पांच साल से अटका फ्लाईओवर अब होगा तैयार! हाईकोर्ट के दखल से बदलेगी तस्वीर
Neel Tiwari | Aug 31, 2026, 17:21 IST
5 साल से अटका फ्लाईओवर अब होगा तैयार
जबलपुर के लंबे समय से अटके फ्लाईओवर पर अब प्रक्रिया तेज हो गई है। हाईकोर्ट ने सरकार से नया प्रस्ताव मांगा है। घमापुर क्षेत्र में सड़क चौड़ी करने की तैयारी है। रूट तय होते ही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू होगी। अगली सुनवाई में तस्वीर साफ होगी।
समझें क्या है पूरा मामला
- जबलपुर में घमापुर से रद्दी चौकी तक फ्लाईओवर लंबे समय से अटका है।
- कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने इसके लिए हाई कोर्ट में याचिका लगाई।
- कोर्ट ने ट्रैफिक राहत के लिए फ्लाईओवर का नया रूट सुझाया।
- सरकार ने ट्रैफिक और सड़क की स्थिति का आकलन किया है।
- रूट तय होते ही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तेज होगी।
फ्लाईओवर पर अब तेज हुई प्रक्रिया
घमापुर, आंबेडकर चौक और आसपास रोज जाम की स्थिति रहती है। इसी समस्या को लेकर विधायक लखन घनघोरिया हाई कोर्ट पहुंचे थे। उनकी याचिका में फ्लाईओवर निर्माण में देरी का मुद्दा उठाया गया था। अब कोर्ट की निगरानी से निर्माण की उम्मीद बढ़ी है।
आज की सुनवाई में सरकार ने क्या बताया
अतिक्रमण की चपेट में आने वाले निर्माण भी देखे गए हैं। इन सभी बिंदुओं पर सरकार विस्तृत जवाब तैयार कर रही है। सरकार ने जवाब देने के लिए कोर्ट से और समय मांगा। अब अगली सुनवाई में सरकार अपना प्रस्ताव रखेगी।
हाईकोर्ट ने फ्लाईओवर का कौन सा रूट सुझाया
इस रूट से कई प्रमुख इलाकों को राहत मिल सकती है। घमापुर चौराहे पर इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है। डॉ. आंबेडकर चौक पर भी जाम कम हो सकता है। हाई कोर्ट के सामने भी ट्रैफिक दबाव घट सकता है। कलेक्ट्रेट चौराहे पर भी राहत मिलने की उम्मीद है।
पहले किस रूट पर बनना था फ्लाईओवर
घमापुर में बड़ी संख्या में हट सकते हैं अतिक्रमण
घमापुर क्षेत्र में बड़ी संख्या में अतिक्रमण हट सकते हैं। हालांकि कार्रवाई तय रूट और नियमों के आधार पर होगी। अभी अंतिम रूट पर कोर्ट का फैसला बाकी है। इसलिए फिलहाल किसी निर्माण की अंतिम सूची सामने नहीं है।
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फ्लाईओवर से किन इलाकों को राहत मिल सकती है
राज्य न्यायिक अकादमी भी इसी क्षेत्र में है। अस्पतालों के कारण भी यहां लगातार आवाजाही रहती है। इन कारणों से सड़क पर वाहनों का दबाव बना रहता है। फ्लाईओवर बनने से मुख्य ट्रैफिक अलग हो सकता है। इससे स्थानीय सड़कों पर जाम कम होने की उम्मीद है।
फ्लाईओवर की लागत पहले कितनी थी
28 जुलाई 2022 को नया अनुमान भेजा गया था। इसके साथ रूट का नक्शा भी तैयार किया गया था। अधिकारियों की रिपोर्ट में फ्लाईओवर की जरूरत बताई गई थी। ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं का भी हवाला दिया गया था। याचिका में देरी से सरकारी खर्च बढ़ने की चिंता जताई गई थी।
विधायक ने सरकार से कब-कब सवाल पूछे
चार जुलाई 2024 को भी सवाल उठाया गया था। 16 दिसंबर 2024 को भी स्थिति पूछी गई थी। इसके अलावा उन्होंने कई लिखित आवेदन भी दिए। तीन मार्च 2022 को मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया गया था।
सात दिसंबर 2024 को भी आवेदन दिया गया। दस दिसंबर 2024 को भी विस्तृत आवेदन दिया गया। याचिका के अनुसार इन प्रयासों के बाद ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
हाईकोर्ट में दायर याचिका में क्या मांग थी
मदार टेकरी होकर फ्लाईओवर बनाने की मांग भी थी। याचिका में एक साल में काम पूरा करने की मांग थी। याचिका में देरी से बढ़ती लागत का मुद्दा भी था। याचिका के अनुसार देरी से जनता परेशान हो रही है।
साथ ही सरकारी खर्च बढ़ने की बात कही गई। इस मामले में विधायक के द्वारा विधानसभा में प्रश्न भी उठाए गए थे जिसकी जानकारी भी कोर्ट को दी गई है।
याचिका में फ्लाईओवर की जरूरत क्यों बताई गई
याचिका में दुर्घटनाओं और जाम की समस्या बताई गई थी। इसके कारण आम लोगों को रोज परेशानी होती है। याचिका में इसे पूरे शहर से जुड़ा जनहित मुद्दा बताया गया। विधायक ने कहा था कि देरी से लागत भी बढ़ेगी।
अब अगली सुनवाई में क्या तय हो सकता है
रूट तय होते ही जमीन पर कार्रवाई बढ़ सकती है। सड़क चौड़ी करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ सकती है। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई इसी प्रक्रिया का हिस्सा होगी।
फिलहाल निर्माण शुरू होने की तारीख तय नहीं हुई है। लेकिन कोर्ट के हस्तक्षेप से प्रक्रिया में तेजी आई है। जबलपुर के लोगों की नजर अब अगली सुनवाई पर है।
क्या फ्लाईओवर से जाम की समस्या कम होगी
कलेक्ट्रेट क्षेत्र में भी यातायात आसान होने की उम्मीद है। हालांकि अंतिम असर रूट और डिजाइन पर निर्भर करेगा। सड़क चौड़ीकरण भी इस परियोजना का अहम हिस्सा रहेगा। अतिक्रमण हटने के बाद सड़क की क्षमता बढ़ सकती है। इसलिए अगली सुनवाई के फैसले को अहम माना जा रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल फ्लाईओवर का अंतिम रूट
इस बदलाव से कई व्यस्त चौराहों को राहत मिल सकती है। सरकार अब इसी मुद्दे पर विस्तृत प्रस्ताव देगी। आम लोगों से सुझाव लेने की संभावना भी है। इसके बाद निर्माण की दिशा ज्यादा साफ हो जाएगी। रूट तय होने के बाद अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया बढ़ेगी। यही अगली सुनवाई का सबसे अहम बिंदु रहेगा।
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