पीएम मोदी बोले- मैं बाबा बागेश्वर तो नहीं हूं..., जानें IIT के छात्रों से ऐसा क्यों कहा?

Amresh Kushwaha | Aug 08, 2026, 13:17 IST
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मैं बाबा बागेश्वर तो नहीं हूं... पीएम मोदी
मैं बाबा बागेश्वर तो नहीं हूं... पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को IIT दिल्ली के दीक्षांत समारोह में पहुंचे। उन्होंने कहा कि मैं बाबा बागेश्वर नहीं हूं। साथ ही छात्रों को बदलती दुनिया में सीखते रहने और देश हित में फैसले लेने की सीख भी दी। जानें पीएम ने ऐसा क्यों कहां...

समझें क्या है पूरा मामला...

  • पीएम मोदी शनिवार को IIT दिल्ली के दीक्षांत समारोह में पहुंचे।
  • उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, मैं बाबा बागेश्वर नहीं हूं।
  • मोदी ने छात्रों को बदलती दुनिया में सीखते रहने को कहा।
  • उन्होंने मेडल पाने वाली छात्राओं की तारीफ भी की।
  • पीएम ने आजादी के संघर्ष और युवाओं की जिम्मेदारी पर बात की।

भाषण का मजाकिया अंदाज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार, 08 अगस्त को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। उन्होंने सबसे पहले छात्रों को नई शुरुआत की बधाई दी। इसके बाद उन्होंने मुस्कुराते हुए मजाकिया अंदाज में बात शुरू की।

उन्होंने कहा कि आज हर छात्र के मन में भविष्य को लेकर कुछ न कुछ जरूर चल रहा होगा। इसी बात पर उन्होंने कहा कि मैं बाबा बागेश्वर तो नहीं हूं, लेकिन कुछ तो चलता होगा। इस बयान पर हॉल में मौजूद छात्र और मेहमान हंस पड़े। पीएम ने माहौल को हल्का रखते हुए ही आगे की बात शुरू की।

IIT दिल्ली का दीक्षांत समारोह

पीएम मोदी ने कहा कि हर छात्र के मन में आने वाले कल की अलग तस्वीर होती है। किसी को पहली नौकरी और सैलरी का इंतजार होगा। तो कोई स्टार्टअप शुरू करने का सपना देख रहा होगा। कुछ छात्र आगे की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे होंगे। उन्होंने कहा कि सबके सपने अलग हैं, लेकिन उत्साह एक जैसा है।

इसके बाद उन्होंने छात्रों से उनका पहला दिन याद करने को कहा। उनके मुताबिक ऐसा लगता होगा जैसे कल ही ओरिएंटेशन हुआ था। और आज देखते ही देखते दीक्षांत समारोह का दिन आ गया। उन्होंने कहा कि आज से सभी छात्रों के जीवन में नया अध्याय शुरू हो रहा है।

बदलती दुनिया पर मोदी की सीख

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में तेजी से बदलती दुनिया का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज दुनिया का ग्लोबल ऑर्डर तेजी से बदल रहा है। इसके पीछे टेक्नोलॉजी को उन्होंने बड़ी वजह बताया। उनके मुताबिक अगले 20 से 30 साल में दुनिया कैसी होगी, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। उन्होंने साफ कहा कि टेक्नोलॉजी बदलेगी और दुनिया भी बदलेगी।

वहीं, इस बदलाव में वही आगे बढ़ेगा जो लगातार सीखता रहेगा। यह बात उन्होंने खासतौर पर छात्रों को आगे की जिंदगी के लिए कही। उनका मकसद छात्रों को सीखने की आदत बनाए रखने के लिए प्रेरित करना था।

बेटियों की तारीफ भी की

पीएम मोदी ने समारोह में मेडल पाने वाले छात्रों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि कई छात्रों को उनकी उपलब्धियों के लिए मेडल मिले हैं। इस पर उन्होंने सभी को दिल से बधाई भी दी। इसके साथ ही उन्होंने एक अहम बात भी जोड़ी।

उन्होंने कहा कि यदि मेडल पाने वालों में कुछ और लड़कियां होतीं तो और अच्छा होता। उन्होंने पूछा कि सिर्फ एक या दो लड़कियां ही क्यों, और भी होनी चाहिए थीं। इस बयान से उन्होंने बेटियों की शिक्षा और भागीदारी बढ़ाने का संदेश दिया।

आजादी के संघर्ष को किया याद

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में आजादी के दौर को भी याद किया। उन्होंने कहा कि हर पीढ़ी का अपना एक राष्ट्रीय दायित्व होता है। आजादी से पहले लोगों के सामने देश को आजाद कराने का लक्ष्य था। इसके लिए उस पीढ़ी ने लंबा संघर्ष किया। उन्होंने कई त्याग और बलिदान भी दिए।

पीएम ने कहा कि आज हम आजाद भारत में सांस ले रहे हैं। यह उसी पीढ़ी की मेहनत और कुर्बानी की वजह से संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि आज की चुनौतियां अलग हैं, इसलिए जिम्मेदारियां भी अलग हैं।

छात्रों के लिए बड़ा संदेश

भाषण के आखिर में पीएम मोदी ने छात्रों को एक अहम संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अगले 30 से 35 साल छात्रों के लिए बेहद अहम होंगे। इस दौरान वे जो भी काम करेंगे, उसका असर देश पर पड़ेगा। उनके मुताबिक यह असर विकसित भारत के सफर पर सीधा दिखेगा। इसलिए उन्होंने छात्रों से हर फैसला सोच समझकर लेने को कहा।

उन्होंने कहा कि हर फैसले से पहले यह सोचना जरूरी है कि इससे देश को क्या फायदा होगा। साथ ही यह भी सोचना चाहिए कि देश की कौन सी जरूरत पूरी होगी। इसी सोच के साथ पीएम ने छात्रों को भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

FAQ

  1. पीएम मोदी ने बाबा बागेश्वर वाला बयान कब और कहां दिया?
    यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में दिया। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि वे बाबा बागेश्वर नहीं हैं, लेकिन उनके मन में भी कुछ न कुछ जरूर चलता है। यह बयान छात्रों के भविष्य को लेकर उनकी उलझन पर टिप्पणी थी। इससे समारोह का माहौल हल्का हो गया।
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