भोपाल स्वास्थ्य संचालनालय की गाड़ियां, कंप्यूटर-लैपटॉप जब्त, भवन भी होगा कुर्क
समझें क्या है पूरा मामला...
- स्वास्थ्य संचालनालय में कुर्की, दो गाड़ियां जब्त कीं।
- भोपाल में बकाया न चुकाने पर सरकारी दफ्तर कुर्क।
- चार करोड़ का बकाया, अब भवन पर भी खतरा।
- कोलकाता कंपनी का पुराना बकाया, कोर्ट का सख्त आदेश।
- कंप्यूटर लैपटॉप जब्त, विभाग की मुश्किलें बढ़ीं।
भोपाल के स्वास्थ्य संचालनालय में सोमवार को कुर्की की कार्रवाई हुई। जिला कोर्ट के आदेश पर यह कदम उठाया गया। टीम ने दो गाड़ियां जब्त कीं। कंप्यूटर-लैपटॉप समेत दफ्तर का सामान भी कुर्क किया गया। बकाया राशि अब चार करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।
भोपाल स्थित स्वास्थ्य संचालनालय में सोमवार को एक बार फिर कुर्की की कार्रवाई देखने को मिली। जिला कोर्ट के आदेश पर कोलकाता की एक निजी कंपनी के बकाया भुगतान की वसूली के लिए टीम विभाग परिसर पहुंची।
कार्रवाई के दौरान दो गाड़ियां और कार्यालय में रखा सामान कुर्क किया गया। इसमें कंप्यूटर और लैपटॉप जैसी जरूरी चीजें भी शामिल रहीं।
कंपनी के अधिवक्ता पूर्णाशिस भुनिया के अनुसार यह पूरा विवाद कई साल पुराना है। उनके मुताबिक स्वास्थ्य संचालनालय ने वर्ष 2011 से 2013 के बीच कोलकाता की मेसर्स नितापोल इंडस्ट्रीज से कीटनाशक दवाएं खरीदी थीं। यह सौदा करीब 50.70 लाख रुपये का था।
भुगतान क्यों अटका
कंपनी का आरोप है कि दवाओं की पूरी आपूर्ति के बावजूद भुगतान नहीं किया गया। इसी वजह से मामला अदालत तक पहुंचा। सालों तक भुगतान न होने से बकाया राशि पर ब्याज भी बढ़ता गया।
हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक गया मामला
यह भुगतान विवाद सिर्फ जिला कोर्ट तक सीमित नहीं रहा। अधिवक्ता के मुताबिक मामला हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक गया। वहां भी विभाग को कंपनी का बकाया चुकाने के निर्देश दिए गए।
इतने बड़े स्तर पर सुनवाई के बावजूद जब भुगतान नहीं हुआ, तो अदालत के आदेश पर संपत्ति कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू हुई। यही वजह है कि अब सीधे विभाग परिसर से सामान जब्त किया जा रहा है।
पहले भी हुई थी कोशिश
यह पहला मौका नहीं है जब स्वास्थ्य संचालनालय की संपत्ति कुर्क करने की कोशिश हुई हो। नवंबर 2024 में भी कुर्की टीम विभाग पहुंची थी। उस समय करीब 19.34 करोड़ रुपए की वसूली का आदेश था।
लेकिन उस दौरान अधिकारियों के विरोध के बाद टीम को खाली हाथ लौटना पड़ा था। इसके बाद कंपनी की ओर से दो वाहनों की कुर्की की गई थी। ये वाहन फिलहाल भोपाल जिला कोर्ट परिसर में खड़े बताए जा रहे हैं।
विरोध के बाद क्या बदला
पिछली बार के विरोध ने मामले को और उलझा दिया था। इस बार कोर्ट के आदेश को लेकर कार्रवाई ज्यादा सख्ती से की गई, जिसमें कर्मचारियों की मौजूदगी में सामान जब्त किया गया।
अब भवन पर भी मंडराया खतरा
सोमवार की कार्रवाई के दौरान जिला कोर्ट से जुड़े कर्मचारी भी मौजूद रहे। अधिवक्ता के अनुसार कोर्ट के आदेश के तहत ही यह पूरी प्रक्रिया चल रही है। दो गाड़ियों के अलावा कार्यालय का सामान भी जब्त हुआ है।
अधिवक्ता ने साफ किया कि ब्याज समेत बकाया राशि अब चार करोड़ रुपए से ज्यादा हो चुकी है। उनका कहना है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ, तो आगे स्वास्थ्य संचालनालय के भवन की भी कुर्की हो सकती है।
विभाग के लिए क्यों गंभीर है मामला
यह मामला सिर्फ एक कंपनी के बकाया भुगतान तक सीमित नहीं रह गया है। बार-बार कुर्की की कार्रवाई से विभाग के कामकाज पर भी असर पड़ने की आशंका है। सरकारी संपत्ति के जब्त होने से प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो सकता है।
साथ ही यह मामला सरकारी विभागों में समय पर भुगतान न होने की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। अदालत के बार-बार आदेश के बावजूद भुगतान न होना गंभीर लापरवाही की ओर इशारा करता है।
आगे क्या हो सकता है
फिलहाल गेंद स्वास्थ्य संचालनालय के पाले में है। यदि विभाग जल्द बकाया राशि का भुगतान करता है, तो आगे की कुर्की कार्रवाई रुक सकती है। लेकिन देरी होने पर भवन कुर्क होने का खतरा बना रहेगा।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि विभाग की ओर से भुगतान को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं। तब तक कंपनी की कानूनी टीम आगे की कार्रवाई जारी रख सकती है।
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