इंडस्ट्री में मंडीदीप से आगे निकली राजधानी: 51 नए हब्स के साथ बदला भोपाल का इंडस्ट्रियल नक्शा
समझें क्या है पूरा मामला...
- भोपाल के आसपास औद्योगिक नक्शा तेजी से बदल रहा है।
- शहर में अब 88 इंडस्ट्रियल हब सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।
- भोपाल क्षेत्र में 51 से ज्यादा नए औद्योगिक क्लस्टर बन रहे हैं।
- अचारपुरा, बगरोदा, तामोट और बड़ियाखेड़ी में नए सेक्टर आधारित हब तैयार हो रहे हैं।
- इन सभी परियोजनाओं से हजारों लोगों को नया रोजगार मिलने वाला है।
भोपाल में इंडस्ट्री का नया घेरा
भोपाल और उसके आसपास के इलाके में औद्योगिक विकास तेज हो गया है। पचास किलोमीटर के दायरे में जमीन का इस्तेमाल अब पूरी तरह बदल रहा है। यहां पहले सिर्फ भारी इंजीनियरिंग कंपनियां थीं। अब हर सेक्टर के लिए अलग औद्योगिक क्लस्टर बन रहे हैं।
भोपाल का बदलता नक्शा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भोपाल शहर बीएचईएल (Bharat Heavy Electricals Limited) और भारी इंजीनियरिंग के लिए जाना जाता रहा है। अब यहां सेक्टर के हिसाब से अलग इंडस्ट्रियल क्लस्टर बन रहे हैं। अचारपुरा में गारमेंट और टेक्सटाइल कंपनियां आ रही हैं। तामोट प्लास्टिक और पॉलिमर उद्योग का नया ठिकाना बन रहा है। बड़ियाखेड़ी में लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाई जा रही हैं। भोपाल, सीहोर, रायसेन और नर्मदापुरम तक यह औद्योगिक बेल्ट फैल चुका है।
51 नए औद्योगिक क्षेत्र
इस पूरे इलाके में अभी 88 इंडस्ट्रियल हब काम कर रहे हैं। इनके अलावा 51 से ज्यादा नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं। इनमें प्लास्टिक, गारमेंट, फार्मा और लॉजिस्टिक्स के क्लस्टर शामिल हैं। पावर और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर के लिए भी अलग जोन बनाए जा रहे हैं। यानी अब सिर्फ एक तरह की इंडस्ट्री पर निर्भरता नहीं रहेगी।
तीन नए हब की योजना
भोपाल में तीन नए इंडस्ट्रियल हब बनाने की योजना है। इनसे करीब 11 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। बैरसिया में एग्री-प्रोसेसिंग और फूड पैकेजिंग हब बनाया जा रहा है। यह हब 33.61 हेक्टेयर जमीन पर तैयार होगा। इसमें 1500 से 2000 लोगों को नौकरी मिल सकती है। साल 2026 के अंत तक यहां भूखंड आवंटन शुरू होगा। सतगढ़ी में लाइट इंडस्ट्री और ऑटो एसेंबली यूनिट लगेंगी। यह हब 69.91 हेक्टेयर में फैला होगा। यहां 3000 से 4000 नई नौकरियां बनेंगी।
यह प्रोजेक्ट 2026-27 तक तैयार होने की उम्मीद है। राजा भोज एयरपोर्ट के पास आईटी-इलेक्ट्रॉनिक्स हब बनाया जा रहा है। यहां इलेक्ट्रॉनिक असेंबली और डेटा सेंटर जैसी सुविधाएं मिलेंगी। आईटी-आईटीईएस (Information Technology - IT Enabled Services) और टेक स्टार्टअप्स के लिए भी जगह मिलेगी। इस हब से 4000 से 5000 लोगों को रोजगार मिल सकता है।
छह प्रमुख इंडस्ट्रियल हब
भोपाल के आसपास छह बड़े इंडस्ट्रियल हब पहले से काम कर रहे हैं। मंडीदीप हब सबसे बड़ा है और यहां 60 हजार से ज्यादा लोग काम करते हैं। यहां हर साल 6000 करोड़ रुपए का एक्सपोर्ट होता है। यहां हैवी इंजीनियरिंग, ऑटो, फार्मा और ऑप्टिकल फाइबर कंपनियां हैं। आगे यहां छह मंजिला टावर और वर्किंग वुमन हॉस्टल बनेगा। अचारपुरा में गारमेंट और टेक्सटाइल का काम होता है।
यहां 10 हजार लोगों को रोजगार मिला है। गोविंदपुरा में इलेक्ट्रिकल पैनल और हैवी फैब्रिकेशन का काम होता है। यहां बंद पड़ी फैक्ट्रियों की जमीन बेचकर नए स्टार्टअप लाए जाएंगे। बगरोदा में फूड और फार्मा पैकेजिंग की यूनिट हैं। यहां चार से पांच हजार लोग काम करते हैं। तामोट में प्लास्टिक और पॉलिमर उद्योग है। यहां ढाई से तीन हजार लोगों को रोजगार मिला है। बड़ियाखेड़ी में लॉजिस्टिक्स और एग्रो प्रोडक्ट की यूनिट हैं। यहां आठ से 10 हजार लोगों को काम मिल रहा है।
पुरानी जमीन का नया उपयोग
भोपाल में औद्योगिक विकास अब सिर्फ शहर के बाहर तक सीमित नहीं रहेगा। शहर के अंदर खाली पड़ी जमीन को भी प्लान में शामिल किया गया है। भोपाल की सतगढ़ी और मिसरोद के आसपास खाली जमीन का सर्वे हो रहा है। शहर के अंदर बचे इंडस्ट्रियल एरिया को भी दोबारा विकसित किया जाएगा। पुरानी और बंद पड़ी फैक्ट्रियों की जमीन का भी नया इस्तेमाल होगा। इससे शहर में जमीन की कमी की समस्या भी कम होगी।
एक्सपर्ट की राय
एमपीआईडीसी (Madhya Pradesh Industrial Development Corporation) के प्रबंध निदेशक चंद्रमौली शुक्ला ने इस बदलाव के बारे में बताया। उनके अनुसार प्रदेश ने पहली बार पुराने औद्योगिक क्षेत्रों को दोबारा विकसित करने की योजना बनाई है। साथ ही नई इंडस्ट्री के लिए भी अलग जमीन तय की गई है। उनका कहना है कि इससे रोजगार के साथ निवेश भी बढ़ेगा। एमएसएमई (Micro, Small and Medium Enterprises) और बड़ी कंपनियां दोनों को इसका फायदा मिलेगा।
आने वाले सालों की तैयारी
ज्यादातर नई परियोजनाएं 2026 और 2027 के बीच पूरी होंगी। सरकार का लक्ष्य है कि भोपाल जल्द बड़ा औद्योगिक केंद्र बने। नए हब से स्थानीय लोगों को गांव के पास ही नौकरी मिलेगी। इससे शहर की तरफ पलायन भी कम होगा। कई कंपनियां पहले से जमीन लेने में दिलचस्पी दिखा रही हैं। आने वाले समय में भोपाल की पहचान सिर्फ राजधानी नहीं बल्कि औद्योगिक शहर के तौर पर भी बनेगी।
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