भोपाल-इंदौर मास्टर प्लान फिर टला: ‘मेट्रोपॉलिटन विजन’ के फेर में 21 साल का इंतजार हुआ और लंबा
भोपाल का 21 साल पुराना मास्टर प्लान इंतजार अभी खत्म नहीं होने वाला। इंदौर के साथ मिलाकर बड़े मेट्रोपॉलिटन एरिया की तैयारी ने दोनों शहरों के नए मास्टर प्लान को फिर अधर में डाल दिया है। यानी प्लान बना, लेकिन लागू कब होगा—यह अब भी तय नहीं।
मामला क्या है
सरकार भोपाल और इंदौर को मिलाकर एक बड़ा मेट्रोपॉलिटन एरिया बनाना चाहती है। इसी वजह से पहले से तैयार मास्टर प्लान को अब नए सिरे से देखने की जरूरत पड़ रही है।
क्यों अटका मास्टर प्लान?
ड्राफ्ट तैयार हो चुका है, लेकिन मेट्रोपॉलिटन एरिया के हिसाब से बदलाव जरूरी। सरकार अंतिम मंजूरी से पहले फिर से समीक्षा करेगी जरूरत पड़ी तो प्लान दोबारा बनाया जाएगा।
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मेट्रोपॉलिटन एरिया क्या बदल देगा?
कुल दायरा 26 हजार वर्ग किमी से ज्यादा हो सकता है। आसपास के जिलों में जमीन की मांग बढ़ेगी। रियल एस्टेट, उद्योग, शिक्षा और हेल्थ सेक्टर में निवेश बढ़ेगा।
सरकार के संकेत क्या कहते हैं?
नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने साफ कहा है कि पहले मेट्रोपॉलिटन विजन देखा जाएगा, फिर मास्टर प्लान पर फैसला होगा। इसका मतलब—अभी और इंतजार तय है।
मास्टर प्लान में क्या-क्या था खास?
- भोपाल के लिए 2047 तक का प्लान
- इंदौर के लिए 2041 तक की रूपरेखा
- वर्टिकल डेवलपमेंट (ऊंची इमारतों) पर जोर
- आबादी के हिसाब से रिहायशी और कमर्शियल जोन तय
क्यों जरूरी है मास्टर प्लान?
मास्टर प्लान शहर के विकास का ब्लूप्रिंट होता है। इसके बिना शहर बेतरतीब फैलता है और मूलभूत सुविधाएं प्रभावित होती हैं।
भोपाल में क्यों बड़ा मुद्दा है यह?
- आखिरी मास्टर प्लान 2005 तक लागू था।
- 21 साल से नया प्लान लागू नहीं हुआ।
- आबादी 11 लाख से बढ़कर 25 लाख+ हो गई।
- देरी का असर आम लोगों पर।
- अवैध कॉलोनियों की संख्या बढ़ी।
- कई जगह बिजली-पानी जैसी सुविधाएं नहीं।
- प्लॉट खरीदने के बाद भी निर्माण पर विवाद।
राजनीति भी हुई तेज
कांग्रेस ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया है। कहा गया है कि देरी से शहर का विकास प्रभावित हो रहा है।
- आंदोलन की तैयारी और हेल्पलाइन जारी।
- कांग्रेस चरणबद्ध आंदोलन करेगी।
- एक व्हाट्सएप हेल्पलाइन नंबर जारी।
- लोग अपनी शिकायत और सुझाव भेज सकते हैं।
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आगे की प्रक्रिया क्या होगी?
- जब भी ड्राफ्ट जारी होगा—30 दिन दावे-आपत्ति
- 3 महीने सुनवाई फिर रिपोर्ट और दोबारा प्रक्रिया
- यानी लागू होने में अभी और समय लगेगा।
भोपाल और इंदौर का मास्टर प्लान अब सिर्फ देरी का नहीं, बल्कि ‘रीडिजाइन’ का मामला बन गया है। मेट्रोपॉलिटन एरिया का सपना बड़ा है, लेकिन फिलहाल शहरों का प्लान उसी में उलझकर आगे खिसकता नजर आ रहा है।