने की जानकारी मिली है। एसटीएफ की टीमें इन राज्यों में संभावित ठिकानों पर दबिश की तैयारी कर रही हैं। जल्द ही कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो सकती है।
सरपंच से भंते बनने की कहानी
गिरफ्तार आरोपी गयाप्रसाद गौतम चिनोर के बनवार का पूरा गांव का रहने वाला है। वह 1994 में अपने गांव का सरपंच रह चुका है। साल 2019 में उसने बौद्ध धर्म की दीक्षा ली। इसके बाद 2021-22 में वह डबरा के सिमरिया टेकरी स्थित आंबेडकर पार्क में भंते के रूप में रहने लगा। एसटीएफ ने उसे 23 सितंबर को गिरफ्तार किया।
भोपाल से सबसे ज्यादा मामले
जांच में भोपाल का कनेक्शन सबसे बड़ा निकला है। एसटीएफ ने भोपाल के अन्नानगर से 40 फर्जी पासपोर्ट से जुड़े मामले चिह्नित किए। डबरा से 17, बैतूल के आमला बौद्ध मठ से 11 और छिंदवाड़ा-पाहुर्ना से दो मामले सामने आए। इस तरह भोपाल इस पूरे नेटवर्क का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है।
अब तक की गिरफ्तारी और टाइमलाइन
यह मामला 2021 से 2023 के बीच शुरू हुआ था। इस दौरान डबरा के बौद्ध विहार के पते से करीब 30 पासपोर्ट जारी किए गए थे। सात सितंबर 2026 को एसटीएफ ने नेटवर्क का खुलासा करते हुए रियाल चौधरी को गिरफ्तार किया। उसी दिन पूछताछ के बाद साथी विप्लव अधिकारी को भी पकड़ा गया। आठ सितंबर को जांच में 70 से ज्यादा संदिग्ध पासपोर्ट सामने आए। इसकी कड़ियां असम और बंगाल तक पहुंचीं। नौ सितंबर को भोपाल कनेक्शन सामने आया और अन्नानगर मठ से 40 पासपोर्ट जारी होने की बात पता चली।
दस सितंबर को भोपाल कनेक्शन मिलने के बाद जांच और तेज हुई। इसी दिन प्रियान रॉय और जॉय चौधरी को भी गिरफ्तार किया गया। अठारह सितंबर को नसीम अख्तर पकड़ा गया। तेईस सितंबर को गयाप्रसाद गौतम की गिरफ्तारी हुई। इस तरह अब तक कुल छह आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। चौबीस सितंबर को एसटीएफ ने कुल 75 आरोपियों की पहचान की पुष्टि की।
आगे क्या होगा
एसटीएफ की जांच अभी जारी है। पासपोर्ट सेवा केंद्र से जुड़े अफसरों की भूमिका की जांच अहम मानी जा रही है। फरार 19 आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की उम्मीद जताई जा रही है। यह मामला सिर्फ फर्जी दस्तावेज तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा माना जा रहा है।
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