बागेश्वर धाम में श्रद्धालु की मौत, पुलिस-पत्रकार ने दिया कंधा
Anjali Dwivedi | Jun 18, 2026, 15:50 IST
बागेश्वर धाम में पूरी हुई आखिरी इच्छा
मुंबई के 63 वर्षीय सतीश कामद की बागेश्वर धाम में हार्ट अटैक से मौत हो गई। परिजन मुंबई से हवाई मार्ग से पहुंचे। पुलिस, पत्रकार और स्वास्थ्यकर्मियों ने कंधा दिया। बेटी बोलीं, पिता की अंतिम इच्छा यहीं पूरी हुई।
समझें क्या है पूरा मामला
- मुंबई के आयरोली निवासी 63 वर्षीय सतीश कामद बागेश्वर धाम दर्शन के लिए आए थे।
- राम दरबार में अचानक हार्ट अटैक आने से उनकी मौत हो गई।
- परिवार मुंबई से हवाई मार्ग से छतरपुर पहुंचा और यहीं अंतिम उनका संस्कार किया।
- पुलिसकर्मी, पत्रकार और स्वास्थ्यकर्मियों ने अर्थी को कंधा देकर इंसानियत की मिसाल पेश की है।
- बेटी कृतिका ने बताया कि बागेश्वर धाम में अंतिम सांस लेना उनके पिता की आखिरी इच्छा थी।
आस्था की आखिरी यात्रा
कुछ दिन पहले सतीश जब बागेश्वर धाम के राम दरबार में बैठे थे, तभी अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। हार्ट अटैक इतना तेज था कि वे संभल नहीं सके और वहीं उन्होंने अंतिम सांस ली।
BAGESHWAR DHAM
परिवार वालों को घटना की सूचना कैसे मिली
सैकड़ों किलोमीटर दूर से आए इस परिवार के पास उस वक्त सिर्फ दुख था और एक अजनबी शहर था। लेकिन छतरपुर ने उन्हें अकेला नहीं छोड़ा। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सागर रोड स्थित भैंसासुर मुक्ति धाम में अंतिम संस्कार किया गया। मृतक के भाई दिनेश ने उन्हें मुखाग्नि दी।
इस अंतिम यात्रा में जो दृश्य बना, वह देखने वालों की आंखें नम कर गया। बागेश्वर धाम पुलिस चौकी के प्रधान आरक्षक रविंद्र मिश्रा, स्थानीय पत्रकार विनोद मिश्रा और जिला अस्पताल की टीम से गोविंद और संजय ने अर्थी को कंधा दिया। ये सभी सतीश कामद को जानते तक नहीं थे। फिर भी एक इंसान की आखिरी विदाई में वे परिवार की तरह साथ खड़े रहे।
बेटी की बात ने सबको रुला दिया अंतिम संस्कार के बाद बेटी कृतिका कामद से जब बात हुई तो उनकी आंखों में आंसू थे, लेकिन चेहरे पर एक अजीब सा सुकून भी था। उन्होंने कहा कि पिता हमेशा कहते थे कि मैं बागेश्वर धाम में अंतिम सांस लूं और परिवार को महाराज जी का आशीर्वाद मिले। भगवान ने उनकी यह इच्छा पूरी की। यह दुख तो है, लेकिन पिता जहां चाहते थे, वहीं गए। पत्नी स्नेह कामद ने बताया कि सतीश का बागेश्वर धाम से गहरा लगाव था। वे समय-समय पर यहां आकर सेवा कार्य भी करते थे। मुंबई में एक बार महाराज जी का आशीर्वाद भी उन्हें मिला था।
इंसानियत का वह पल जो याद रहेगा
बागेश्वर धाम आस्था का केंद्र है। लेकिन उस दिन वहां से दूर छतरपुर की एक मुक्ति धाम में इंसानियत का जो दर्शन हुआ, वह किसी भी धर्म से बड़ा था।
यह खबर क्यों जरूरी है
पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और पत्रकार समुदाय का इस अंतिम विदाई में शामिल होना यही बताता है कि सरकारी सेवा सिर्फ नौकरी नहीं, एक सामाजिक जिम्मेदारी भी है। ऐसी खबरें समाज को जोड़ती हैं और यह विश्वास दिलाती हैं कि अनजान जगह पर भी अपने मिल जाते हैं।
ये खबरें भी पढ़ें...
बागेश्वर धाम को विदेश से मिलेगा चंदा, पंडित धीरेंद्र शास्त्री की संस्था को केंद्र से मिली मंजूरी
बागेश्वर धाम दरबार में धीरेंद्र शास्त्री ने खोली चेलों की पोल, बोले- 'लौंडियाबाजी' के चक्कर में...
बागेश्वर धाम के आस-पास खेती की जमीन पर बिना प्लानिंग काट रहे प्लॉट
बागेश्वर धाम में 305 बेटियों का विवाह: रामभद्राचार्य हुए शामिल, बोले- धीरेंद्र शास्त्री के विवाह में आऊंगा
RCA चुनाव में बड़ा उलटफेर, राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम सिंह ने छोड़ा मैदान
By Ashish Bhardwaj
वेदांता ग्रुप को जल्द नया और युवा नेतृत्व मिलेगा: प्रिया अग्रवाल हेब्बर हो सकती हैं उत्तराधिकारी, कौन सी जिम्मेदारी मिलेगी?
By Arohi Raj
हाईकोर्ट की फटकार से जागा स्वास्थ्य विभाग: सचिव अमित कटारिया पर लगा जुर्माना, लापरवाही में कांकेर CMHO सस्पेंड
By Umeshwari Baghel
बंटी नागर सुसाइड केस: रियल एस्टेट कारोबारी की मौत पर तीन महिलाएं पुलिस के राडार पर
By Sanjay Gupta
ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, तो शोषण कैसे कर सकते हैं', नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
देश में मानसून की बेरुखी से 51% हिस्से में सूखे का संकट: खरीफ फसलों पर मार, बढ़ सकती है महंगाई और आम आदमी की मुश्किलें
By Aman Vaishnav, CHAKRESH
Live |उज्जैन में मस्जिद हटाने पर बवाल
By