एमपी के 5 जिलों में फैला था फर्जी पासपोर्ट का जाल, धर्म की आड़ में चलता था खेल

Manya Jain | Sept 12, 2026, 13:46 IST
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mp stf fake passport syndicate 5 district
mp stf fake passport syndicate 5 district

मध्यप्रदेश एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि फर्जी पासपोर्ट बनाने वाला गिरोह कई जिलों तक फैला हुआ है। इसका नेटवर्क भोपाल, ग्वालियर, बैतूल और पांढुर्ना-छिंदवाड़ा तक मिला है। जांच में अब तक 70 फर्जी पासपोर्ट की पहचान की जा चुकी है।

अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को भारतीय पहचान दिलाने के मामले में मध्यप्रदेश एसटीएफ की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि फर्जी दस्तावेज और पासपोर्ट बनाने वाला यह नेटवर्क कम से कम 5 जिलों तक फैला हुआ था। आरोप है कि इस पूरे खेल में धर्म की आड़ का इस्तेमाल किया गया।

एसटीएफ की जांच में प्रदेशभर में अब तक 70 फर्जी पासपोर्ट की पहचान की गई है। इनमें भोपाल के 40, ग्वालियर के डबरा क्षेत्र में एक ही पते और मोबाइल नंबर से बने 17 पासपोर्ट शामिल हैं। इसके अलावा बैतूल में 11 और पांढुर्ना-छिंदवाड़ा में एक-एक फर्जी पासपोर्ट मिले हैं।

जांच एजेंसियों के मुताबिक डबरा के सिमरिया गांव स्थित तथागत बुद्ध विहार इस मामले का अहम केंद्र बनकर सामने आया है। यहीं से जुड़े सुरागों के आधार पर जांच आगे बढ़ रही है और मामले की नई-नई परतें खुल रही हैं।

धर्म की आड़ में कैसे चलता था खेल

खुलासा हुआ है कि इस नेटवर्क के पीछे मुख्य सूत्रधार कुछ स्थानीय व्यक्ति और दलाल थे। जांच के मुताबिक चीनोर (पुरा बनवार) का एक व्यक्ति पहले बहुजन विचारधारा से जुड़ा सक्रिय राजनीतिक कार्यकर्ता था।

जिसने अपनी पहचान बदलकर बौद्ध भिक्षु की उपाधि धारण कर ली। इसी तरह जनकगंज (माधौनगर) के एक अन्य व्यक्ति ने भी भेष बदलकर बौद्ध भिक्षु की एक और उपाधि अपना ली।

बौद्ध भिक्षु के रूप में स्थापित होने से सिमरिया स्थित बुद्ध विहार और आंबेडकर पार्क में इनका आना-जाना सामान्य और संदेह से परे हो गया था। जांच के मुताबिक इसी का फायदा उठाकर इन दोनों ने एक बांग्लादेशी घुसपैठिए और इस पूरे मामले के मास्टरमाइंड के साथ मिलकर डबरा के पते पर फर्जी पासपोर्ट तैयार करवाने का जिम्मा ले लिया था।

अब तक इतने आरोपी गिरफ्तार

इस मामले में मास्टरमाइंड समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर ग्वालियर जेल भेज दिया गया है। वहीं महाराष्ट्र से पकड़े गए एक अन्य आरोपी को एसटीएफ ने रिमांड पर लिया है। उससे पूरे नेटवर्क और फर्जी पासपोर्ट बनाने के तरीके को लेकर पूछताछ की जा रही है।

जांच में किन बातों पर फोकस

एसटीएफ अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी आधार कार्ड, निवास प्रमाण-पत्र और मार्कशीट बनाने में किन लोगों ने मदद की। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को बिना पहचान के अपने ठिकानों पर पनाह क्यों दी गई।

जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि किन संस्थाओं के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और इन पासपोर्ट के जरिए आरोपी किन-किन देशों की यात्रा कर चुके हैं।

इसके अलावा दस्तावेजों का सत्यापन करने वाले पुलिसकर्मियों को भी नोटिस देने की तैयारी शुरू कर दी गई है। एसटीएफ अब इस सिंडिकेट से जुड़े फरार आरोपियों, मददगारों और अन्य साजिशकर्ताओं की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है।

एसटीएफ भोपाल एसपी राजेश सिंह भदौरिया ने बताया कि सिंडिकेट के अन्य फरार मददगारों, संदिग्ध शिक्षकों और सह-साजिशकर्ताओं की तलाश में एसटीएफ लगातार दबिश दे रही है।

बौद्ध अनुयायी बनकर की विदेश यात्राएं

जांच में एक और अहम खुलासा हुआ है। एसटीएफ के मुताबिक, फर्जी पासपोर्ट हासिल करने वाले कुछ लोग खुद को बौद्ध अनुयायी बताते थे। इसी पहचान के आधार पर उन्होंने कई देशों की यात्रा की।

जांच एजेंसी को इनके थाईलैंड, मलेशिया, चीन, श्रीलंका और जापान जाने के सुराग मिले हैं। अब एसटीएफ यह पता लगाने में जुटी है कि इन विदेश यात्राओं के पीछे सिर्फ फर्जी पहचान का इस्तेमाल था या फिर इसके पीछे कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क भी काम कर रहा था।

सत्यापन प्रक्रिया पर उठे सवाल

एक ही पते से दर्जनों पासपोर्ट जारी होना गंभीर सवाल खड़े करता है। सामान्य तौर पर पुलिस सत्यापन में ऐसी गड़बड़ी पकड़ में आनी चाहिए थी। लेकिन यहां सालों तक यह मामला दबा रहा।

एसटीएफ अब यह जांच कर रही है कि सत्यापन प्रक्रिया में चूक कहां हुई। इसमें शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में है। अगर लापरवाही या मिलीभगत साबित हुई तो आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

आगे की कार्रवाई

एसपी एसटीएफ राहुल लोढ़ा के मुताबिक आरोपियों से पूछताछ जारी है। पूछताछ के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है। असम गई टीम की रिपोर्ट के बाद मामले में और खुलासे हो सकते हैं।

यह मामला सिर्फ फर्जी दस्तावेजों तक सीमित नहीं दिखता। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलू भी जुड़े हो सकते हैं। इसलिए जांच एजेंसियां इसे गंभीरता से ले रही हैं।

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